BNT Desk: बिहार के कटिहार में कांग्रेस पार्टी के भीतर एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। पार्टी के पूर्व विधायक दल के नेता शकील अहमद खान ने अपनी ही पार्टी के कद्दावर नेता और वर्तमान सांसद तारिक अनवर पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। इस अंदरूनी कलह ने कांग्रेस संगठन की एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
40 साल का हिसाब और ‘कमीशन’ के आरोप
शकील अहमद खान ने तारिक अनवर पर हमला करते हुए कहा कि वे पिछले 40 साल से कटिहार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए कोई ठोस काम नहीं किया। उनके मुख्य आरोप इस प्रकार हैं:
- जनता से दूरी: तारिक अनवर कभी जनता के मुद्दों पर सड़क पर उतरकर आंदोलन नहीं करते।
- भ्रष्टाचार का आरोप: सांसद निधि (MP Fund) के तहत होने वाले कामों, विशेषकर ‘हाई मास्ट लाइट’ लगाने के नाम पर 45% तक कमीशन लेने का आरोप लगाया गया है।
- कार्यकर्ताओं की अनदेखी: शकील अहमद का दावा है कि सांसद अपने कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दूसरी पार्टियों के लोगों को काम बांट रहे हैं।
दलित नेतृत्व और सोनिया गांधी का जिक्र
शकील अहमद ने जातिगत और ऐतिहासिक मुद्दों को उठाकर हमले को और तेज कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि तारिक अनवर जानबूझकर बिहार कांग्रेस के दलित प्रदेश अध्यक्ष को निशाना बना रहे हैं। साथ ही, उन्होंने याद दिलाया कि एक समय तारिक अनवर ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल के होने का मुद्दा उठाकर उन्हें घेरा था। शकील के अनुसार, कांग्रेस ने बड़ा दिल दिखाते हुए उन्हें माफ किया, लेकिन वे आज फिर पार्टी विरोधी रुख अपना रहे हैं।
NDA का रुख: “कांग्रेस का असली चेहरा बेनकाब”
कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं की इस लड़ाई से एनडीए (NDA) खेमे में खुशी का माहौल है। कटिहार भाजपा जिला अध्यक्ष मनोज राय ने तंज कसते हुए कहा कि जनता की अदालत में दोनों नेता बेनकाब हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि शकील अहमद को जनता पहले ही चुनाव हरा चुकी है और आने वाले समय में तारिक अनवर की विदाई भी तय है।
संगठन के लिए खतरे की घंटी
एक तरफ कांग्रेस देश भर में ‘संगठन सृजन’ के जरिए खुद को मजबूत करने का दावा कर रही है, वहीं कटिहार में बड़े नेताओं के बीच यह जुबानी जंग पार्टी के अस्तित्व के लिए खतरा दिख रही है। तारिक अनवर ने फिलहाल इन आरोपों पर “नो कमेंट” कहकर पल्ला झाड़ लिया है, लेकिन इस विवाद ने विपक्ष को बैठे-बिठाए बड़ा मुद्दा दे दिया है।