BNT Desk: बिहार में अपराध के जरिए अर्जित की गई कथित संपत्ति के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU अब कार्रवाई तेज करने की तैयारी में है। राज्यभर के करीब 385 कुख्यात अपराधियों से जुड़े संपत्ति जब्ती के मामलों की फाइलों को खंगाला जा रहा है। बताया जा रहा है कि कई मामलों में कानूनी और तकनीकी कमियों के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही थी। अब EOU इन खामियों को दूर कर अदालतों में जब्ती की प्रक्रिया को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी में जुटी है।
जानकारी के अनुसार, हत्या, रंगदारी, लूट और शराब के अवैध कारोबार से कथित तौर पर अर्जित की गई संपत्ति से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। EOU का फोकस सिर्फ अपराध से जुड़े मामलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन संपत्तियों के स्रोत और स्वामित्व से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जाएगी, जिनके बारे में एजेंसियों को संदेह है कि उन्हें अपराध से अर्जित धन से बनाया गया है।
385 अपराधियों से जुड़े मामलों की हो रही समीक्षा
राज्यभर में करीब 385 कुख्यात अपराधियों से जुड़े संपत्ति जब्ती के मामलों की जानकारी जुटाई जा रही है। इन मामलों की मौजूदा स्थिति क्या है, किन मामलों में कार्रवाई लंबित है और कहां कानूनी प्रक्रिया में अड़चन आ रही है, इसकी समीक्षा की जा रही है। EOU की ओर से अभियोजन अधिकारियों से लंबित मामलों की जानकारी मांगी गई है। इसमें केस फाइलों की स्थिति के साथ-साथ गवाहों से जुड़ी जानकारी भी शामिल है। एजेंसी का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन मामलों में किस स्तर पर कार्रवाई रुकी हुई है। इसके बाद उन मामलों में मौजूद कानूनी या तकनीकी कमियों को दूर करने की कोशिश की जाएगी, ताकि अदालत में जब्ती से जुड़े मामलों को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।
केस फाइल और गवाहों की जानकारी जुटा रही EOU
संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया में अदालत के सामने पर्याप्त साक्ष्य और दस्तावेज रखना महत्वपूर्ण होता है। इसी को देखते हुए EOU ने लंबित मामलों से जुड़ी केस फाइलों और गवाहों की स्थिति की जानकारी मांगी है। एजेंसी यह देख रही है कि किसी मामले में दस्तावेजों की कमी है या नहीं, गवाहों से जुड़ी प्रक्रिया कहां तक पहुंची है और अदालत में मामले को आगे बढ़ाने में किस तरह की दिक्कत सामने आ रही है। EOU की कोशिश बताई जा रही है कि जिन मामलों में तकनीकी या कानूनी वजहों से कार्रवाई अटकी हुई है, उनमें आवश्यक सुधार किया जाए। इसके बाद संबंधित मामलों को अदालत में प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी होगी।
मुजफ्फरपुर में 11 आरोपितों की संपत्ति पर कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक, मुजफ्फरपुर में 11 आरोपितों से जुड़ी करीब 85 करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्ति को जब्त करने की प्रक्रिया चल रही है। इनमें चुन्नू ठाकुर, प्रताप राणा और शराब माफिया बबुआ डॉन समेत अन्य नाम शामिल बताए गए हैं। पुलिस की ओर से इस मामले में अदालत में रिपोर्ट दाखिल किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा आरोपितों की जमीन और वाहनों से जुड़ी जानकारी भी संबंधित विभागों से जुटाई गई है। जमीन से संबंधित जानकारी के लिए निबंधन कार्यालय और वाहनों से जुड़ी जानकारी के लिए DTO समेत संबंधित विभागों से रिकॉर्ड जुटाए गए हैं। इस तरह जांच एजेंसियां आरोपितों की संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों को एक जगह इकट्ठा कर कार्रवाई को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।
पत्नी और रिश्तेदारों के नाम पर संपत्ति की भी जांच
जांच के दौरान यह बात सामने आने की जानकारी दी गई है कि कुछ आरोपितों ने कथित तौर पर संपत्ति अपने नाम पर नहीं खरीदी। ऐसी संपत्तियों को पत्नी या करीबी रिश्तेदारों के नाम पर खरीदे जाने का दावा किया गया है। ऐसे मामलों में संपत्ति के वास्तविक स्रोत और खरीद के लिए इस्तेमाल किए गए धन की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संपत्ति खरीदने के लिए पैसा कहां से आया और संबंधित व्यक्ति की आय के मुकाबले संपत्ति का मूल्य कितना है। हालांकि, किसी संपत्ति को अवैध या अपराध से अर्जित मानने के लिए संबंधित कानूनी प्रक्रिया और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल जिन संपत्तियों को लेकर जांच चल रही है, उन्हें कथित तौर पर अपराध से अर्जित संपत्ति के रूप में देखा जा रहा है।
अदालत में मामलों को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी
EOU की योजना संपत्ति जब्ती से जुड़े मामलों की सुनवाई को आगे बढ़ाने के लिए अभियोजन पक्ष के गवाहों को अदालत में पेश कराने पर भी जोर देने की है। इसके साथ ही लंबित मामलों में कानूनी प्रक्रिया की कमियों को दूर करने की तैयारी है। खबर के अनुसार, BNSS की धारा 107 के तहत चल रही प्रक्रिया में सामने आने वाली कानूनी कमियों की भी समीक्षा की जाएगी। एजेंसी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कार्रवाई में ऐसी तकनीकी कमी न रहे, जिसकी वजह से मामला अदालत में कमजोर हो। इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय पुलिस की ओर से पहले हुई कार्रवाई और उसमें सामने आई कमियों की भी समीक्षा की जा सकती है। अगर किसी मामले में पुलिस स्तर पर कोई तकनीकी चूक हुई है तो उसे पहचानकर सुधारने की कोशिश की जाएगी।
अपराध के साथ संपत्ति पर भी फोकस
EOU की इस कार्रवाई का फोकस अपराध से जुड़े मामलों के साथ-साथ उससे अर्जित बताई जा रही संपत्ति पर भी है। यानी जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि गंभीर अपराधों में कथित रूप से शामिल लोगों के पास मौजूद संपत्ति का स्रोत क्या है। जमीन, वाहन और अन्य संपत्तियों से संबंधित रिकॉर्ड जुटाकर उनकी जांच की जा रही है। जरूरत के अनुसार संबंधित विभागों से भी जानकारी ली जा रही है। राज्यभर के 385 मामलों की समीक्षा और मुजफ्फरपुर के 11 आरोपितों से जुड़े करीब 85 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति के मामले इस कार्रवाई के दायरे को दर्शाते हैं। हालांकि, अंतिम कार्रवाई संबंधित कानूनी प्रक्रिया और अदालत में होने वाली सुनवाई के आधार पर आगे बढ़ेगी। फिलहाल EOU लंबित मामलों की फाइलों, गवाहों और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा कर रही है। आने वाले समय में कानूनी कमियों को दूर कर जब्ती की प्रक्रिया को तेज करने की तैयारी है।