BNT Desk: भोजपुरी फिल्म के ‘पावर स्टार’ पवन सिंह के राजनीति में सक्रिय होने की चर्चाओं ने अब जोर पकड़ लिया है। सिंगर और बीजेपी नेता गुंजन सिंह के हालिया बयान के बाद यह लगभग साफ माना जा रहा है कि पवन सिंह बिहार से राज्यसभा जा सकते हैं। हालांकि, अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन बिहार के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
बीजेपी दफ्तर में हलचल और राज्यसभा का गणित
हाल ही में पवन सिंह ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन से मुलाकात की थी, जिसके बाद से ही उनके राज्यसभा जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। बिहार में राज्यसभा की 5 सीटें खाली हुई हैं, जिनके लिए सियासी बिसात बिछाई जा रही है। संख्या बल के आधार पर बीजेपी और जदयू के खाते में दो-दो सीटें जाना तय है, लेकिन असली पेंच पांचवीं सीट पर फंसा हुआ है।
पांचवीं सीट और पवन सिंह का दांव
बीजेपी अगर अपनी रणनीतिक बढ़त दिखाते हुए पांचवीं सीट पर उम्मीदवार उतारती है, तो पवन सिंह का नाम सबसे आगे चल रहा है। अगर पवन सिंह को मौका मिलता है, तो यह केवल एक सीट की बात नहीं होगी, बल्कि इसका असर राज्य के बड़े समीकरणों पर पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि पवन सिंह के आने से उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेताओं की भविष्य की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
विपक्ष की चुनौती और वोटों का जोड़-तोड़
महाबंधन (RJD, कांग्रेस और वामदल) ने भी पांचवीं सीट पर अपना दावा ठोक दिया है। राजद के पास फिलहाल 35 विधायकों का समर्थन है, लेकिन जीत के लिए उन्हें 6 और अतिरिक्त वोटों की दरकार होगी। ऐसे में एआईएमआईएम (AIMIM) के 5 और बसपा (BSP) के 1 विधायक की भूमिका बेहद निर्णायक हो जाएगी। यदि विपक्ष इन छोटे दलों को साधने में कामयाब रहा, तो एनडीए के लिए राह मुश्किल हो सकती है।
क्रॉस वोटिंग का खतरा और छोटे दलों की ताकत
राज्यसभा चुनाव में अक्सर ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ और क्रॉस वोटिंग की आशंका बनी रहती है। एनडीए और महागठबंधन दोनों ही अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं। पांचवीं सीट के लिए निर्दलीय विधायकों और छोटे दलों का समर्थन ही हार-जीत तय करेगा। अगर पवन सिंह मैदान में उतरते हैं, तो बीजेपी को अतिरिक्त वोट जुटाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी।