BNT Desk: जहानाबाद सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सड़क हादसे में घायल दो किशोरों के इलाज में कथित लापरवाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि दोनों के पैर में मल्टीपल फ्रैक्चर होने के बावजूद स्लैब या प्लास्टर लगाने के बजाय दवा के खाली कार्टन का गत्ता लपेट दिया गया। इसके बाद उन्हें पटना के PMCH रेफर कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
दो बाइकों की टक्कर में चार किशोर घायल
घटना गुरुवार की बताई जा रही है। हुलासगंज थाना क्षेत्र के धरमपुर मोड़ के पास दो बाइकों की आपस में टक्कर हो गई। हादसा इतना जोरदार था कि चार किशोर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायलों में रामगंज निवासी प्रह्लाद कुमार और धरमपुर निवासी राजा कुमार को गंभीर चोटें आईं। दोनों के पैरों में कई जगह फ्रैक्चर होने की बात सामने आई। स्थानीय लोगों और परिजनों की मदद से घायलों को पहले हुलासगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) ले जाया गया।
स्लैब की जगह पैर पर लपेट दिया दवा का गत्ता
आरोप है कि हुलासगंज PHC में गंभीर रूप से घायल दोनों किशोरों के फ्रैक्चर वाले पैर में स्लैब नहीं लगाया गया। इसके बजाय दवा के खाली कार्टन को फाड़कर उसके गत्ते को पैर पर लपेट दिया गया। इसके बाद दोनों घायलों को बेहतर इलाज के लिए जहानाबाद सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। परिजनों को उम्मीद थी कि सदर अस्पताल में पहुंचने के बाद घायलों को उचित प्राथमिक उपचार मिलेगा और फ्रैक्चर वाले पैर को सही तरीके से स्थिर किया जाएगा। लेकिन आरोप है कि सदर अस्पताल पहुंचने के बाद भी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।
सदर अस्पताल में भी इलाज के बजाय रेफर की पर्ची
दोनों किशोरों को सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। यहां भी कथित तौर पर डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही सामने आई। आरोप है कि घायलों को जरूरी उपचार देने के बजाय उन्हें पटना के PMCH रेफर करने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। इसी दौरान फ्रैक्चर वाले पैर को सहारा देने के लिए फिर से दवा के खाली कार्टन का गत्ता इस्तेमाल किया गया। गंभीर रूप से घायल मरीज के पैर में प्लास्टर या स्लैब की जगह इस तरह गत्ता लपेटकर रेफर किए जाने की तस्वीर और जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने इसे मरीजों के साथ अमानवीय व्यवहार बताया है।
खबर सामने आते ही प्रशासन ने लिया संज्ञान
मामला मीडिया में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में भी हड़कंप मच गया। जिला प्रशासन ने तत्काल मामले का संज्ञान लिया। जिलाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया ने इस घटना को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं। डीएम के निर्देश पर हुलासगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सदर अस्पताल से जुड़े संबंधित डॉक्टरों को शोकॉज नोटिस जारी किया गया है। उनसे 24 घंटे के भीतर पूरे मामले को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। प्रशासन यह जानना चाहता है कि आखिर किन परिस्थितियों में गंभीर रूप से घायल मरीजों के फ्रैक्चर वाले पैर में उचित उपचार के बजाय गत्ता लपेटकर उन्हें रेफर किया गया।
एसडीओ और सिविल सर्जन करेंगे संयुक्त जांच
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसडीओ और सिविल सर्जन के नेतृत्व में संयुक्त जांच कमेटी गठित की गई है। कमेटी हुलासगंज PHC से लेकर सदर अस्पताल तक घायलों के इलाज से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि दोनों किशोरों को किस स्थिति में अस्पताल लाया गया था, उनका प्राथमिक उपचार क्या किया गया और उन्हें PMCH रेफर करने से पहले किन चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन किया गया। प्रशासन यह भी पता लगाएगा कि गत्ता इस्तेमाल करने का फैसला किस स्तर पर लिया गया और क्या अस्पताल में मरीजों के लिए जरूरी चिकित्सा सामग्री उपलब्ध थी।
दोषी पाए गए तो होगी विभागीय कार्रवाई
जिलाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया ने मामले को बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि घायलों को पहले हुलासगंज PHC में लाया गया था, जहां स्लैब लगाने के बजाय गत्ता लपेटे जाने की बात सामने आई है। इसके बाद सदर अस्पताल में भी उचित तरीके से उपचार किए जाने के बजाय उन्हें रेफर किए जाने का आरोप है। डीएम ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यदि किसी डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ विधि-सम्मत विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में गरीब और जरूरतमंद मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में गंभीर रूप से घायल मरीजों के साथ यदि इस तरह की लापरवाही होती है तो यह पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती है। स्थानीय लोगों ने मामले में जिम्मेदार डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे मामले में लापरवाही किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, इमरजेंसी सेवाओं और चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर है।