सांसद धर्मशीला गुप्ता की मांग: संपूर्ण क्रांति में तुरंत जोड़ें नए डिब्बे!

दिल्ली-पटना की लाइफलाइन 'संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस' में जनरल डिब्बे बढ़ाने की मांग राज्यसभा में उठी है। भाजपा सांसद धर्मशीला गुप्ता ने भारी भीड़ और यात्रियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए अतिरिक्त कोच जोड़ने और विशेष ट्रेनें चलाने की अपील की, ताकि आम यात्रियों का सफर सुरक्षित हो सके।

BNT
By
2 Min Read

BNT Desk: राजधानी दिल्ली और बिहार की राजधानी पटना के बीच चलने वाली बेहद लोकप्रिय ट्रेन संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस (12394/12393) में जनरल (अनारक्षित) डिब्बों की संख्या बढ़ाने की मांग संसद में गूँजी है। बुधवार को राज्यसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान बिहार से भाजपा सांसद धर्मशीला गुप्ता ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस ट्रेन में भारी भीड़ के कारण यात्रियों का बुरा हाल है।

यात्रियों की सुरक्षा पर गहराता संकट

सांसद धर्मशीला गुप्ता ने ‘शून्यकाल’ के दौरान सदन को बताया कि संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस केवल एक ट्रेन नहीं, बल्कि लाखों लोगों की ‘जीवन रेखा’ है। उन्होंने चिंता जाहिर की कि ट्रेन के जनरल डिब्बों की स्थिति वर्तमान में बहुत दयनीय है। भीड़ इतनी अधिक होती है कि यात्रियों को असुरक्षित और अव्यवस्थित तरीके से सफर करना पड़ता है। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों को ट्रेन में चढ़ने-उतरने में अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है।

क्यों है इस ट्रेन का इतना ज्यादा क्रेज?

संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस को अक्सर ‘आम लोगों की राजधानी’ कहा जाता है। इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इसकी रफ्तार और कम स्टॉपेज हैं। यह ट्रेन नई दिल्ली से शाम 5:30 बजे खुलकर मात्र 13 घंटे में पटना पहुँचा देती है। रास्ते में यह केवल कानपुर, मिर्जापुर, डीडीयू, आरा और दानापुर जैसे मुख्य स्टेशनों पर ही रुकती है। तेज सफर और समय की बचत की वजह से हर वर्ग का यात्री इसी ट्रेन को पहली पसंद मानता है।

क्या हैं प्रमुख मांगें?

सदन में मांग की गई है कि यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ट्रेन में अतिरिक्त अनारक्षित डिब्बे तुरंत जोड़े जाएं। इसके साथ ही, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी मैनेजमेंट और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के कड़े इंतजाम किए जाएं। सांसद ने यह भी सुझाव दिया कि इस रूट पर दबाव कम करने के लिए कुछ ‘विशेष ट्रेनें’ भी चलाई जानी चाहिए। अब देखना यह है कि रेल मंत्रालय इस गंभीर समस्या पर कब तक ठोस कदम उठाता है।

Share This Article