BNT Desk: बिहार की राजनीति से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 6 जून 2026 को एक कड़ा फैसला सुनाते हुए बिहार के साहेबगंज से बीजेपी विधायक राजू सिंह (Raju Singh) को साल 2018 के एक बहुचर्चित हर्ष फायरिंग मामले में दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें गैर-इरादतन हत्या (बिना इरादे के की गई हत्या) और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाया है।
इस फैसले के आते ही कोर्ट रूम में मौजूद पुलिस अधिकारियों ने पूर्व मंत्री राजू सिंह को तुरंत अपनी हिरासत में ले लिया। इस अदालती फैसले के बाद बिहार के राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है, क्योंकि अब राजू सिंह की विधानसभा सदस्यता पर सीधे तौर पर कानूनी तलवार लटक गई है।
क्या है सदस्यता रद्द होने का कानूनी गणित?
राजू सिंह की विधायकी बचेगी या जाएगी, इसका पूरा दारोमदार अब अदालत द्वारा तय की जाने वाली सजा की अवधि (समय) पर टिक गया है। कानून के जानकारों के मुताबिक देश के संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा-8 में यह साफ नियम है:
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2 साल का नियम: यदि किसी भी मौजूदा सांसद या विधायक को किसी आपराधिक मामले में दो साल या उससे अधिक की जेल की सजा सुनाई जाती है, तो उसकी सदन की सदस्यता तुरंत खत्म हो जाती है।
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7 साल तक की सजा का प्रावधान: पटना हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों का कहना है कि राजू सिंह को कानून की जिस धारा 304 (भाग-2) के तहत दोषी ठहराया गया है, उसमें दोषी को अधिकतम 7 साल तक की जेल हो सकती है।
अदालत इस मामले में 9 जून को सजा का ऐलान करेगी। यदि 9 जून को कोर्ट उन्हें 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा सुनाता है, तो बिहार विधानसभा सचिवालय की ओर से उनकी साहेबगंज सीट को खाली घोषित करते हुए सदस्यता रद्द करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया जाएगा।
क्या ऊपरी अदालत से मिलेगी राहत या होगा अनंत सिंह जैसा हाल?
राजू सिंह के वकीलों का कहना है कि वे इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट (ऊपरी अदालत) में अपील दायर करेंगे। हालांकि, केवल ऊपरी अदालत में अपील करने मात्र से उनकी विधायकी नहीं बच पाएगी। जब तक हाई कोर्ट निचली अदालत के इस फैसले (दोषसिद्धि) या सजा पर पूरी तरह से स्टे (रोक) नहीं लगा देता, तब तक उनकी सदस्यता पर संकट बना रहेगा।
बिहार की सियासत में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले मोकामा के बाहुबली नेता अनंत सिंह को उनके घर से एके-47 राइफल मिलने के मामले में 10 साल की सजा हुई थी, जिसके बाद उन्हें अपनी विधायकी गंवानी पड़ी थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजू सिंह का यह मामला भी अब ठीक उसी दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।
न्यू ईयर पार्टी की वो खौफनाक रात, जब चली थी गोली
यह पूरा मामला आज से करीब साढ़े सात साल पुराना है। 31 दिसंबर 2018 की रात को दिल्ली के आलीशान वसंत कुंज इलाके में स्थित एक फार्महाउस पर नए साल (न्यू ईयर) का जश्न मनाया जा रहा था। पार्टी में नाच-गाना और शराब का दौर चल रहा था कि तभी जोश में आकर वहां अंधाधुंध हर्ष फायरिंग (हवा में गोलीबारी) शुरू हो गई।
इसी दौरान बंदूक से निकली एक भटकी हुई गोली वहां मौजूद महिला डॉक्टर अर्चना गुप्ता को जा लगी। खून से लथपथ डॉक्टर अर्चना को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी दर्दनाक मौत हो गई। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में राजू सिंह को मुख्य आरोपी बनाते हुए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।
शनिवार को आए फैसले में कोर्ट ने राजू सिंह को तो दोषी मान लिया, लेकिन सबूतों की कमी के चलते उनकी पत्नी रेणु सिंह समेत तीन अन्य आरोपियों को कोर्ट ने बाइज्जत बरी (आजाद) कर दिया है। अब पूरे बिहार की निगाहें 9 जून को आने वाले सजा के फैसले पर टिकी हुई हैं।