BNT Desk: मेडिकल साइंस की पढ़ाई में लड़कियों के लगातार आगे रहने के बावजूद, इस साल एमबीबीएस (MBBS) दाखिलों में लड़कों का दबदबा एक बार फिर बढ़ गया है। यह स्थिति मुख्य रूप से महाराष्ट्र में देखी गई है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। कौन प्रभावित: मेडिकल की पढ़ाई करने वाली लड़कियां। महाराष्ट्र में इस बार एमबीबीएस दाखिलों की तस्वीर चौंकाने वाली है। लड़कों ने न केवल सीटों पर बढ़त बनाई, बल्कि टॉप 100 रैंक की लिस्ट में लड़कियों की मौजूदगी घटकर पिछले छह साल के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई है। यह एक गंभीर विषय है, क्योंकि डेंटल (Dental), आयुर्वेद (Ayurveda), और होम्योपैथी (Homeopathy) जैसे दूसरे मेडिकल कोर्स में लड़कियां अब भी आगे हैं।
सीटों पर भी लड़कों का कब्जा
महाराष्ट्र में कुल 8,535 एमबीबीएस सीटों में से 53% सीटें लड़कों के हिस्से में आईं, जबकि लड़कियों को 47% सीटें ही मिल सकीं। बीते सात सालों का डेटा बताता है कि लड़कियों की हिस्सेदारी 42% से 47% के बीच ही अटकी रही है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि राज्य की टॉप 100 मेरिट लिस्ट में लड़कियां लगातार कम हो रही हैं। इस साल केवल 25 लड़कियां टॉप 100 में जगह बना पाईं, जबकि पिछले साल यह संख्या 33 थी। राष्ट्रीय स्तर पर भी टॉप 100 में सिर्फ 15 लड़कियां ही शामिल हो सकीं।
आखिर क्या है इस बदलाव की वजह?
आखिर एमबीबीएस में लड़कियां क्यों पिछड़ रही हैं? महाराष्ट्र चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय के पूर्व निदेशक, डॉ. प्रवीण शिंगारे इसके पीछे कई संभावित कारण बताते हैं। उनका मानना है कि आज भी कुछ परिवार लड़कों की कोचिंग पर ज्यादा खर्च करते हैं। एक समय था जब मेडिकल कॉलेजों में 50% से अधिक लड़कियां होती थीं, लेकिन अब ट्रेंड बदल रहा है।
लंबी पढ़ाई और करियर का बदलता रुख
एक और बड़ी वजह मेडिकल पढ़ाई की लंबी अवधि है। पहले सिर्फ एमबीबीएस से अच्छी नौकरी मिल जाती थी, लेकिन अब एमडी (MD) या एमएस (MS) के बाद सुपर-स्पेशलाइजेशन लगभग ज़रूरी हो गया है। इस लंबी और खर्चीली पढ़ाई के कारण, कई लड़कियां अब तकनीकी या अन्य छोटे पेशेवर कोर्स की तरफ़ ज़्यादा झुकाव दिखा रही हैं, जिससे एमबीबीएस में उनका रुझान कम होता जा रहा है।