बिहार: TRE-4 पर सियासी घमासान; तेजस्वी यादव का NDA सरकार पर तीखा हमला , पूछा- ‘नौकरी मांगने पर लाठी क्यों?’

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BNT Desk: बिहार में चौथे चरण की शिक्षक नियुक्ति परीक्षा (TRE-4) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े राजनीतिक संग्राम में बदल चुका है। सूबे के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे को लेकर सूबे की नीतीश-भाजपा (NDA) सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

हाल ही में अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे शिक्षक अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज की तेजस्वी यादव ने कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय उनकी आवाज को लाठियों के दम पर दबाने का प्रयास कर रही है। तेजस्वी के इस हमले के बाद बिहार में बेरोजगार युवाओं और रोजगार के मुद्दे पर राजनीतिक तापमान अचानक बेहद बढ़ गया है।

युवाओं पर लाठीचार्ज की तेजस्वी ने की कड़ी निंदा

TRE-4 भर्ती नियमों और परीक्षा के आयोजन को लेकर पिछले कुछ दिनों से छात्र और अभ्यर्थी पटना की सड़कों पर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रदर्शन को काबू में करने के लिए पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग और लाठीचार्ज पर तेजस्वी यादव ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है।

तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया और मीडिया बयानों के जरिए सरकार को घेरते हुए कहा:

“यह बेहद शर्मनाक है कि जब देश का भविष्य और सूबे के नौजवान सरकार से अपना हक यानी नौकरी मांगते हैं, तो बदले में उन्हें लाठियां दी जाती हैं। शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे छात्र-छात्राओं पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज करना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। युवाओं की आवाज को इस तरह कुचला नहीं जा सकता।”

“सरकार की नीयत में खोट, वैकेंसी निकालने का इरादा नहीं”

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सिर्फ लाठीचार्ज की निंदा ही नहीं की, बल्कि मौजूदा एनडीए सरकार की मंशा पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार की नीयत साफ नहीं है और वह असल में युवाओं को नौकरी देना ही नहीं चाहती।

तेजस्वी ने सरकार की रोजगार नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्व में जब वे सरकार का हिस्सा थे, तब रिकॉर्ड समय में लाखों युवाओं को नियुक्ति पत्र बांटे गए थे। लेकिन आज की सरकार केवल समय काटने और टालमटोल की राजनीति कर रही है। वैकेंसी निकालने और परीक्षाओं को पारदर्शी तरीके से आयोजित करने में यह सरकार पूरी तरह विफल साबित हो रही है, जिससे युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।

आखिर क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं TRE-4 के अभ्यर्थी?

बिहार में चौथे चरण की शिक्षक बहाली (TRE-4) को लेकर अभ्यर्थियों के बीच कई तरह का असंतोष और मांगें हैं, जिसके कारण वे आंदोलन की राह पर हैं:

  • परीक्षा की तारीखों और नियमों में स्पष्टता की कमी: छात्र चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया को बिना किसी देरी और बिना किसी विसंगति के साफ-सुथरे ढंग से पूरा किया जाए।

  • डोमिसाइल नीति का मुद्दा: बिहार के स्थानीय अभ्यर्थियों की मांग है कि राज्य के युवाओं को इस बहाली में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

  • उम्र सीमा में छूट: कई अभ्यर्थी कोरोना काल और पूर्व की देरी का हवाला देकर उम्र सीमा में रियायत की मांग कर रहे हैं।

  • पेपर लीक और पारदर्शिता: पूर्व की परीक्षाओं में हुए विवादों को देखते हुए छात्र इस बार पुख्ता सुरक्षा और बिना किसी धांधली के परीक्षा के आयोजन की मांग पर अड़े हैं।

 

“17 महीने बनाम 17 साल” के नैरेटिव को फिर किया याद

अपने हमले को धार देते हुए तेजस्वी यादव ने एक बार फिर अपने उपमुख्यमंत्री काल के कार्यकाल की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि महागठबंधन सरकार के दौरान जो “17 महीने” का काम था, वह एनडीए के “17 साल” के शासनकाल पर भारी है।

उन्होंने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में शिक्षा विभाग ने ऐतिहासिक रूप से लाखों शिक्षकों की बहाली की थी, जिसे पूरे देश ने सराहा था। लेकिन जैसे ही सरकार बदली, युवाओं के लिए रोजगार का वह सुनहरा दौर खत्म हो गया और अब उन्हें अपने हक के लिए सड़कों पर खून बहाना पड़ रहा है।

चुनावी माहौल के बीच बढ़ता राजनीतिक तनाव

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TRE-4 भर्ती का यह विवाद आने वाले समय में सरकार के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन सकता है। बिहार की राजनीति में ‘रोजगार और नौकरी’ अब एक सबसे बड़ा चुनावी और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। विपक्षी दल राजद इस मुद्दे के सहारे युवाओं और उनके परिवारों को अपने पाले में करने की पूरी कोशिश कर रहा है।

दूसरी ओर, सरकार की तरफ से फिलहाल इस प्रदर्शन को कानून-व्यवस्था की स्थिति बताकर नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन विपक्षी हमलों और छात्रों के आक्रोश ने नीतीश सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। अब देखना यह होगा कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और इस राजनीतिक घमासान का क्या अंत होता है।

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