मेरा सांसद, मेरा हिसाब: कटिहार के सांसद तारिक अनवर का रिपोर्ट कार्ड, 86 कामों में 60 पूरे; सांसद निधि से हाई मास्ट लाइट लगाने पर कितना जोर?

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BNT Desk: पांच साल का कार्यकाल, जनता का भरोसा और विकास की उम्मीदें। एक सांसद से लोग सड़क, स्कूल, अस्पताल, पुल, रोजगार और बाढ़ से सुरक्षा जैसे बुनियादी कामों की अपेक्षा करते हैं। लेकिन चुनाव जीतने के बाद सांसद अपने क्षेत्र में कितना सक्रिय रहता है और विकास के लिए उपलब्ध संसाधनों का कितना इस्तेमाल होता है, इसका हिसाब अक्सर चुनाव के समय ही सामने आता है।

इसी सवाल का जवाब तलाशने वाली विशेष सीरीज ‘मेरा सांसद, मेरा हिसाब’ के तीसरे एपिसोड में बात कटिहार के सांसद तारिक अनवर की। वे बिहार की राजनीति के अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं और कई बार लोकसभा पहुंच चुके हैं। कांग्रेस से राजनीतिक सफर शुरू करने के बाद वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में गए और फिर कांग्रेस में लौट आए। कटिहार की जनता ने उन्हें बार-बार प्रतिनिधित्व का मौका दिया है। ऐसे में सवाल है कि क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं, खासकर बाढ़ और नदी कटाव से निपटने के लिए उनके प्रयास कितने प्रभावी रहे हैं।

 

पटना में जन्म, पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर

तारिक अनवर का जन्म 16 जनवरी 1951 को पटना में हुआ था। वे स्वतंत्रता सेनानी और बैरिस्टर शाह जुबैर के परिवार से जुड़े हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की और बाद में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। उपलब्ध विवरणों के मुताबिक, उन्होंने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की है।

उनके परिवार का भी राजनीति से जुड़ाव रहा है। उनके पिता एस.एम. अहमद, जिन्हें शाह मुश्ताक अहमद के नाम से भी जाना जाता है, बिहार विधानसभा के सदस्य रह चुके थे। उनकी पत्नी हेना तारिक भी सामाजिक और संस्थागत गतिविधियों से जुड़ी बताई जाती हैं। हालांकि, परिवार से संबंधित व्यावसायिक और संस्थागत विवरणों को प्रकाशित करने से पहले चुनावी हलफनामे तथा अन्य संबंधित रिकॉर्ड से मिलान किया जाना चाहिए।

 

छात्र राजनीति से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे तारिक अनवर

तारिक अनवर ने 1972 में छात्र नेता के रूप में कांग्रेस से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। वे 1976 से 1981 तक बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। इसके बाद 1982 से 1985 तक उन्होंने भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। 1988-89 के दौरान वे बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे।

उन्होंने 1977 में कटिहार लोकसभा सीट से पहला चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके। वर्ष 1980 में उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की। इसके बाद 1985, 1996 और 1998 में भी वे कटिहार से लोकसभा पहुंचे।

1999 में कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर मतभेद के बाद तारिक अनवर ने शरद पवार और पी.ए. संगमा के साथ कांग्रेस छोड़ दी। इसके बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का गठन हुआ। वर्ष 2004 में वे महाराष्ट्र से राज्यसभा पहुंचे और केंद्र सरकार में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री रहे।

2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने NCP के टिकट पर कटिहार से जीत दर्ज की। बाद में वे कांग्रेस में लौट आए। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर कटिहार सीट से फिर जीत हासिल की। इस तरह वे छह बार लोकसभा सदस्य चुने जा चुके हैं।

 

कटिहार की सबसे बड़ी चुनौती: बाढ़ और नदी कटाव

कटिहार बिहार के उन इलाकों में शामिल है, जहां बाढ़ और नदी कटाव लंबे समय से बड़ी समस्या बने हुए हैं। गंगा और महानंदा सहित क्षेत्र की नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी का असर कई गांवों, खेतों, सड़कों और आवासीय इलाकों पर पड़ता है। मनिहारी, बरारी और बारसोई जैसे क्षेत्रों में कटाव की समस्या को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार चिंता जताई जाती रही है।

नदी का कटाव केवल जमीन का नुकसान नहीं है। इससे लोगों के घर, खेती की जमीन, संपर्क मार्ग और आजीविका प्रभावित हो सकते हैं। बाढ़ के दौरान राहत सामग्री पहुंचाना, सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना और क्षतिग्रस्त सड़कों तथा पुल-पुलियों की मरम्मत भी बड़ी चुनौती बन जाती है।

ऐसे में कटिहार के सांसद से अपेक्षा रहती है कि वे संसद में इन समस्याओं को उठाने के साथ-साथ संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकार के साथ समन्वय कर स्थायी समाधान के लिए प्रयास करें। यह देखना भी जरूरी है कि कटाव रोकने की परियोजनाओं की स्वीकृति, निर्माण और निगरानी की स्थिति क्या है।

