BNT Desk: बिहार की राजधानी पटना में गंगा किनारे अवैध कब्जों के खिलाफ जिला प्रशासन का ‘बुलडोजर एक्शन’ थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को लगातार आठवें दिन प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल के साथ गंगा तट पर उतरी। जिलाधिकारी (DM) डॉ. त्यागराजन एसएम के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान के तहत सभ्यता द्वार से लेकर कलेक्ट्रेट के पिछले हिस्से तक फैले अवैध निर्माणों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया।
इस कार्रवाई से उन लोगों के बीच हड़कंप मच गया है, जिन्होंने सालों से गंगा की जमीन पर अवैध रूप से पक्के मकान और दुकानें खड़ी कर रखी थीं।
8वें दिन की बड़ी कार्रवाई: 35 पक्के ढांचे ध्वस्त
रविवार को हुई कार्रवाई मुख्य रूप से सभ्यता द्वार और कलेक्ट्रेट घाट के आसपास के क्षेत्रों पर केंद्रित रही। प्रशासन ने आधुनिक मशीनों और बुलडोजर की मदद से 35 पक्के अवैध निर्माणों को मिट्टी में मिला दिया।
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इन निर्माणों में कुछ बड़े गोदाम, पक्के कमरे और चारदीवारी शामिल थीं।
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कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी भी संभावित विरोध को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
डीएम का सख्त संदेश
जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने इस अभियान को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंगा किनारे की वह जमीन जिसका सर्वे नहीं हुआ है (असर्वेक्षित जमीन), वह पूरी तरह से सरकारी संपत्ति है।
डीएम ने एसडीओ (SDO) और एसडीपीओ (SDPO) को सख्त निर्देश दिए हैं कि:
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अतिक्रमण हटने के बाद उस जगह की 24 घंटे निगरानी की जाए।
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दोबारा कब्जा करने की कोशिश करने वालों पर तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज हो।
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अभियान में बाधा डालने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
NGT और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन
प्रशासन की यह कार्रवाई केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कानूनी बाध्यता भी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही निर्देश दिया है कि गंगा के ‘फ्लड प्लेन’ (बाढ़ क्षेत्र) में किसी भी प्रकार का निर्माण पर्यावरण के लिए घातक है।
प्रशासन ने अब ‘नो टॉलरेंस’ नीति अपनाई है। गंगा की अविरलता और निर्मलता बनाए रखने के लिए तटों को कब्जामुक्त करना अनिवार्य हो गया था। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने यह मेगा अभियान शुरू किया है।
अतिक्रमण हटने के बाद क्या है भविष्य की योजना?
पटना को एक आधुनिक और व्यवस्थित शहर बनाने के लिए प्रशासन ने इन खाली कराई गई जमीनों के लिए विशेष खाका तैयार किया है:
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हरित क्षेत्र (Green Zone): खाली हुई जगहों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाएगा ताकि शहर का प्रदूषण स्तर कम हो सके।
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पार्किंग और जनसुविधाएं: गंगा पथ (मरीन ड्राइव) के पास आने वाले पर्यटकों के लिए पार्किंग, शौचालय और बैठने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
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विकास कार्यों में तेजी: अशोक राजपथ और पटना साहिब जैसे इलाकों में चल रहे प्रोजेक्ट्स को इस जमीन के मिलने से रफ्तार मिलेगी।
अभियान के मुख्य बिंदु
| विवरण | ताजा अपडेट |
| अभियान का दिन | लगातार 8वां दिन |
| इलाका | सभ्यता द्वार से कलेक्ट्रेट घाट तक |
| ध्वस्त निर्माण | 35 पक्के अवैध ढांचे |
| प्रमुख आदेश | NGT और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन |
| भविष्य की योजना | हरित क्षेत्र और पार्किंग का विकास |
पटना प्रशासन का यह बुलडोजर एक्शन शहरवासियों को एक बड़ा संदेश दे रहा है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। अतिक्रमण हटने से न केवल गंगा का स्वरूप निखरेगा, बल्कि ‘गंगा पथ’ पर सफर करने वाले लोगों को भी एक सुंदर और खुला वातावरण मिलेगा। प्रशासन का लक्ष्य पटना को दुनिया के बेहतरीन रिवरफ्रंट शहरों की सूची में शामिल करना है, और इस दिशा में यह एक बड़ा कदम है।