BNT Desk: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों ने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है। ताज़ा हालातों को देखते हुए पाकिस्तान के सेना प्रमुख (Army Chief) जनरल आसिम मुनीर ने एक बेहद महत्वपूर्ण और इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। इस हाई-लेवल मीटिंग में ISI चीफ और सेना के कई बड़े जनरल शामिल हुए। पाकिस्तान को डर है कि अगर इन दोनों देशों के बीच जंग छिड़ी, तो पाकिस्तान के लिए ‘आगे कुआँ और पीछे खाई’ वाली स्थिति बन जाएगी।
क्यों टेंशन में है पाकिस्तान?
दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया है और वहां सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं। पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक कंगाली और अफगानिस्तान बॉर्डर पर तनाव झेल रहा है। अब ईरान सीमा पर नया संकट खड़ा होना उसके लिए भारी मुसीबत बन सकता है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान को डर है कि युद्ध की स्थिति में अमेरिका उससे अपने सैन्य ठिकानों या हवाई क्षेत्र (Airspace) के इस्तेमाल की मांग कर सकता है, जिसे मानना या न मानना दोनों ही पाकिस्तान के लिए खतरनाक होगा।
देश के अंदर विद्रोह का डर
पाकिस्तान की एक बड़ी चिंता घरेलू सुरक्षा भी है। देश में करीब 30 प्रतिशत आबादी शिया समुदाय की है, जिनकी सहानुभूति ईरान के साथ है। अगर पाकिस्तान इस जंग में अमेरिका का साथ देता है, तो देश के भीतर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और दंगे भड़क सकते हैं। इसके अलावा, युद्ध होने पर ईरान से बड़ी संख्या में शरणार्थी पाकिस्तान आ सकते हैं, जिससे बॉर्डर पर दबाव और ज्यादा बढ़ जाएगा।
सेना ने शुरू की खास तैयारी
हालात को बिगड़ने से रोकने के लिए जनरल आसिम मुनीर ने पूरी सेना को ‘हाई अलर्ट’ पर रहने का आदेश दिया है। साथ ही, देश के भीतर एकजुटता बनाए रखने के लिए धार्मिक विद्वानों के साथ भी बैठकें की जा रही हैं ताकि किसी भी आंतरिक विद्रोह को रोका जा सके। पाकिस्तान अब तुर्की, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों के साथ मिलकर कूटनीतिक रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है ताकि इस क्षेत्रीय अस्थिरता से खुद को बचा सके।