विक्रमशिला सेतु: बेली ब्रिज और ट्रस ब्रिज बनाने की तैयारी, IIT पटना करेगी सेफ्टी ऑडिट

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BNT Desk: भागलपुर के लोगों की लाइफलाइन माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और यातायात बहाली को लेकर बिहार सरकार ने तेजी से कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी को लेकर पथ निर्माण विभाग में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

यह बैठक विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल की अध्यक्षता में हुई, जिसमें विक्रमशिला सेतु की मौजूदा स्थिति, मरम्मत कार्य और जल्द यातायात शुरू कराने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में कई तकनीकी विशेषज्ञ और विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे।

सरकार का मुख्य उद्देश्य लोगों को जल्द राहत देना और सेतु पर आंशिक रूप से यातायात बहाल करना है।

क्षतिग्रस्त हिस्से की जांच और मरम्मत पर चर्चा

बैठक के दौरान विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से की तकनीकी जांच को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि सेतु के एक स्पैन में आई खराबी के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है।

तकनीकी विशेषज्ञों ने मौजूदा स्ट्रक्चर की स्थिति का आकलन किया और इस बात पर चर्चा की कि किस तरह कम समय में यातायात को फिर से शुरू किया जा सकता है।

बैठक में यह भी तय किया गया कि मरम्मत कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाएगा ताकि भविष्य में किसी तरह की समस्या न हो।

बेली ब्रिज बनाने की तैयारी

लोगों को जल्द राहत देने के लिए बैठक में बेली ब्रिज बनाने का फैसला लिया गया। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन यानी बीआरओ की मदद से जल्द ही बेली ब्रिज का निर्माण शुरू किया जाएगा।

बेली ब्रिज एक अस्थायी लेकिन मजबूत संरचना होती है, जिसका इस्तेमाल आपातकालीन स्थितियों में यातायात बहाल करने के लिए किया जाता है।

सचिव पंकज कुमार पाल ने बताया कि तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है ताकि जल्द से जल्द लोगों को राहत मिल सके।

उन्होंने कहा कि प्राथमिक लक्ष्य यह है कि कम से कम आंशिक रूप से यातायात तुरंत शुरू हो जाए।

ट्रस ब्रिज का निर्माण भी साथ-साथ होगा

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि बेली ब्रिज के साथ-साथ ट्रस ब्रिज का निर्माण कार्य भी समानांतर रूप से चलाया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, यह ट्रस ब्रिज दो लेन का होगा। इसके अलावा पैदल यात्रियों के लिए भी अलग से रास्ता बनाया जाएगा ताकि आम लोगों को सुरक्षित आवाजाही की सुविधा मिल सके।

सरकार ने इस प्रोजेक्ट को दो महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है। विभाग का कहना है कि समय सीमा के अंदर काम पूरा करने के लिए लगातार निगरानी की जाएगी।

विक्रमशिला सेतु को बताया गया लाइफलाइन

सचिव पंकज कुमार पाल ने बैठक में कहा कि विक्रमशिला सेतु भागलपुर और आसपास के जिलों के लोगों के लिए लाइफलाइन की तरह है।

उन्होंने कहा कि इस पुल के बंद होने से हजारों लोगों को रोज परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। व्यापार, परिवहन और आम लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हुई है।

इसी कारण सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है और हर स्तर पर तेजी से काम किया जा रहा है।

IIT पटना करेगी सेफ्टी ऑडिट

बैठक में यह भी बताया गया कि आईआईटी पटना की विशेषज्ञ टीम पूरे विक्रमशिला सेतु का सेफ्टी ऑडिट कर रही है।

इस ऑडिट के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि पुल का कौन-सा हिस्सा कितना सुरक्षित है और भविष्य में इसकी मजबूती के लिए क्या कदम उठाने की जरूरत है।

अधिकारियों के अनुसार, आईआईटी पटना की रिपोर्ट तीन सप्ताह के भीतर आने की उम्मीद है। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की स्थायी मरम्मत और मजबूतीकरण का फैसला लिया जाएगा।

अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश

सचिव ने साफ शब्दों में कहा कि मरम्मत और यातायात बहाली के काम में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने मुख्य अभियंता और अन्य तकनीकी टीमों को लगातार मौके पर कैंप करने का निर्देश दिया ताकि काम की निगरानी सही तरीके से हो सके।

बैठक में अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से मरम्मत कार्य, डिजाइन और यातायात बहाली की संभावित टाइमलाइन की जानकारी भी दी।

कई विशेषज्ञ और अधिकारी रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण बैठक में बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन, आईआईटी पटना की टीम, पुल विशेषज्ञ आलोक भौमिक और विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

सभी विशेषज्ञों ने सेतु की वर्तमान स्थिति और मरम्मत के संभावित उपायों पर अपनी राय रखी।

सरकार का कहना है कि विक्रमशिला सेतु को जल्द सुरक्षित और मजबूत बनाकर लोगों के लिए यातायात पूरी तरह बहाल किया जाएगा। फिलहाल लोगों की नजरें अब मरम्मत कार्य की प्रगति और यातायात शुरू होने की तारीख पर टिकी हैं।

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