BNT Desk: अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली मेटल और माइनिंग कंपनी वेदांता लिमिटेड को डिमर्जर के मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई बेंच ने कंपनी के लंबे समय से प्रस्तावित डिमर्जर प्लान को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद वेदांता के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। बाजार में निवेशकों ने इस फैसले को सकारात्मक संकेत के तौर पर लिया, जिससे शेयर खरीदने की होड़ लग गई।
शेयर बाजार में दिखा सीधा असर
NCLT की मंजूरी के बाद मंगलवार, 16 दिसंबर को वेदांता का शेयर दिन के कारोबार में ₹573 तक पहुंच गया। कारोबार के अंत में यह शेयर ₹569.35 पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 3.52% की बढ़त है। साल 2025 में अब तक वेदांता का शेयर करीब 28% चढ़ चुका है, जबकि बीते एक साल में इसमें 11% की मजबूती देखने को मिली है। इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा कंपनी में लगातार बढ़ रहा है।
मंत्रालय की आपत्तियां और वेदांता का जवाब
इससे पहले नवंबर में हुई सुनवाई के दौरान पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने डिमर्जर को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। मंत्रालय ने वित्तीय जोखिम बढ़ने, हाइड्रोकार्बन संपत्तियों के गलत प्रस्तुतीकरण और देनदारियों के पर्याप्त खुलासे न होने जैसी चिंताएं जताई थीं। हालांकि, वेदांता ने इन आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि डिमर्जर योजना में जरूरी बदलाव कर SEBI से पहले ही मंजूरी ली जा चुकी है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि मंत्रालय उसका न तो कर्जदाता है और न ही स्टेकहोल्डर।
डिमर्जर का प्लान और निवेशकों को फायदा
वेदांता ने साल 2023 में डिमर्जर की घोषणा की थी। इस योजना के तहत कंपनी को पांच अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बांटा जाएगा—वेदांता एल्युमीनियम, वेदांता ऑयल एंड गैस, वेदांता पावर, वेदांता आयरन एंड स्टील और एक स्थिर वेदांता लिमिटेड, जिसमें जिंक-सिल्वर बिजनेस रहेगा और जो नई टेक्नोलॉजी व वेंचर्स के लिए इनक्यूबेटर की भूमिका निभाएगी। कंपनी का उद्देश्य कर्ज कम करना, बिजनेस को स्वतंत्र रूप से बढ़ने देना और शेयरधारकों के लिए वैल्यू क्रिएट करना है। ब्रोकरेज फर्म नुवामा रिसर्च के अनुसार, डिमर्जर के बाद कंपनी का फेयर वैल्यू ₹686 तक जा सकता है।