BNT Desk:राजधानी पटना में आज छात्रों का आक्रोश सड़कों पर देखने को मिला। ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (AISA) ने 7.5 CGPA की अनिवार्यता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के विरोध में राजभवन घेराव का आह्वान किया था। प्रदर्शन के दौरान पटना के जेपी गोलंबर पर पुलिस और छात्रों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद कई छात्रों को हिरासत में ले लिया गया।
छात्रों का विरोध
AISA से जुड़े छात्र संगठनों का आरोप है कि बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों में ‘चार वर्षीय स्नातक’ (Honours with Research) कार्यक्रम में प्रवेश के लिए 7.5 CGPA की शर्त रखी गई है। प्रदर्शनकारी छात्रों का तर्क है:
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बहिष्करण की नीति: यह अनिवार्यता बड़ी संख्या में योग्य छात्रों को उच्च शिक्षा से वंचित करने वाली है।
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असमानता: छात्रों का कहना है कि यह फैसला न केवल असमानतापूर्ण है, बल्कि यह शिक्षा के लोकतांत्रिक अधिकार पर सीधा हमला है।
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NEP 2020 का विरोध: AISA का साफ मानना है कि NEP 2020 के तहत लागू की जा रही ऐसी नीतियां शिक्षा के निजीकरण और अवसरों में असमानता को बढ़ावा दे रही हैं।
मार्च और हंगामा
योजना के अनुसार, छात्रों को गांधी मैदान से राजभवन तक मार्च निकालना था। हालांकि, भारी पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को जेपी गोलंबर पर ही बैरिकेड लगाकर रोक दिया।
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नोकझोंक: पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारी छात्र उग्र हो गए और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस व धक्का-मुक्की हुई।
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हिरासत: हंगामे को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई प्रदर्शनकारी छात्रों को हिरासत में ले लिया।
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यातायात पर असर: प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर आगे बढ़कर वाहनों को रोकने का प्रयास किया, जिससे कुछ समय के लिए वहां अफरा-तफरी का माहौल रहा। पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए छात्रों को सड़क से हटाया।
वर्तमान स्थिति
फिलहाल जेपी गोलंबर के आसपास का इलाका छावनी में तब्दील हो गया है। पुलिस ने भारी सुरक्षा घेरा बना रखा है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। दूसरी ओर, शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।