नवादा में Cyber Fraud गैंग का पर्दाफाश, 10 आरोपी गिरफ्तार, लोन दिलाने के नाम पर लोगों को बनाते थे शिकार

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BNT Desk: बिहार में Cyber Fraud के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है, और इसी कड़ी में नवादा पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक विधि विरुद्ध किशोर को निरुद्ध किया गया है।

यह मामला सिर्फ ठगी का नहीं, बल्कि उस सुनियोजित नेटवर्क का है जो डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आम लोगों को निशाना बना रहा था।

गुप्त सूचना से शुरू हुई कार्रवाई

पूरे मामले की शुरुआत 19 मार्च को हुई, जब वारिसलीगंज थाना को एक अहम सूचना मिली। बताया गया कि ग्राम झौर स्थित एक मुर्गा फार्म के पास कुछ लोग साइबर ठगी की योजना बना रहे हैं।

सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई। वरीय अधिकारियों के निर्देश पर थानाध्यक्ष के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने बिना देर किए छापेमारी की रणनीति बनाई और तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी।

दो गांवों में छापेमारी, 11 लोग पकड़े गए

पुलिस टीम ने झौर और गोड़ापर गांव में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान झौर गांव से 5 और गोड़ापर गांव से 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

इनमें एक विधि विरुद्ध किशोर भी शामिल है, जिसे कानून के तहत निरुद्ध किया गया है।

यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि पुलिस अब साइबर अपराध के खिलाफ जमीनी स्तर पर भी सक्रियता बढ़ा रही है।

बरामदगी: मोबाइल और डेटा शीट ने खोले राज

छापेमारी के दौरान पुलिस को अहम सबूत भी मिले। आरोपियों के पास से 14 एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनका इस्तेमाल ठगी के लिए किया जा रहा था।

इसके अलावा 9 पन्नों का कस्टमर डेटा शीट भी मिली, जिसमें कई लोगों के मोबाइल नंबर और अन्य जानकारी दर्ज थी।

यही डेटा इस गिरोह का सबसे बड़ा हथियार था, जिसके जरिए ये लोग अपने शिकार तक पहुंचते थे।

कैसे काम करता था ठगी का नेटवर्क?

पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था।

  • आरोपी फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से लोगों का डेटा जुटाते थे

  • इसके बाद वे खुद को बजाज फाइनेंस, रिलायंस फाइनेंस या अन्य कंपनियों का कर्मचारी बताकर कॉल करते थे

  • लोगों को आसान लोन दिलाने का झांसा दिया जाता था

  • फिर प्रोसेसिंग फीस या अन्य चार्ज के नाम पर पैसे मांग लिए जाते थे

जैसे ही पीड़ित पैसे ट्रांसफर करता, आरोपी संपर्क तोड़ देते थे और नंबर बंद कर देते थे।

कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच

इस मामले में वारिसलीगंज थाना कांड संख्या 189/26 दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के साथ-साथ आईटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

फिलहाल सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया जारी है।

पुलिस का कहना है कि इस गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क की भी जांच की जा रही है, जिससे और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

साइबर ठगी से कैसे बचें?

इस घटना से एक बार फिर यह साफ हो गया है कि साइबर ठग अब नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।

  • अनजान नंबर से आए कॉल पर भरोसा न करें

  • किसी भी लोन या ऑफर के लिए पहले आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी लें

  • प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे देने से बचें

  • अपनी निजी जानकारी और बैंक डिटेल्स किसी के साथ साझा न करें

सतर्कता ही इस तरह के अपराधों से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।

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