राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा अपनी ही पार्टी के भीतर सुलग रही बगावत की खबरों से परेशान नजर आ रहे हैं। शुक्रवार को जब मीडिया ने उनसे पार्टी में मची ‘खटपट’ को लेकर सवाल किया, तो कुशवाहा अपना आपा खो बैठे। उन्होंने पत्रकारों पर भड़कते हुए तीखे लहजे में कहा, “सब सुत (सो) कर उठ के चले आए हैं और कुछ भी पूछ रहे हैं।” दरअसल, कुशवाहा इस समय परिवारवाद के आरोपों और अपने विधायकों की नाराजगी के दोहरे मोर्चे पर घिरे हुए हैं।
लिट्टी-चोखा पार्टी से गायब रहे विधायक
बगावत की ये कहानी 25 दिसंबर से शुरू हुई। मौका था उपेंद्र कुशवाहा द्वारा आयोजित ‘लिट्टी-चोखा’ पार्टी का, लेकिन महफिल से उनके अपने ही तीन खास विधायक—आनंद माधव, आलोक सिंह और रामेश्वर महतो—नदारद रहे। ये विधायक पटना में पार्टी छोड़कर सीधे दिल्ली पहुंच गए। वहां उन्होंने बीजेपी के नए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की और उनकी हंसती-मुस्कुराती तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इस मुलाकात ने बिहार के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या कुशवाहा की पार्टी टूटने वाली है?
बेटे को ‘लॉन्च’ करने से उपजी नाराजगी!
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस नाराजगी की जड़ में ‘परिवारवाद’ है। कहा जा रहा है कि कुशवाहा ने अपने बेटे को बिना चुनाव लड़ाए सीधे मंत्री पद दिलाकर राजनीति में लॉन्च कर दिया, जिससे पार्टी के पुराने और कद्दावर नेता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। विधायकों का दिल्ली जाकर बीजेपी नेता से मिलना इसी ‘मौन बगावत’ का हिस्सा माना जा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि पार्टी के कुछ अन्य पदाधिकारियों ने तो इस्तीफे तक दे दिए हैं।
सवालों से बच रहे हैं पार्टी सुप्रीमो
फिलहाल उपेंद्र कुशवाहा इन सवालों का सामना करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। जब शुक्रवार को पत्रकारों ने उनसे पूछा कि विधायक नाराज क्यों हैं और क्या पार्टी में टूट होने वाली है, तो उन्होंने जवाब देने के बजाय सवाल पूछने वालों पर ही गुस्सा उतार दिया। उनकी यह झुंझलाहट बता रही है कि RLM के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। अब देखना यह होगा कि क्या कुशवाहा अपने नाराज साथियों को मना पाते हैं या फिर बिहार की राजनीति में कोई नया उलटफेर देखने को मिलेगा।