NDA के अंदर ही मची रार: उपेंद्र कुशवाहा ने चिराग की पार्टी में लगाई बड़ी सेंध, कई दिग्गज हुए शामिल

बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी 'राष्ट्रीय लोक मोर्चा' ने चिराग पासवान की लोजपा (R) के वरिष्ठ नेता ए.के. वाजपेई समेत कई दिग्गजों को अपने पाले में कर लिया है। एनडीए गठबंधन के भीतर मची इस रार ने आने वाले चुनावों से पहले नया सियासी समीकरण बना दिया है।

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BNT Desk: NDA गठबंधन के अंदर ही अब नेताओं को अपनी ओर खींचने का खेल शुरू हो गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी ‘राष्ट्रीय लोक मोर्चा’ ने चिराग पासवान की पार्टी ‘लोजपा (रामविलास)’ को बड़ा झटका दिया है। चिराग की पार्टी के कई दिग्गज नेताओं ने उनका साथ छोड़कर अब उपेंद्र कुशवाहा का हाथ थाम लिया है। इस बदलाव से राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि आखिर चुनाव से पहले गठबंधन के अंदर ही यह खींचतान क्यों हो रही है।

कौन-कौन से बड़े चेहरे हुए शामिल?

बुधवार को हुए इस बड़े उलटफेर में लोजपा (R) के कई बड़े नाम कुशवाहा के साथ आ गए। इनमें सबसे प्रमुख नाम अरविंद कुमार वाजपेई (ए.के. वाजपेई) का है, जो चिराग की पार्टी के संस्थापक सदस्य, वरिष्ठ उपाध्यक्ष और मुख्य प्रवक्ता रह चुके हैं। उनके साथ पृथ्वी राज यादव (राष्ट्रीय महासचिव) और एस.के. मिश्रा (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, किसान प्रकोष्ठ) ने भी पार्टी की सदस्यता ली है। कुशवाहा ने इन सभी का स्वागत किया और कहा कि इससे उनकी पार्टी बिहार के साथ-साथ यूपी और दिल्ली में भी मजबूत होगी।

चिराग का साथ क्यों छोड़ा?

पार्टी छोड़ने के बाद ए.के. वाजपेई ने चिराग पासवान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में साफ तौर पर कहा कि उन्हें चिराग में “क्षमता की कमी” दिखी। वाजपेई ने यह भी आरोप लगाया कि चिराग की पार्टी में उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंच रही थी, जिसके कारण उन्होंने इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में आकर उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे वह अपने घर वापस आ गए हों।

कुशवाहा की सफाई और भविष्य की रणनीति

जब उपेंद्र कुशवाहा से इस ‘छीना-झपटी’ पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बड़ी चतुराई से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि नेताओं के आने में उनकी कोई सीधी भूमिका नहीं है, वे नेता खुद उस दल को छोड़कर आए हैं। कुशवाहा ने यह भी कहा कि अगर वाजपेई जैसे अनुभवी नेता एनडीए के पाले में सक्रिय नहीं रहते, तो इससे गठबंधन का ही नुकसान होता। अब देखना यह है कि चिराग पासवान अपने नेताओं के इस तरह पार्टी छोड़ने पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

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