BNT Desk: बिहार में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बिहार आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने देश विरोधी गतिविधियों के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए मुजफ्फरपुर जिले से एक संदिग्ध आरोपी को गिरफ्तार किया है।
शुरुआती जांच और तकनीकी विश्लेषण से यह खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार किया गया आरोपी पड़ोसी देश पाकिस्तान के एक कुख्यात हथियार तस्कर और उसके नेटवर्क के लगातार संपर्क में था। यह आरोपी भारत के खिलाफ काम करने वाले विदेशी हैंडलर्स के लिए एक स्थानीय एजेंट के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।
गुप्त सूचना पर एटीएस की बड़ी छापेमारी
बिहार एटीएस की विशेष टीम को पिछले कुछ समय से इनपुट मिल रहे थे कि मुजफ्फरपुर इलाके में कोई व्यक्ति देश विरोधी नेटवर्क के लिए काम कर रहा है। सटीक खुफिया जानकारी और गुप्त सूचना के आधार पर एटीएस ने मुजफ्फरपुर जिले के बोचहा प्रखंड के अंतर्गत आने वाले गरहा थाना क्षेत्र के रतनपुर गांव में एक योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की।
इस छापेमारी के दौरान टीम ने मो. मुस्तफा नाम के एक युवक को धर दबोचा। पुलिस और एटीएस के रिकॉर्ड के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी मो. मुस्तफा, स्थानीय निवासी मो. सागीर का पुत्र है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उसे अज्ञात और सुरक्षित स्थान पर ले जाकर गहन पूछताछ शुरू कर दी गई।
पाकिस्तानी हथियार तस्कर शहजाद भट्टी से था संपर्क
एटीएस की प्रारंभिक पूछताछ और जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद गंभीर हैं। आरोपी मो. मुस्तफा साधारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अत्यधिक सुरक्षित माने जाने वाले एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स (जैसे व्हाट्सएप, टेलीग्राम या सिग्नल) के जरिए सीमा पार बैठे दुश्मनों से जुड़ा हुआ था।
जांच में पता चला है कि मुस्तफा सीधे तौर पर पाकिस्तान के कुख्यात हथियार तस्कर शहजाद भट्टी और उसके एक मुख्य सहयोगी राणा हुनैन के संपर्क में था। पाकिस्तानी हैंडलर्स मुस्तफा को लगातार निर्देश दे रहे थे और वह उनके कहे अनुसार भारत की बेहद संवेदनशील, रणनीतिक और सैन्य महत्व की गुप्त जानकारियां उनके साथ साझा कर रहा था।
मोबाइल से मिले कई आपत्तिजनक डिजिटल सबूत
एटीएस की तकनीकी और साइबर विंग ने जब आरोपी मो. मुस्तफा के मोबाइल फोन की बारीकी से जांच की, तो उसमें से देश विरोधी गतिविधियों के पुख्ता डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए।
जांच एजेंसियों को मुस्तफा के फोन से निम्नलिखित संवेदनशील सामग्रियां मिली हैं:
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प्रतिबंधित क्षेत्रों के वीडियो: भारत के कई संवेदनशील और प्रतिबंधित सरकारी या सैन्य ठिकानों के वीडियो।
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तस्वीरें और लोकेशन: महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थलों की तस्वीरें और उनकी बिल्कुल सटीक जीपीएस (GPS) लोकेशन संबंधी डेटा।
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डिलीट किया गया डेटा: आरोपी ने पकड़े जाने के डर से कई चैट और तस्वीरें डिलीट कर दी थीं, लेकिन एटीएस ने जब चैट बैकअप और एक्टिव मैसेजिंग ऐप्स के डेटा को रिकवर किया, तो उसमें विदेशी हैंडलर्स के साथ लगातार बातचीत के सबूत मिले।
सटीक लोकेशन और तस्वीरें भेज रहा था आरोपी
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी मुस्तफा का मुख्य काम देश के संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्रों की रेकी करना था। वह इन जगहों पर जाकर वहां की तस्वीरें खींचता था, वीडियो तैयार करता था और फिर उनकी सटीक लोकेशन और मैपिंग के साथ पूरा डेटा पाकिस्तानी नेटवर्क को फॉरवर्ड कर देता था। आशंका जताई जा रही है कि इन जानकारियों का इस्तेमाल देश में किसी बड़ी अप्रिय घटना या आतंकी साजिश को अंजाम देने के लिए किया जा सकता था।
वित्तीय लेनदेन और विदेशी फंडिंग की जांच जारी
फिलहाल, बिहार एटीएस इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए मामले की हर पहलू से गहन जांच कर रही है। एटीएस की टीमें अब मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर काम कर रही हैं:
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ट्रैवल हिस्ट्री (यात्रा इतिहास): आरोपी पिछले कुछ समय में किन-किन राज्यों या जगहों पर गया और वहां उसने किससे मुलाकात की।
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कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR): देश के भीतर और बाहर वह किन-किन संदिग्ध नंबरों के संपर्क में था।
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फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन (वित्तीय लेनदेन): इस जासूसी के बदले उसे पाकिस्तान या किसी अन्य देश से कितनी रकम मिली। विदेशी फंडिंग के जरिए देश विरोधी गतिविधियों को कैसे संचालित किया जा रहा था, इसकी कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस खतरनाक नेटवर्क में बिहार या देश के अन्य हिस्सों से और कौन-कौन से लोग शामिल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी के खिलाफ जासूसी, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाने और देश विरोधी गतिविधियों से जुड़ी विभिन्न संगीन धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।