BNT Desk: नेपाल में हाल ही में हुए तथाकथित ‘जेन जी (Gen Z) आंदोलन’ ने हिंसक रूप ले लिया, जिसके चलते कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। 8 और 9 सितंबर को आंदोलनकारियों की उग्रता के बीच नेपाल की कई जेलों में अफरा-तफरी मच गई। इसी दौरान सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ने का फायदा उठाकर हजारों कैदी जेल तोड़कर फरार हो गए। यह घटना नेपाल के हालिया इतिहास की सबसे बड़ी जेल ब्रेक घटनाओं में से एक मानी जा रही है।
हजारों कैदी फरार, बिहार से जुड़ा मामला
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार नेपाल के 18 जिलों की 27 जेलों से कुल 13,591 कैदी फरार हुए थे। इनमें से अब तक करीब 7,700 कैदियों को दोबारा जेल भेजा जा चुका है, जबकि 6,813 कैदी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें 254 कैदी बिहार के निवासी हैं। ये कैदी तस्करी, आर्म्स एक्ट और देश विरोधी गतिविधियों जैसे गंभीर मामलों में बंद थे।
बिहार में अलर्ट, खुफिया विभाग सक्रिय
नेपाल से सटे सीमावर्ती राज्य होने के कारण बिहार में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। बिहार के खुफिया विभाग ने सभी 254 फरार कैदियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है। पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, अररिया, सुपौल, किशनगंज, मुजफ्फरपुर और पटना जैसे जिलों में विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है, जहां इनके छिपे होने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार सख्त, प्रत्यर्पण की तैयारी
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ कहा है कि फरार कैदियों के खिलाफ बिना किसी दबाव के विधिसम्मत कार्रवाई होगी। विशेष शाखा को निर्देश दिए गए हैं कि इन अपराधियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए। साथ ही भारत-नेपाल संधि के तहत प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि पकड़े जाने के बाद इन्हें नेपाल को सौंपा जा सके।