बिहार के गया में गुरुवार को एक निजी कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी काफी भावुक नजर आए। उन्होंने गया की सूखी धरती और किसानों की बदहाली पर चिंता जताते हुए एक बड़ा बयान दिया। मांझी ने कहा कि गया और मगध क्षेत्र के विकास के लिए अगर उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पैर भी पकड़ने पड़े, तो वो इससे पीछे नहीं हटेंगे। उनका यह बयान अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है ।
सोन नदी का पानी लाने का संकल्प
जीतनराम मांझी ने दक्षिण बिहार में सूखे की समस्या को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि निरंजना और फल्गु नदियों में पानी की कमी के कारण खेती बर्बाद हो रही है। मांझी का मानना है कि अगर सोन नदी के पानी को इन नदियों में मोड़ दिया जाए, तो पूरा इलाका हरा-भरा हो जाएगा। उन्होंने पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने इस काम के लिए 100 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। लेकिन उनके पद से हटते ही यह फाइल ठंडे बस्ते में चली गई। अब वे इस प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करवाने के लिए पीएम मोदी से खास आग्रह करेंगे।
गया में बनेगा ‘मरीन ड्राइव’ और इंडस्ट्रियल पार्क
सिंचाई के साथ-साथ मांझी ने गया के शहरी विकास का भी रोडमैप सामने रखा। उन्होंने संकल्प दोहराया कि वे गया में पटना की तर्ज पर ‘मरीन ड्राइव’ बनवाएंगे और इसके लिए जल्द ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात करेंगे। इसी कार्यक्रम में मौजूद बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने भी गया को पर्यटन और निवेश का बड़ा केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि यहाँ इंडस्ट्रियल पार्क बनने से युवाओं को रोजगार मिलेगा और पटना से गया का सफर अब सिर्फ डेढ़ घंटे का रह गया है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।
विरोधियों पर निशाना और भविष्य की रणनीति
राजनीति पर बात करते हुए अशोक चौधरी ने आरजेडी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद कमियों से घिरे हैं, वे दूसरों की आलोचना कर रहे हैं। वहीं, डिप्टी सीएम के पद को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने साफ किया कि इसका फैसला मुख्यमंत्री ही करेंगे। कुल मिलाकर, जीतनराम मांझी का यह अंदाज बता रहा है कि वे अपने संसदीय क्षेत्र गया के लिए बेहद गंभीर हैं और आने वाले दिनों में केंद्र सरकार से किसी बड़े पैकेज या प्रोजेक्ट की उम्मीद की जा सकती है।