IREDA के शेयर 52 सप्ताह के निचले स्तर पर, मुनाफा बढ़ा लेकिन निवेशकों में चिंता जारी

IREDA के शेयर गुरुवार को ₹124.10 तक गिरकर 52 सप्ताह के निचले स्तर पर पहुँच गए, जबकि कंपनी का नेट प्रॉफिट 37% बढ़कर ₹585 करोड़ हुआ। शेयर गिरने का कारण नए 3,000 करोड़ रुपये के इक्विटी इश्यू की योजना मानी जा रही है। कंपनी के मजबूत फंडामेंटल्स और रिन्यूएबल एनर्जी में ग्रोथ की संभावनाएं बनी हुई हैं।

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BNT Desk: भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (IREDA) के निवेशकों के लिए पिछला कुछ समय काफी हलचल भरा रहा है। एक तरफ जहाँ कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ शेयर बाजार में इसके भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। गुरुवार को IREDA के शेयर टूटकर अपने 52 हफ्ते के सबसे निचले स्तर (Low) ₹124.10 पर आ गए। आपको बता दें कि पिछले साल फरवरी में यही शेयर ₹187.75 के अपने उच्चतम स्तर पर था। आखिर अच्छे नतीजों के बावजूद शेयरों में यह सुस्ती क्यों है, आइए विस्तार से समझते हैं।

3,000 करोड़ रुपये जुटाने का है बड़ा प्लान

कंपनी के शेयरों में इस गिरावट की एक बड़ी वजह भविष्य में पूंजी जुटाने की योजना को माना जा रहा है। IREDA ने इक्विटी शेयर जारी करके करीब 2,994 करोड़ रुपये जुटाने के लिए शेयरधारकों से मंजूरी मांगी है। यह पैसा कंपनी के विस्तार, भविष्य की जरूरतों और लोन देने की क्षमता को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर ई-वोटिंग शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 की सुबह 9 बजे से शुरू होगी और 14 मार्च 2026 की शाम 5 बजे तक चलेगी। निवेशकों को डर है कि नए शेयर आने से बाजार में सप्लाई बढ़ेगी, जिसका असर फिलहाल कीमत पर दिख रहा है।

मुनाफे और कमाई में मारी लंबी छलांग

हैरानी की बात यह है कि कंपनी का बिजनेस जमीन पर बहुत मजबूत नजर आ रहा है। दिसंबर तिमाही के नतीजों को देखें तो IREDA का नेट प्रॉफिट 37% बढ़कर 585 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो पिछले साल इसी तिमाही में 425 करोड़ रुपये था। कंपनी की कुल आय में भी 38% की शानदार बढ़त हुई है। यही नहीं, कंपनी ने लोन बांटने के मामले में भी 32% की ग्रोथ दिखाई है। इससे साफ पता चलता है कि कंपनी के पास काम की कोई कमी नहीं है और वह लगातार मुनाफा कमा रही है।

निवेशकों के लिए आगे क्या है रास्ता?

भले ही शॉर्ट टर्म में शेयर की कीमत गिरी है, लेकिन कंपनी की नेटवर्थ अब बढ़कर 13,537 करोड़ रुपये हो गई है। सरकार ने भी भरोसा दिलाया है कि इस नए इश्यू के बाद भी राष्ट्रपति की शेयरहोल्डिंग में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आएगा। कंपनी अपने मौजूदा कामकाज में ग्रोथ की काफी संभावनाएं देख रही है। अगर आप एक निवेशक हैं, तो आपको कंपनी के मजबूत फंडामेंटल्स और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में बढ़ती मांग पर नजर रखनी चाहिए।

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