BNT Desk: बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। 7 मई का दिन बिहार के इतिहास में दर्ज होने वाला है, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का भव्य विस्तार राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में होगा। यह आयोजन न केवल एक सरकारी शपथ ग्रहण समारोह है, बल्कि इसे एनडीए (NDA) के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
गांधी मैदान बना हाई सिक्योरिटी जोन
शपथ ग्रहण समारोह की भव्यता और संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे गांधी मैदान इलाके को ‘हाई सिक्योरिटी जोन’ में बदल दिया गया है। मैदान के सभी गेट आम लोगों के लिए पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। समारोह स्थल को सुरक्षा के लिहाज से चार विशेष हिस्सों में बांटा गया है।
सुरक्षा के इंतजाम ऐसे हैं कि एयरपोर्ट से लेकर गांधी मैदान तक चप्पे-चप्पे पर पहरा होगा। बताया जा रहा है कि 3000 से ज्यादा जवान सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे। कार्यक्रम की तैयारियों में लगे कर्मियों के मुताबिक, पूरे पंडाल और मंच को कल तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
दिल्ली से पटना तक हलचल
यह समारोह इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें केंद्र सरकार के साथ-साथ भाजपा शासित राज्यों के बड़े चेहरों की मौजूदगी होगी। जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल होंगे:
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
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राष्ट्रीय अध्यक्ष और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा
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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष (संगठन) नितिन नवीन
इसके अलावा कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस भव्य समारोह के गवाह बनेंगे।
‘डेढ़ लाख’ लोगों के बैठने की व्यवस्था
गांधी मैदान में भीड़ का रिकॉर्ड हमेशा से चर्चा में रहता है। प्रशासन इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहता, इसलिए समारोह स्थल पर लगभग डेढ़ लाख लोगों के बैठने की भव्य व्यवस्था की जा रही है। चिलचिलाती गर्मी को देखते हुए वाटरप्रूफ पंडाल और कूलिंग सिस्टम के साथ-साथ कार्यकर्ताओं के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।
27 मंत्री लेंगे शपथ
7 मई को होने वाले इस विस्तार में कुल 27 मंत्री शपथ लेकर कार्यभार संभालेंगे। एनडीए के घटक दलों के बीच सीटों का बंटवारा संतुलित रखने की कोशिश की गई है। नई कैबिनेट का गणित कुछ इस प्रकार है:
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भाजपा (BJP): 12 मंत्री
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जदयू (JDU): 11 मंत्री
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लोजपा-रामविलास (LJP-R): 02 मंत्री
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हम (HAM): 01 मंत्री
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राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM): 01 मंत्री
यह समीकरण साफ दिखाता है कि भाजपा बिहार में ‘बड़े भाई’ की भूमिका में है, वहीं क्षेत्रीय दलों को भी पूरा सम्मान दिया गया है।
6 मई को अहम बैठक, 7 को नया सवेरा
शपथ ग्रहण से ठीक एक दिन पहले, यानी 6 मई को सम्राट कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक को नई कैबिनेट के विस्तार से पहले की आखिरी ‘क्लीनअप मीटिंग’ माना जा रहा है। इसके ठीक अगले दिन, बिहार को एक नई और मजबूत सरकार मिलेगी जो आने वाले विधानसभा चुनावों की दिशा तय करेगी।
सियासी गलियारों में चर्चा
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि गांधी मैदान में शपथ ग्रहण का फैसला एक सोची-समझी रणनीति है। इसके जरिए बीजेपी और एनडीए यह संदेश देना चाहती है कि उनकी पकड़ बिहार की ज़मीन पर कितनी मजबूत है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की मौजूदगी ने इस प्रादेशिक कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर की हेडलाइन बना दिया है।
बिहार की जनता अब टकटकी लगाए 7 मई का इंतज़ार कर रही है, जब पटना के आसमान में नई सरकार के संकल्पों की गूंज सुनाई देगी।