BNT Desk: तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके O. Panneerselvam ने औपचारिक रूप से Dravida Munnetra Kazhagam का दामन थाम लिया है। चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय में वह मुख्यमंत्री M. K. Stalin के साथ मंच पर नजर आए। यह कदम राज्य की राजनीति में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
जमीनी कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री तक का सफर
ओ. पन्नीरसेल्वम का राजनीतिक सफर साधारण शुरुआत से शुरू हुआ। 1970 के दशक में उन्होंने एक जमीनी कार्यकर्ता के रूप में राजनीति में कदम रखा। धीरे-धीरे वह संगठन में अपनी जगह बनाते गए। 1990 के दशक के आखिर में वह नगर पालिका अध्यक्ष बने और बाद में राज्य की राजनीति में अहम चेहरा बनकर उभरे। उन्हें एक वफादार और शांत स्वभाव के नेता के रूप में जाना जाता रहा है।
AIADMK में बढ़ता विवाद
पन्नीरसेल्वम लंबे समय तक All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam से जुड़े रहे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए। उन्होंने एआईएडीएमके नेता एडप्पडी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व को तानाशाही बताया। उनका कहना है कि पार्टी में लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी हो रही थी। यही कारण रहा कि उन्होंने नया राजनीतिक रास्ता चुना।
DMK में शामिल होने का संदेश
डीएमके में शामिल होते समय पन्नीरसेल्वम ने कहा कि यह कदम द्रविड़ आंदोलन को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने दावा किया कि डीएमके राज्य के हित में काम कर रही है और सामाजिक न्याय की विचारधारा को आगे बढ़ा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह बदलाव तमिलनाडु की सियासत में नए समीकरण बना सकता है। खासकर आगामी चुनावों के संदर्भ में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे की राजनीति पर असर
ओपीएस का डीएमके में जाना सिर्फ व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संकेत है। इससे एआईएडीएमके को झटका लग सकता है और डीएमके को संगठनात्मक मजबूती मिल सकती है। तमिलनाडु की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले समय में नई रणनीतियों और गठबंधनों की दिशा तय कर सकता है।