राउज एवेन्यू कोर्ट सख्त: बोली—'लालू परिवार चला रहा था क्रिमिनल एंटरप्राइज'

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 'जमीन के बदले नौकरी' घोटाले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत 46 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए इसे 'क्रिमिनल एंटरप्राइज' बताया। अब इस मामले में भ्रष्टाचार और जालसाजी की धाराओं के तहत मुकदमा चलेगा।

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BNT Desk: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार (9 जनवरी, 2026) को ‘लैंड फॉर जॉब’ यानी जमीन के बदले नौकरी घोटाले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत 46 लोगों के खिलाफ आरोप (Charges) तय कर दिए हैं। सुनवाई के दौरान जज विशाल गोगने ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे लालू परिवार एक ‘क्रिमिनल एंटरप्राइज’ चला रहा था और उन्होंने रेलवे को अपनी निजी जागीर मान लिया था।

क्या है पूरा मामला और क्या हैं आरोप?

यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच देश के रेल मंत्री थे। आरोप है कि उस दौरान रेलवे में ग्रुप डी के पदों पर भर्ती के लिए नियमों को ताक पर रखकर लोगों को नौकरियां दी गईं। इसके बदले में उन लोगों से लालू परिवार के सदस्यों और उनके करीबियों के नाम पर जमीनें लिखवाई गईं। सीबीआई (CBI) का दावा है कि ये जमीनें ‘गिफ्ट डीड’ और अन्य तरीकों से बहुत ही कम दामों पर ली गईं, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का मामला है।

कोर्ट का फैसला और 52 लोगों की रिहाई

विशेष अदालत ने इस मामले में कुल 103 आरोपियों की जांच की थी। शुक्रवार को आए आदेश में कोर्ट ने जहां लालू परिवार समेत 46 लोगों पर मुकदमा चलाने का रास्ता साफ कर दिया, वहीं 52 अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 5 आरोपियों की मौत पहले ही हो चुकी है। अब जिन 46 लोगों पर आरोप तय हुए हैं, उनमें लालू की बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव का नाम भी शामिल है। इनके खिलाफ जालसाजी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की गंभीर धाराओं में केस चलेगा।

सीबीआई जांच का अब तक का सफर

इस मामले की शुरुआत 18 मई 2022 को सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से हुई थी। इसके बाद अक्टूबर 2022 में पहली चार्जशीट दाखिल की गई। करीब तीन साल तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया, कई बार टलती तारीखों और लंबी बहस के बाद अब जाकर कोर्ट ने मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। लालू यादव ने इस कार्रवाई को रद्द करने की याचिका भी लगाई थी, जिसे दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है। अब देखना यह होगा कि इस कानूनी लड़ाई में आगे लालू परिवार की क्या रणनीति रहती है।

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