BNT Desk: बिहार को विकसित राज्य बनाने की दिशा में सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में औद्योगिक और कौशल विकास (Skill Development) को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए टेक्नोलॉजी सेंटर की स्थापना की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने न केवल जमीन का आवंटन किया है, बल्कि भारी-भरकम बजट भी जारी किया है।
15 एकड़ में बनेगा सपनों का सेंटर
इस परियोजना के उद्घाटन के अवसर पर वक्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के योगदान की जमकर सराहना की। बताया गया कि सरकार ने करीब 15 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई है, जिसके बाद ही इस केंद्र का सपना साकार हो पाया है। यह केंद्र राज्य के तकनीकी ढांचे को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करेगा।
मुजफ्फरपुर और दरभंगा तक विस्तार
सिर्फ एक मुख्य केंद्र ही नहीं, बल्कि सरकार की योजना इसका जाल पूरे बिहार में फैलाने की है।
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एक्सटेंशन सेंटर: मुजफ्फरपुर, दरभंगा और अन्य प्रमुख जिलों में इन टेक्नोलॉजी सेंटर्स के ‘एक्सटेंशन सेंटर’ खोले जाएंगे।
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फायदा: इससे ग्रामीण और जिला स्तर के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के लिए पटना या राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। उन्हें उनके अपने क्षेत्र में ही आधुनिक मशीनों और तकनीक पर काम करने का मौका मिलेगा।
डिप्लोमा के साथ 100% रोजगार पर फोकस
इन केंद्रों की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ संचालित होने वाले आधुनिक पाठ्यक्रम होंगे।
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यहाँ युवाओं को सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि उद्योग की जरूरतों के हिसाब से डिप्लोमा और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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अर्थव्यवस्था को मजबूती: बिहार की 14 करोड़ की आबादी को ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ (युवा शक्ति) में बदलने के लिए यह पहल मील का पत्थर साबित होगी। जब युवाओं के हाथ में हुनर होगा, तो राज्य की अर्थव्यवस्था खुद-ब-खुद मजबूत होगी।
10 नए सेंटर्स की मांग और ₹200 करोड़ का निवेश
बिहार सरकार ने इस पूरे रिसर्च सिस्टम और आधुनिक तकनीक को विकसित करने के लिए 200 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है। इसके तहत एक अत्याधुनिक आईटी आधारित रिसर्च सेंटर भी बनाया जाएगा।
इतना ही नहीं, राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से बिहार में 10 और नए टेक्नोलॉजी सेंटर स्थापित करने की मांग की है, ताकि हर प्रमंडल स्तर पर तकनीकी शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित हो सके।
5 लाख करोड़ का निवेश और स्मॉल स्केल इंडस्ट्री पर जोर
सरकार का स्पष्ट मानना है कि बिहार को विकसित बनाने का रास्ता लघु उद्योगों (Small Scale Industries) से होकर गुजरता है।
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लक्ष्य: राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए 5 लाख करोड़ रुपये का विशाल लक्ष्य रखा गया है।
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मार्केटिंग: लक्ष्य केवल उत्पादन करना नहीं, बल्कि बिहार में बने उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की वैश्विक स्तर पर मार्केटिंग करना भी है, ताकि ‘ब्रांड बिहार’ को पहचान मिल सके।
शिक्षा और प्रशासन में सुधार
औद्योगिक विकास के साथ-साथ बुनियादी शिक्षा को भी मजबूत किया जा रहा है:
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शिक्षा: राज्य के हर ब्लॉक में डिग्री कॉलेज और 533 ब्लॉकों में मॉडल स्कूल खोलने की योजना पर काम शुरू हो गया है।
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प्रशासनिक कैंप: जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए अंचल और थाना स्तर पर हर महीने विशेष कैंप लगाए जाएंगे, ताकि लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
विकसित बिहार से विकसित भारत
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि जब तक बिहार प्रगति नहीं करेगा, तब तक देश की पूर्ण प्रगति संभव नहीं है। शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और औद्योगिक ढांचे में किए जा रहे ये सुधार आने वाले समय में बिहार से पलायन को रोकने और राज्य को एक ‘इंडस्ट्रियल हब’ बनाने में निर्णायक साबित होंगे। अगले एक-डेढ़ महीने में नए केंद्रों के लिए जमीन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है, जिससे विकास की गति और तेज होगी।