PMCH को मिली सीधे डीजल खरीद की अनुमति: इमरजेंसी सेवाएं अब होंगी और मजबूत

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BNT Desk: पटना। बिहार के सबसे बड़े और सबसे व्यस्त सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में बिजली संकट से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। अब अस्पताल अधीक्षक को सीधे डीजल खरीदने का अधिकार दे दिया गया है। इस फैसले को अस्पताल प्रबंधन और मरीजों के परिजनों ने राहत भरी खबर के रूप में देखा है।

क्यों पड़ी इस फैसले की जरूरत?

पीएमसीएच में पिछले कुछ महीनों से बिजली ट्रिपिंग की समस्या लगातार गंभीर बनी हुई थी। अस्पताल में उच्च क्षमता वाले जनरेटर उपलब्ध थे, लेकिन डीजल खरीद का अधिकार स्थानीय स्तर पर नहीं था। ईंधन की आपूर्ति के लिए बाहरी एजेंसियों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे अक्सर देरी होती थी। इस देरी का सबसे बुरा असर उन मरीजों पर पड़ता था जो आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर या वेंटिलेटर सपोर्ट पर होते थे। बिजली जाने पर जनरेटर चालू करने के लिए भी लंबी फाइल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जो किसी आपात स्थिति में जानलेवा साबित हो सकती थी।

नई व्यवस्था से क्या बदलेगा?

नई व्यवस्था के तहत अस्पताल अधीक्षक अपने स्तर पर तत्काल निर्णय लेकर डीजल की खरीद और आपूर्ति सुनिश्चित कर सकेंगे। बिजली आपूर्ति बाधित होते ही जेनरेटर तुरंत चालू हो सकेगा। इससे लिफ्ट, वेंटिलेटर, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर और सेंट्रल एसी जैसी जीवनरक्षक सेवाओं में कोई बाधा नहीं आएगी। साथ ही तकनीकी समस्याओं का समाधान भी स्थानीय स्तर पर तेज गति से किया जा सकेगा।

बढ़ती बिजली खपत बनी थी बड़ी चुनौती

पीएमसीएच के पुनर्विकास के अंतर्गत निर्मित नए हॉस्पिटल टावर में आधुनिक सुविधाओं के कारण बिजली की मांग पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ गई है। दर्जनों लिफ्ट, मल्टीपल ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू वार्ड, सेंट्रल एयर कंडीशनिंग और अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण अब चौबीसों घंटे बिजली पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अस्पताल के जनरेटर प्रति घंटे लगभग 400 लीटर डीजल की खपत करते हैं। इन जनरेटरों की क्षमता 1.5 से 1.8 मेगावाट है, जो पूरे अस्पताल परिसर को बिजली देने में सक्षम है। ऐसे में निर्बाध ईंधन आपूर्ति की व्यवस्था होना अत्यंत आवश्यक हो गया था।

बीच में रुकती थीं लिफ्टें, प्रभावित होता था इलाज

बिजली ट्रिपिंग के कारण कई बार नई इमारत की लिफ्टें बीच में रुक जाती थीं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ता था। ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू जैसे अतिसंवेदनशील विभागों में बिजली की थोड़ी-सी बाधा भी मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती है। इन हालातों को देखते हुए यह प्रशासनिक सुधार बेहद जरूरी और समय पर लिया गया फैसला माना जा रहा है।

अधीक्षक बोले — मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि

अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि नए इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुरूप प्रशासनिक अधिकार मिलना बेहद जरूरी था। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीजल की खपत भले ही अधिक हो, लेकिन मरीजों की सुरक्षा और इलाज की निरंतरता हर चीज से ऊपर है। उन्होंने कहा, “पीएमसीएच में रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं। बिजली आपूर्ति की स्थिरता सीधे उनकी जान से जुड़ी है। अब बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता खत्म होगी और हम तत्काल निर्णय लेने में सक्षम होंगे।”

एक कदम बेहतर स्वास्थ्य सेवा की ओर

यह फैसला न केवल अस्पताल की परिचालन दक्षता को बढ़ाएगा, बल्कि गंभीर मरीजों के इलाज में आने वाली अनिश्चितताओं को भी काफी हद तक कम करेगा। पीएमसीएच जैसे संस्थान, जहां बिहार के कोने-कोने से गरीब और जरूरतमंद मरीज इलाज के लिए आते हैं, वहां इस तरह के प्रशासनिक सुधार स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में एक सार्थक और जरूरी कदम है।

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