BNT Desk: देश में आम आदमी के बजट पर एक बार फिर महंगाई का बड़ा बम फूटा है। एक तरफ जहाँ अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू तेल कंपनियों ने आम जनता की जेब काटने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पिछले 10 दिनों के भीतर आज चौथी बार पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी की गई है। इस ताज़ा फैसले से मध्यम वर्ग और रोज़ कमाने-खाने वाले लोगों की कमर टूट गई है।
पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 हुआ महंगा
तेल कंपनियों द्वारा जारी की गई नई दरों के मुताबिक, पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर का बड़ा इजाफा किया गया है। लगातार बढ़ते दामों की वजह से अब लोगों के लिए सड़क पर अपनी गाड़ी निकालना भी दूभर हो गया है। हर नई सुबह के साथ ईंधन की बढ़ती कीमतें आम आदमी की परेशानी को दोगुना कर रही हैं।
पटना में आज क्या हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
बिहार की राजधानी पटना में इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। 25 मई की सुबह से पटना में ईंधन की कीमतें इस प्रकार हैं:
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पेट्रोल: ₹113.37 प्रति लीटर
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डीजल: ₹99.36 प्रति लीटर
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प्रीमियम फ्यूल (XP95): ₹122.25 प्रति लीटर
नोट: पटना में अब डीजल भी ₹100 के आंकड़े को छूने की कगार पर पहुँच चुका है, जिससे माल ढुलाई महंगी होने और आने वाले दिनों में फल-सब्जियों के दाम बढ़ने की पूरी आशंका है।
10 दिनों का गणित: कब-कब जेब पर चली कैंची
अगर पिछले 10 दिनों के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो तेल कंपनियों ने किस्तों में जनता की जेब पर बड़ा डाका डाला है:
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15 मई: तेल कंपनियों ने सीधे ₹3.00 प्रति लीटर की एकमुश्त भारी बढ़ोतरी की।
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19 मई: कीमतों में एक बार फिर करीब 90 पैसे का इजाफा किया गया।
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23 मई: पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ।
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25 मई (आज): पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर बढ़ा दिया गया।
लगातार हो रही इस बढ़ोतरी ने मध्यमवर्गीय परिवारों के मासिक बजट को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है।
अजीब विरोधाभास: दुनिया में तेल सस्ता, भारत में महंगा
इस पूरी बढ़ोतरी में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार नीचे गिर रही हैं। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जो आंकड़े आए, वे इस प्रकार हैं:
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ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): करीब 4.75% की गिरावट के साथ 98.62 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
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डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude): 4.76% टूटकर 92 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की बढ़ती उम्मीदों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में यह नरमी आई है।
जनता का सुलगता सवाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने के बावजूद देश में आम उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलने के बजाय उन पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। इस नीति को लेकर अब जनता में भारी नाराजगी और गुस्सा देखा जा रहा है। लोग सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक सरकार और तेल कंपनियों से एक ही सवाल पूछ रहे हैं— “जब दुनिया भर में कच्चा तेल सस्ता हो रहा है, तो फिर हमारे देश में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान क्यों छू रहे हैं?”
इस बीच, बिहार में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष जहाँ इसे सरकार की नाकामी बता रहा है, वहीं सरकार के नुमाइंदे इसे नियंत्रित तरीके से की जा रही बढ़ोतरी बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। फिलहाल, राहत की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है और जनता महंगाई की इस आग में झुलसने को मजबूर है।