BNT Desk: बिहार में ज्वेलरी दुकानों में सुरक्षा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। राज्य की कई ज्वेलरी दुकानों ने यह फैसला लिया है कि चेहरा ढककर आने वाले ग्राहकों को दुकान में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इस नियम में घूंघट, नकाब, बुर्का, हिजाब के साथ-साथ हेलमेट और मास्क पहनने वाले लोग भी शामिल हैं। ज्वेलर्स का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह सुरक्षा कारणों से लिया गया है ताकि चोरी, लूट और अपराध की घटनाओं को रोका जा सके। दुकानदारों के अनुसार, चेहरा ढका होने से अपराधियों की पहचान मुश्किल हो जाती है।
जेडीयू ने झाड़ा पल्ला
इस मुद्दे पर सियासत तेज होने के बाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने खुद को इससे अलग कर लिया है। जेडीयू नेता राजीव रंजन ने साफ कहा कि यह बिहार सरकार का कोई आदेश या फैसला नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय ज्वेलरी दुकानदारों और उनके संगठनों का निजी फैसला है और सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है। जेडीयू ने यह भी कहा कि इसे राजनीतिक रंग देना गलत है।
ज्वेलर्स की दलील और नियम का दायरा
ज्वेलर्स एसोसिएशन का कहना है कि बीते समय में कई घटनाओं में अपराधी नकाब या चेहरा ढककर दुकान में घुसे, जिससे नुकसान हुआ। इसलिए यह नियम धर्म या समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी पर समान रूप से लागू होगा। दुकानदारों ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्राहकों से केवल चेहरा दिखाने का अनुरोध किया जाएगा, किसी को अपमानित करने या जबरन कुछ हटवाने की मंशा नहीं है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस फैसले को लेकर विपक्षी दलों, खासकर राजद (RJD) ने कड़ी आपत्ति जताई है। राजद नेताओं का कहना है कि यह फैसला धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों पर चोट करता है। वहीं कुछ मुस्लिम संगठनों ने भी इसका विरोध किया है। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने ज्वेलर्स के सुरक्षा निर्णय का समर्थन किया है और इसे व्यावहारिक कदम बताया है। इसी वजह से यह मुद्दा अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का रूप ले चुका है।