BNT Desk: बिहार की राजधानी पटना से भ्रष्टाचार और घूसखोरी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे और सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। एक महिला दारोगा (सब-इंस्पेक्टर) ने अपने बेटे को बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा पास कराने और अफसर बनाने के लिए सत्ताधारी दल जनता दल यूनाइटेड (JDU) के एक बड़े नेता को 40 लाख रुपये की भारी-भरकम घूस दे डाली।
जब इतने पैसे देने के बाद भी बेटा परीक्षा में फेल हो गया, तो यह राज खुला और मामला पुलिस थाने से होते हुए सीधे हाईकोर्ट तक पहुंच गया। अब इस पूरे घूसकांड की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने केस दर्ज कर लिया है और जांच की कमान अपने हाथों में ले ली है। इस मामले में महिला दारोगा, उनके बेटे और जदयू नेता समेत कुल 5 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
कौन हैं इस घूसकांड के मुख्य किरदार?
अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे मामले में रसूखदार और कानून के रखवाले ही आरोपी बनकर सामने आए हैं:
-
शिकायतकर्ता/आरोपी महिला दारोगा: आशा सिंह (पटना पुलिस में तैनात महिला सब-इंस्पेक्टर)।
-
दारोगा का बेटा: रितेश (जिसके लिए घूस दी गई)।
-
रिश्वत लेने वाला जदयू नेता: डॉ. धर्मेंद्र कुमार (जदयू के प्रदेश महासचिव)।
-
अन्य आरोपी: जदयू नेता की पत्नी और उनके ससुर समेत कुल 5 लोग।
कैसे शुरू हुआ 40 लाख की डील का खेल?
यह पूरा मामला पटना पुलिस की महिला दारोगा आशा सिंह के बेटे रितेश से जुड़ा हुआ है। आशा सिंह अपने बेटे को हर हाल में BPSC की परीक्षा पास कराकर एक बड़ा अधिकारी बनाना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने शॉर्टकट रास्ता चुना।
उनकी मुलाकात जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रदेश महासचिव डॉ. धर्मेंद्र कुमार से हुई। डॉ. धर्मेंद्र कुमार का राजनीतिक रसूख बड़ा था (वह पहले राजद में भी रह चुके हैं और कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ चुके हैं)। आरोप है कि जदयू नेता ने दारोगा के बेटे को BPSC परीक्षा पास कराने की गारंटी दी, जिसके बदले 40 लाख रुपये की घूस तय हुई। महिला दारोगा ने अपने बेटे के भविष्य के लिए यह मोटी रकम जदयू नेता को सौंप दी।
फेल हुआ बेटा, बाउंस हुआ चेक और खुल गई पोल
साजिश के मुताबिक सब कुछ तय था, लेकिन जब BPSC परीक्षा का परिणाम आया और मेरिट लिस्ट जारी हुई, तो उसमें दारोगा के बेटे रितेश का नाम कहीं नहीं था। बेटा परीक्षा में फेल हो चुका था।
बेटे का नाम मेरिट लिस्ट में न देखकर महिला दारोगा आशा सिंह के होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत जदयू नेता डॉ. धर्मेंद्र कुमार से अपने 40 लाख रुपये वापस मांगे।
-
चेक हुआ बाउंस: पैसे वापस करने के दबाव में जदयू नेता ने दारोगा को 25 लाख रुपये का एक चेक थमा दिया। लेकिन जब दारोगा ने उसे बैंक में लगाया, तो वह चेक बाउंस हो गया।
-
बाकी रकम भी डूबी: चेक बाउंस होने के बाद दारोगा ने बाकी के 15 लाख रुपये भी मांगे, लेकिन नेता ने वह पैसे देने से भी साफ इनकार कर दिया।
थाने से हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
पैसे डूबते देख महिला दारोगा ने जनवरी 2024 में पटना के जक्कनपुर थाने में जदयू नेता के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करा दिया। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए जांच की और कोर्ट में चार्जशीट (आरोप पत्र) भी दाखिल कर दी।
लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट तब आया जब यह मामला पटना हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कानून के रखवालों पर ही बड़ा सवाल दाग दिया। अदालत ने पूछा:
“आखिर एक पुलिस विभाग की महिला दारोगा के पास 40 लाख रुपये की इतनी बड़ी नकदी कहाँ से आई? इसकी जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?”
SSP की सिफारिश और EOU की एंट्री
हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद पटना के एसएसपी (SSP) ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश की। पुलिस मुख्यालय के कड़े निर्देश के बाद अब इस पूरे घूसकांड की जांच आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को सौंप दी गई है।
EOU ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और अन्य गंभीर धाराओं के तहत महिला दारोगा आशा सिंह, उनके बेटे रितेश, जदयू नेता डॉ. धर्मेंद्र कुमार, उनकी पत्नी और ससुर समेत 5 लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। अब ईओयू इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि दारोगा के पास आय से अधिक संपत्ति कहाँ से आई और इस BPSC परीक्षा घोटाले के तार और कहाँ-कहाँ जुड़े हैं। इस घटना ने एक बार फिर बिहार में परीक्षाओं के नाम पर होने वाले बैकडोर खेल को उजागर कर दिया है।