बिहार में सेटेलाइट टाउनशिप का मास्टर प्लान तैयार: पटना सहित 11 शहरों में जमीन की खरीद-बिक्री और निर्माण पर लगी रोक

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार की नीतीश-सम्राट सरकार ने राज्य के शहरी विकास को एक नई दिशा देने के लिए ‘सेटेलाइट टाउनशिप’ (Satellite Township) की महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू कर दिया है। शहरों के बेतरतीब विस्तार को रोकने और उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत पटना सहित राज्य के 11 प्रमुख शहरों के चिह्नित इलाकों में जमीन की खरीद-बिक्री और किसी भी प्रकार के नए भवन निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।

रोक पूरे शहर पर नहीं, सिर्फ ‘चिह्नित इलाकों’ में

इस फैसले को लेकर आम जनता के बीच किसी प्रकार का भ्रम न हो, इसके लिए नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि यह प्रतिबंध पूरे शहर पर लागू नहीं होगा। रोक केवल उन्हीं सीमित और विशेष इलाकों में रहेगी जिन्हें टाउनशिप विकसित करने के लिए मास्टर प्लान के तहत चुना गया है।

यह निर्णय ‘बिहार शहरी आयोजना तथा विकास अधिनियम’ के तहत लिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि टाउनशिप के लिए निर्धारित जमीन पर कोई अवैध या अव्यवस्थित निर्माण न हो सके, जिससे भविष्य में मास्टर प्लान के अनुसार चौड़ी सड़कों, ड्रेनेज और पार्क बनाने में कोई बाधा न आए।

किन शहरों में और कब तक रहेगा प्रतिबंध?

सरकार ने अलग-अलग शहरों के लिए प्रतिबंध की समयसीमा अलग-अलग तय की है। इसे दो श्रेणियों में बांटा गया है:

31 मार्च 2027 तक प्रतिबंध:

इन शहरों के प्रस्तावित टाउनशिप क्षेत्रों (कोर और स्पेशल एरिया) में मार्च 2027 तक रजिस्ट्री और निर्माण कार्य बंद रहेंगे:

  • पटना, सोनपुर, गयाजी, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर।

  • विशेष नोट: पटना के लिए अलग से ‘जोनल प्लान’ भी तैयार किया जा रहा है ताकि राजधानी के दबाव को कम किया जा सके।

30 जून 2027 तक प्रतिबंध:

इन चार शहरों के कोर एरिया में प्रतिबंध की अवधि थोड़ी लंबी रखी गई है:

  • मुजफ्फरपुर, छपरा, भागलपुर और सीतामढ़ी।

सेटेलाइट टाउनशिप से क्या बदलेगा?

सरकार का लक्ष्य इन इलाकों को चंडीगढ़ या ग्रेटर नोएडा जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है। मास्टर प्लान के लागू होने से निम्नलिखित बदलाव आएंगे:

  • नियोजित ढांचा: आवासीय (Residential) और व्यावसायिक (Commercial) क्षेत्रों का स्पष्ट बंटवारा होगा।

  • विश्वस्तरीय ड्रेनेज: जलजमाव की समस्या खत्म करने के लिए आधुनिक सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम बनेगा।

  • बेहतर कनेक्टिविटी: ट्रैफिक जाम से मुक्ति के लिए चौड़ी सड़कों और बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट का प्रावधान।

  • हरियाली और स्पेस: पार्कों, ओपन स्पेस और कम्युनिटी सेंटर के लिए पर्याप्त जगह छोड़ी जाएगी।

पटना बनेगा पूर्वी भारत का ‘टेक हब’

सिर्फ टाउनशिप ही नहीं, सरकार बिहार को तकनीक के क्षेत्र में भी आगे ले जाने की तैयारी में है। कैबिनेट की बैठक में रिसर्च पार्क के लिए 305 करोड़ रुपये और इनक्यूबेशन सेंटर (फेज-2) के लिए 39.01 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर की गई है।

रिसर्च पार्क के मुख्य फोकस क्षेत्र:

  1. इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और वायरलेस टेक्नोलॉजी।

  2. हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी और इनोवेशन।

  3. एडवांस मैन्यूफैक्चरिंग और एग्रीकल्चर (कृषि) तकनीक।

  4. क्लीन वाटर, रिसाइक्लिंग और पर्यावरण संरक्षण।

अनुमान है कि अगले एक-दो वर्षों में आईआईटी रिसर्च पार्क में 100 से अधिक रिसर्च आधारित कंपनियां अपनी यूनिट स्थापित करेंगी, जिससे राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे।

बिहार सरकार का यह कदम शहरीकरण की चुनौतियों से निपटने की एक दूरगामी सोच है। हालांकि, जमीन की रजिस्ट्री पर रोक से कुछ समय के लिए स्थानीय लोगों और प्रॉपर्टी डीलरों को परेशानी हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह सुनियोजित विकास बिहार के शहरों की तस्वीर बदल देगा। अब शहरों का विस्तार ‘अंधाधुंध’ नहीं बल्कि ‘नक्शे’ के आधार पर होगा।

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