बांग्लादेश के बलुका इलाके में 25 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या और उसके शव को आग में झोंकने की घटना ने पूरे दक्षिण एशिया में आक्रोश मचा दिया है। इस घटना ने धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है। नेपाल में भी यह मामला चर्चित हुआ और वहां के नागरिकों ने इसे लेकर सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया।
विराटनगर में प्रदर्शन और नारेबाजी
नेपाल के विराटनगर में शनिवार को प्रदर्शन का नेतृत्व विश्व हिंदू परिषद (युवा वर्ग) के कार्यकर्ताओं ने किया। उन्होंने पंचमुखी मंदिर प्रांगण से मार्च निकालते हुए बांग्लादेश सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां रखी थीं, जिन पर लिखा था: “बांग्लादेश में हिंदुओं को बचाओ” और “धार्मिक अत्याचार बंद करो”। युवा और नागरिक दोनों ही बड़ी संख्या में शामिल हुए और उन्होंने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों की मांग और सख्त चेतावनी
विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बांग्लादेश सरकार से सख्त कार्रवाई करने की अपील की। उनके नारे स्पष्ट थे कि धार्मिक आधार पर हिंसा और अत्याचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। प्रदर्शनकारियों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाई जाएगी। युवा कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह केवल हिंदू समुदाय का मामला नहीं है, बल्कि सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का प्रश्न है।
पुलिस और RAB की कार्रवाई
बांग्लादेश पुलिस और रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) के सूत्रों के अनुसार इस हत्या में कथित संलिप्तता के आरोप में अब तक लगभग 12 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है और रविवार को दो और लोगों की गिरफ्तारी हुई। जांच अभी जारी है और अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नेपाल में प्रदर्शनकारी इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं और उनका कहना है कि न्याय तभी पूरा होगा जब हत्या में शामिल सभी अपराधियों को सजा मिले।