BNT Desk: जाली भारतीय मुद्रा (फेक इंडियन करेंसी) के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को खोखला करने और आतंकी गतिविधियों को फंड करने वाले एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ बिहार ATS (Anti-Terrorism Squad) को बड़ी सफलता मिली है। एटीएस की विशेष अदालत (Special ATS Court) ने नकली नोटों की तस्करी और उन्हें बिहार के बाजारों में खपाने के मामले में कुल छह मुख्य आरोपियों को सर्वसम्मति से दोषी करार दे दिया है। कोर्ट ने इस मामले में सजा की अवधि तय करने के लिए आगामी 3 जून की तारीख मुकर्रर की है।
पश्चिम बंगाल के मालदा से जुड़ा था गिरोह का मुख्य नेटवर्क
एटीएस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे रैकेट के तार पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से जुड़े हुए थे। मालदा को देश में नकली नोटों की तस्करी का एक प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट माना जाता है, जहां सीमा पार से जाली नोटों की खेप पहुंचती थी।
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बिहार का कनेक्शन: दोषी ठहराए गए आरोपी मालदा से इन उच्च गुणवत्ता वाले नकली नोटों को लेकर बिहार आते थे और यहां के ग्रामीण इलाकों, साप्ताहिक बाजारों और भीड़भाड़ वाले व्यापारिक केंद्रों में असली नोटों के बीच मिलाकर खपा देते थे।
साढ़े 5 लाख रुपये के जाली नोटों के साथ हुए थे गिरफ्तार
इस मामले की शुरुआत तब हुई थी जब बिहार एटीएस की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर एक विशेष ऑपरेशन चलाकर इन छह तस्करों को रंगे हाथों दबोचा था।
बरामदगी: गिरफ्तारी के समय इन आरोपियों के पास से ₹5,50,000 (साढ़े पांच लाख रुपये) मूल्य के नकली नोट बरामद किए गए थे। ये सभी नोट ₹500 के मूल्यवर्ग के थे और इन्हें इतनी सफाई से छापा गया था कि आम आदमी के लिए असली और नकली में फर्क करना बेहद मुश्किल था।
जून को अदालत सुनाएगी अंतिम सजा
अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान एटीएस के सरकारी वकील ने पुख्ता सबूत, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्ट पेश की, जिससे यह साबित हुआ कि ये सभी आरोपी देश की आर्थिक सुरक्षा के खिलाफ एक बड़े षड्यंत्र में शामिल थे। कोर्ट ने सभी दलीलों को सही मानते हुए छह आरोपियों को दोषी पाया है। कानून के जानकारों का कहना है कि देशद्रोह और जाली नोटों की तस्करी से जुड़ी धाराओं के तहत इन दोषियों को अधिकतम आजीवन कारावास (उम्रकैद) तक की सख्त सजा मिल सकती है। एटीएस इसे अपनी एक बड़ी कामयाबी मान रही है।