राजगीर में कुदरत का करिश्मा या बड़ी लापरवाही? पहली बार कड़ाके की ठंड में सूखे ऐतिहासिक गर्म जल कुंड!

भीषण ठंड के बीच राजगीर के ऐतिहासिक गर्म जल कुंडों की धाराएं पहली बार सूख गई हैं। अत्यधिक बोरिंग को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है। इससे 18 मई से शुरू होने वाले मलमास मेले में श्रद्धालुओं के स्नान और आस्था पर गहरा संकट खड़ा हो गया है।

BNT
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ऐतिहासिक नगरी राजगीर से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। भीषण ठंड के इस मौसम में यहाँ के प्रसिद्ध ‘गंगा-यमुना’ कुंड की दो गर्म जल धाराएं अचानक सूख गई हैं। राजगीर की पहचान यहाँ के 22 कुंड और 52 जल धाराओं से है, लेकिन इतिहास में पहली बार कड़ाके की सर्दी में इन कुंडों का पानी गायब हो गया है। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है, बल्कि आगामी 18 मई से शुरू होने वाले एक महीने के ‘मलमास मेले’ पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं। श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि अगर पानी नहीं रहा, तो पवित्र स्नान और पूजा-पाठ कैसे होगा।

क्यों सूख रहे हैं सदियों पुराने ये जल स्रोत?

जानकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस भयानक स्थिति के पीछे सबसे बड़ा कारण कुंड क्षेत्र के आसपास होने वाली अंधाधुंध ‘बोरिंग’ है। ब्रह्मकुंड पंडा कमेटी के सचिव विकास उपाध्याय के अनुसार, कुंडों के पास बहुत ज्यादा गहराई वाली (हाई-फ्लो) बोरिंग लगा दी गई है। इससे पहाड़ों के भीतर का पानी जमीन के बहुत नीचे चला जाता है। नतीजा यह होता है कि बरसात के बाद जो पानी पहाड़ों में जमा होना चाहिए, वह वहां टिक ही नहीं पाता। कुछ साल पहले भी गर्मियों में ऐसी समस्या दिखी थी, लेकिन सर्दी के मौसम में पहली बार धाराओं का इस तरह सूखना खतरे की घंटी है।

धार्मिक महत्व और औषधीय गुणों का खजाना

राजगीर के इन कुंडों का महत्व केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका गहरा पौराणिक इतिहास है। माना जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने यहाँ यज्ञ किया था और उनके मानस पुत्र राजा वसु ने इन 22 कुंडों और 52 धाराओं का निर्माण करवाया था। इनमें सबसे प्रमुख ‘ब्रह्मकुंड’ है, जिसके पानी का तापमान हमेशा 45 से 50 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। धार्मिक मान्यता है कि इन कुंडों में स्नान करने से त्वचा रोग और जोड़ों के दर्द जैसी बीमारियां ठीक हो जाती हैं। मकर संक्रांति और मलमास मेले के दौरान यहाँ लाखों की भीड़ उमड़ती है, जिनके लिए ये जल धाराएं आस्था का केंद्र हैं।

प्रशासन की तैयारी और आगे का रास्ता

इस मामले पर सिंचाई विभाग अब हरकत में आया है। विभाग के पूर्व अभियंता जयदेव प्रसाद ने बताया कि साल 2010 में एक केंद्रीय टीम ने भी इन जल स्रोतों का अध्ययन किया था और कई सुझाव दिए थे, लेकिन उन पर कोई खास काम नहीं हुआ। फिलहाल सिंचाई विभाग की एक टीम ने गंगा-यमुना कुंड की जांच की है और रिपोर्ट का इंतजार है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि रिपोर्ट आने के बाद कुंड क्षेत्र के पास अवैध और गहरी बोरिंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो राजगीर की यह अनमोल विरासत हमेशा के लिए खत्म हो सकती है।

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