BNT Desk: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नया विवाद गरमाया हुआ है। पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव और बिहार राज्य महिला आयोग के बीच टकराव अब कानूनी मोड़ लेता नजर आ रहा है। राजनीति में महिलाओं के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में फँसे सांसद पप्पू यादव को महिला आयोग ने कड़ी चेतावनी दी है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत पप्पू यादव द्वारा राजनीति में महिलाओं को लेकर दी गई एक कथित टिप्पणी से हुई। इस बयान को महिलाओं के सम्मान के खिलाफ मानते हुए बिहार राज्य महिला आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया। आयोग की अध्यक्ष अश्वमेध देवी (अप्पसरा) ने सांसद को आधिकारिक नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण माँगा है।
हालांकि, नोटिस का जवाब देने के बजाय पप्पू यादव ने सोशल मीडिया के जरिए आयोग की शक्तियों को चुनौती दे डाली। उन्होंने सोशल मीडिया पर आयोग की अध्यक्ष के खिलाफ भी कथित तौर पर आपत्तिजनक बातें कहीं और नोटिस को खारिज करने की कोशिश की, जिससे विवाद और गहरा गया है।
आयोग की शक्तियों को चुनौती और सोशल मीडिया वॉर
सांसद पप्पू यादव ने सोशल मीडिया पर आयोग की अध्यक्ष की एक पुरानी तस्वीर साझा की। इसे लेकर अध्यक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सांसद एक पुरानी तस्वीर के जरिए अनावश्यक विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि:
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सार्वजनिक जीवन में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की अपने वरिष्ठ नेताओं के साथ तस्वीरें होना एक सामान्य प्रक्रिया है।
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किसी तस्वीर के आधार पर किसी महिला की छवि खराब करना या आयोग की गरिमा को कम करना गलत है।
अध्यक्ष का पलटवार: “छात्र राजनीति से यहाँ तक पहुँची हूँ”
पप्पू यादव के आरोपों और सोशल मीडिया पोस्ट पर जवाब देते हुए आयोग की अध्यक्ष ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने 1997-98 में छात्र राजनीति से अपने करियर की शुरुआत की थी। दशकों तक जमीन पर काम करने और विभिन्न पदों पर रहने के बाद उन्हें महिला आयोग की जिम्मेदारी मिली है।
उन्होंने आगे कहा:
“मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुझे महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा है। मैं इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और गंभीरता के साथ निभा रही हूँ। किसी को भी यह अधिकार नहीं है कि वह इस संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुँचाए।”
मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी
मामला केवल नोटिस तक सीमित नहीं रहा है। अध्यक्ष ने अब सांसद के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने का निर्णय लिया है। उनका तर्क है कि महिला आयोग एक गरिमामय संस्थान है और इसके प्रमुख के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करना पूरी नारी शक्ति का अपमान है।
उन्होंने कहा कि वह यह कानूनी कदम इसलिए उठा रही हैं ताकि भविष्य में कोई भी नेता या रसूखदार व्यक्ति महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने या उनके खिलाफ ऐसी टिप्पणी करने की हिम्मत न करे। यह लड़ाई अब केवल एक नोटिस की नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान की बन गई है।
पप्पू यादव का पक्ष
अभी तक सांसद पप्पू यादव की ओर से इस मामले में कोई औपचारिक प्रेस बयान (Official Statement) जारी नहीं किया गया है। हालांकि, उनके सोशल मीडिया पोस्ट लगातार चर्चा में बने हुए हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है, जबकि महिला संगठनों और आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है।
बिहार की राजनीति में पप्पू यादव अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार महिला आयोग के साथ उनका टकराव उन्हें कानूनी पचड़े में डाल सकता है। तीन दिनों की समयसीमा समाप्त होने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि आयोग अगला क्या कदम उठाता है और क्या पप्पू यादव अपनी टिप्पणियों पर सफाई पेश करते हैं या यह कानूनी लड़ाई और लंबी खिंचती है।