बिहार: साहेबगंज विधायक राजू कुमार सिंह को दिल्ली हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं, दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार

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BNT Desk: बिहार के साहेबगंज से विधायक राजू कुमार सिंह को 2018 के हर्ष फायरिंग मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। विधायक ने निचली अदालत के उस फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसमें उन्हें दोषी करार देते हुए चार साल की सजा सुनाई गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने की उनकी मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उनकी अपील को स्वीकार कर लिया है।

 

हर्ष फायरिंग मामले में चार साल की सजा

यह मामला 31 दिसंबर 2018 की रात दिल्ली के फतेहपुर बेरी इलाके स्थित एक फार्महाउस में आयोजित नए साल की पार्टी के दौरान हुई फायरिंग से जुड़ा है। इस घटना में गोली लगने से डॉ. अर्चना गुप्ता की मौत हो गई थी। मामले की सुनवाई के बाद दिल्ली की निचली अदालत ने जून 2026 में राजू कुमार सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 पार्ट-II के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने उन्हें आर्म्स एक्ट के प्रावधानों के तहत भी दोषी माना। इसके बाद जुलाई में उन्हें चार साल की जेल की सजा सुनाई गई। आर्म्स एक्ट के तहत उन्हें अलग से दो महीने की सजा भी सुनाई गई थी।

 

हाईकोर्ट में फैसले को दी चुनौती

निचली अदालत के फैसले के खिलाफ राजू कुमार सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। उनकी ओर से दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ अपील दाखिल की गई। साथ ही उन्होंने अपनी दोषसिद्धि पर रोक लगाने और सजा को निलंबित करने की मांग की। 21 जुलाई को इस मामले की शुरुआती सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था। न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने मामले को गंभीर बताते हुए दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार किया था। अदालत ने मृतका के परिवार को भी मामले में अपना पक्ष रखने का अवसर दिया।

 

निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील स्वीकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने राजू कुमार सिंह की निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील को स्वीकार किया है। यानी मामले में निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी अपील पर हाईकोर्ट सुनवाई करेगा। हालांकि, दोषसिद्धि पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई। बाद में हाईकोर्ट ने चार साल की सजा को निलंबित कर दिया था, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक का मुद्दा अलग रहा। अदालत ने सजा निलंबित करते हुए जमानत बॉन्ड और जमानतदार की शर्त रखी थी। साथ ही पीड़िता के परिवार के लिए तय 25 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि जमा करने का निर्देश दिया था।

 

2018 की न्यू ईयर पार्टी में हुई थी फायरिंग

मामले के अनुसार, 31 दिसंबर 2018 की रात दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित रोज फार्म में नए साल की पार्टी आयोजित की गई थी। पार्टी के दौरान हर्ष फायरिंग हुई। इसी दौरान डॉ. अर्चना गुप्ता को गोली लगी और उनकी मौत हो गई। निचली अदालत ने अपने फैसले में उपलब्ध गवाहों और फॉरेंसिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया था। अदालत ने कहा था कि पार्टी के दौरान फायरिंग के दो अलग-अलग दौर हुए थे और उसके अनुसार दूसरे दौर की फायरिंग से ठीक पहले राजू कुमार सिंह को फायरिंग करते देखा गया था। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उनकी गोली को अर्चना गुप्ता की मौत का कारण माना था।

 

बचाव पक्ष ने उठाए थे साक्ष्यों पर सवाल

हाईकोर्ट में राजू कुमार सिंह की ओर से उनके वकीलों ने निचली अदालत के निष्कर्षों को चुनौती दी। बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि अभियोजन के कुछ गवाहों ने घटना के संबंध में उनका समर्थन नहीं किया था। यह भी दलील दी गई कि पार्टी में सुरक्षा गार्ड की राइफल से भी फायरिंग हुई थी और फॉरेंसिक साक्ष्य से यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता कि मृतका के शरीर से मिला प्रोजेक्टाइल किस हथियार से चला था। दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने निचली अदालत के निष्कर्षों का समर्थन किया और कहा कि फायरिंग के दौरान पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गई थी। मामले में मृतका के परिवार की ओर से भी अदालत के समक्ष पक्ष रखा गया।

 

25 लाख रुपये मुआवजे का भी आदेश

निचली अदालत ने राजू कुमार सिंह को डॉ. अर्चना गुप्ता के परिवार को 25 लाख रुपये क्षतिपूर्ति के तौर पर देने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान उनकी ओर से इस राशि को कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने की बात कही गई। बाद में सजा निलंबित करते हुए हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता के परिवार को जमा की गई क्षतिपूर्ति राशि निकालने की अनुमति होगी, भले ही आगे अपील का अंतिम परिणाम कुछ भी हो।

 

विधानसभा सदस्यता पर भी पड़ा असर

चार साल की सजा सुनाए जाने के बाद दो साल से अधिक की सजा होने के कारण राजू कुमार सिंह की विधानसभा सदस्यता पर भी असर पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार, सजा के बाद उन्हें विधानसभा सदस्यता से अयोग्य ठहराया गया। हाईकोर्ट में सजा निलंबित होने के बावजूद दोषसिद्धि पर रोक का सवाल अलग से महत्वपूर्ण बना हुआ है। फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट में राजू कुमार सिंह की अपील पर आगे सुनवाई होगी। अदालत के समक्ष मुख्य मुद्दों में निचली अदालत की दोषसिद्धि और उससे जुड़े साक्ष्यों की समीक्षा शामिल होगी।

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