बिहार के मुंगेर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने प्यार और अटूट साथ की मिसाल पेश की है। लल्लू पोखर मोहल्ले में मंगलवार को एक बुजुर्ग पति ने अपनी पत्नी की अर्थी उठने से महज कुछ देर पहले ही दम तोड़ दिया। इसके बाद पूरे विधि-विधान के साथ दोनों की शव यात्रा एक साथ निकाली गई और एक ही चिता पर दोनों का अंतिम संस्कार किया गया। इस भावुक दृश्य को देख पूरा मोहल्ला रो पड़ा और नम आंखों से इस जोड़े को विदाई दी।
पत्नी के जाने का गम नहीं सह सके प्रोफेसर साहब
पूरी घटना मुंगेर न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता और विश्वनाथ सिंह लॉ कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर, 87 वर्षीय विश्वनाथ सिंह के परिवार की है। सोमवार दोपहर उनकी 82 वर्षीय पत्नी अहिल्या देवी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। पूरा परिवार मां के जाने के गम में डूबा ही था कि मंगलवार की सुबह एक और बड़ी त्रासदी हो गई। जब घर में पत्नी की अंतिम विदाई की तैयारी चल रही थी, तभी अचानक विश्वनाथ सिंह की तबीयत बिगड़ी और उन्होंने भी प्राण त्याग दिए।
63 साल का साथ और एक ही चिता पर अंतिम विदाई
विश्वनाथ सिंह और अहिल्या देवी की शादी साल 1961 में हुई थी। 63 सालों के इस लंबे सफर में दोनों ने हर सुख-दुख साथ देखा। परिजनों का कहना है कि शायद नियति को यही मंजूर था कि मौत भी उन्हें जुदा न कर सके। उनके तीन बेटे और दो बेटियां हैं, जो इस दोहरे दुख से पूरी तरह टूट चुके हैं। मंझले बेटे और अधिवक्ता विभेष कुमार ने बताया कि पिता अपनी जीवनसंगिनी के बिना एक दिन भी नहीं रह सके और उनके पीछे-पीछे ही दुनिया से चले गए।
कानून की दुनिया में शोक की लहर
विश्वनाथ सिंह केवल एक वरिष्ठ वकील ही नहीं थे, बल्कि उन्होंने लॉ कॉलेज में प्रोफेसर रहते हुए सैकड़ों छात्रों का भविष्य संवारा था। उनके निधन की खबर मिलते ही मुंगेर न्यायालय के कई बड़े वकील और शुभचिंतक उनके निवास पर पहुंचे। अंतिम यात्रा के दौरान ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, प्रोफेसर साहब का नाम रहेगा’ के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। लोगों का कहना है कि ऐसी अटूट प्रेम की मिसाल सदियों में एक बार देखने को मिलती है।