पटना: तूफान के बाद बापू टावर और पटना जू अस्थायी रूप से बंद, मरम्मत कार्य जारी

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: शुक्रवार को बिहार की राजधानी पटना ने प्रकृति का ऐसा रौद्र रूप देखा जिसने पूरे शहर की रफ्तार थाम दी। तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और कड़कड़ाती बिजली के साथ आए इस भीषण तूफान ने शहर के सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाया है। इस आपदा के बाद सुरक्षा कारणों और मरम्मत कार्य को देखते हुए पटना के दो सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों—बापू टावर और संजय गांधी जैविक उद्यान (पटना जू)—को अस्थायी रूप से पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है।

तीन दिनों के लिए लगा ‘नो एंट्री’ का बोर्ड

महात्मा गांधी को समर्पित नवनिर्मित ‘बापू टावर’ इस तूफान की चपेट में आने से काफी क्षतिग्रस्त हुआ है। अधिकारियों ने घोषणा की है कि अगले तीन दिनों तक बापू टावर आम जनता के लिए पूरी तरह बंद रहेगा।

  • क्यों बंद हुआ टावर?: शुक्रवार को आई आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि बापू टावर परिसर में लगे कई कीमती और छायादार पेड़ जड़ से उखड़ गए। इसके अलावा, टावर के बाहरी हिस्से (Exterior Cladding) को भी नुकसान पहुँचा है। टावर की सुंदरता और इसकी संरचना को सुरक्षित रखने के लिए मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया गया है।

  • प्रशासन की अपील: बापू टावर प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय आगंतुकों से सहयोग की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि भारी मशीनरी और मरम्मत कर्मियों की आवाजाही के कारण परिसर को बंद रखना जरूरी है ताकि काम में कोई बाधा न आए और भविष्य में किसी भी दुर्घटना से बचा जा सके।

पटना जू: गिरे पेड़ों ने रोका रास्ता

पटना का फेफड़ा कहे जाने वाले ‘संजय गांधी जैविक उद्यान’ यानी पटना जू में भी तूफान ने तबाही मचाई है।

  • पेड़ों का गिरना: जू के अंदर लगभग 30 से ज्यादा बड़े पेड़ गिर गए हैं, जिससे पर्यटकों के चलने वाले रास्ते और कुछ जानवरों के बाड़ों के पास अवरोध पैदा हो गया है।

  • वन्यजीवों की सुरक्षा: हालांकि अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सभी जानवर सुरक्षित हैं, लेकिन गिरे हुए पेड़ों और टूटी टहनियों को हटाने के लिए परिसर को फिलहाल बंद रखा गया है। जैसे ही सफाई और सुरक्षा जांच पूरी हो जाएगी, जू को दोबारा खोल दिया जाएगा।

तूफान ने कैसे बदली शहर की तस्वीर?

शुक्रवार को आए इस तूफान ने केवल पर्यटन स्थलों को ही नहीं, बल्कि पूरे नागरिक जीवन को प्रभावित किया है।

  1. सड़कें और यातायात: शहर की मुख्य सड़कों पर सैकड़ों पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए, जिससे घंटों तक महाजाम की स्थिति बनी रही। कई गाड़ियां पेड़ों के नीचे दबकर क्षतिग्रस्त हो गईं।

  2. बिजली आपूर्ति: तूफान के कारण कई इलाकों में बिजली के तार टूट गए, जिससे पटना के एक बड़े हिस्से में रात भर अंधेरा छाया रहा।

  3. सार्वजनिक बुनियादी ढांचा: होर्डिंग्स, साइनबोर्ड और कई सरकारी इमारतों के शीशे टूट गए। नगर निगम और आपदा प्रबंधन की टीमें मलबा हटाने के काम में जुटी हुई हैं।

मरम्मत और बहाली का कार्य

बापू टावर और पटना जू के अधिकारियों के अनुसार, उनकी पहली प्राथमिकता परिसर को सुरक्षित बनाना है।

  • बापू टावर में काम: यहाँ क्षतिग्रस्त क्लैडिंग को बदलने और बिजली के उपकरणों की जांच करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है।

  • सफाई अभियान: पटना नगर निगम और वन विभाग की टीमें उखड़े हुए पेड़ों को काटकर हटाने का काम कर रही हैं। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बापू टावर 12 मई के आसपास दोबारा खुल सकता है, जबकि जू की स्थिति की समीक्षा प्रतिदिन की जा रही है।

पर्यटकों के लिए जरूरी सलाह

यदि आप अगले कुछ दिनों में पटना घूमने की योजना बना रहे हैं, तो कृपया निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:

  • यात्रा से पहले जांचें: बापू टावर जाने से पहले आधिकारिक सूचना या स्थानीय समाचारों के माध्यम से यह सुनिश्चित कर लें कि वह खुल गया है या नहीं।

  • सुरक्षा का ध्यान: तूफान के बाद अभी भी कई जगहों पर पेड़ या बिजली के तार लटके हो सकते हैं, इसलिए सावधानी बरतें।

  • मौसम का अलर्ट: मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक फिर से आंधी-बारिश की चेतावनी दी है, इसलिए खराब मौसम के दौरान घर से बाहर निकलने से बचें।

समाधान की ओर बढ़ता पटना

प्राकृतिक आपदाएं अनिश्चित होती हैं, लेकिन प्रशासन की मुस्तैदी से चीजों को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश जारी है। बापू टावर और पटना जू का बंद होना निश्चित रूप से पर्यटकों के लिए निराशाजनक है, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से यह एक अनिवार्य कदम है। शहर की खूबसूरती और इन धरोहरों को बचाने के लिए मरम्मत का काम जरूरी है। उम्मीद है कि जल्द ही पटना फिर से अपनी पुरानी रौनक में लौटेगा और लोग फिर से बापू टावर की भव्यता का आनंद ले सकेंगे।

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