 

बाढ़ पीड़ितों की मदद और क्षेत्रीय दौरों को लेकर चर्चा

अक्टूबर 2024 में बिहार के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति के बीच तारिक अनवर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर राहत व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों तक पर्याप्त सहायता पहुंचाने और मुआवजा देने की मांग की थी। यह उनका राजनीतिक रुख था; राहत वितरण की वास्तविक स्थिति का आकलन सरकारी आंकड़ों और प्रभावित परिवारों की जानकारी के आधार पर किया जाना चाहिए।

तारिक अनवर के बारसोई, मनिहारी और बरारी जैसे इलाकों में बाढ़ तथा कटाव प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने की जानकारी भी सामने आती रही है। ऐसे दौरों के दौरान कटाव निरोधी कार्यों और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों का जायजा लेने तथा अधिकारियों से बातचीत करने की बात कही गई है।

लेकिन किसी क्षेत्र का दौरा करना और वहां समस्या का स्थायी समाधान होना दो अलग-अलग बातें हैं। कटिहार में बाढ़ और कटाव की समस्या को देखते हुए यह जानना जरूरी है कि किन स्थानों पर कटाव रोकने के काम स्वीकृत हुए, कितने पूरे हुए और उनसे कितने परिवारों को राहत मिली।

 

सितंबर 2025 का वायरल वीडियो और राजनीतिक विवाद

सितंबर 2025 में मनिहारी प्रखंड की धुरियाही पंचायत में बाढ़ और कटाव प्रभावित इलाके के दौरे के दौरान तारिक अनवर का एक वीडियो चर्चा में आया था। वीडियो में वे कीचड़ और पानी से भरे रास्ते को पार करने के लिए एक स्थानीय व्यक्ति की पीठ पर सवार होकर आगे बढ़ते दिखाई दिए।

इस वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद हुआ। भाजपा नेताओं ने इस घटना की आलोचना करते हुए इसे गरीब ग्रामीणों के सम्मान से जोड़कर सवाल उठाए। दूसरी ओर, कटिहार कांग्रेस की ओर से सफाई दी गई कि रास्ते की खराब स्थिति के कारण ऐसा करना पड़ा।

इस घटना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हुए, लेकिन वीडियो से अकेले पूरे क्षेत्र की सड़क व्यवस्था या सांसद के कार्यकाल का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। फिर भी यह घटना उस बुनियादी सवाल को सामने लाती है कि बाढ़ प्रभावित गांवों तक सुरक्षित और सुगम आवागमन की व्यवस्था कितनी बेहतर है।

 

सांसद निधि का हिसाब: 14.7 करोड़ रुपये आवंटित होने का दावा

सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना यानी MPLADS के तहत सांसद अपने क्षेत्र में विकास कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं। इन कार्यों में स्थानीय जरूरतों के मुताबिक सार्वजनिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हो सकती हैं।

उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, तारिक अनवर के लिए अब तक लगभग 14.7 करोड़ रुपये आवंटित होने का दावा है। इसी विवरण में 8,37,25,060 रुपये के कार्यों की सिफारिश किए जाने की बात कही गई है, जिसे 57 फीसदी बताया गया है।

वहीं, वास्तविक दर्ज खर्च की दर 54.2 फीसदी बताई गई है। इन आंकड़ों को समझते समय यह अंतर ध्यान में रखना जरूरी है कि किसी परियोजना के लिए राशि की सिफारिश करना, उसका पैसा खर्च होना और परियोजना का पूरा हो जाना अलग-अलग चरण हैं।

इसलिए सांसद निधि के इस्तेमाल का आकलन केवल सिफारिश या खर्च के प्रतिशत से नहीं किया जा सकता। यह भी देखना होगा कि कितनी परियोजनाओं को प्रशासनिक मंजूरी मिली, कितनी पर काम शुरू हुआ, भुगतान कितना हुआ और कितने कार्यों का भौतिक सत्यापन किया गया।

 

86 प्रस्तावित कार्यों में 60 पूरे होने का दावा

उपलब्ध विवरण में तारिक अनवर की सांसद निधि से कुल 86 कार्यों की सिफारिश किए जाने और इनमें से 60 के पूरा होने की बात कही गई है। इस हिसाब से परियोजना पूर्णता दर करीब 69.8 फीसदी बैठती है।

यह आंकड़ा अपने आप में परियोजनाओं की प्रगति का एक संकेत देता है, लेकिन इससे यह स्पष्ट नहीं होता कि पूरे हुए काम किस प्रकार के हैं, उनकी लागत कितनी है और उनसे कितने लोगों को सीधा लाभ मिला है। इसके लिए प्रत्येक परियोजना की सूची, स्थान, लागत, स्वीकृति की तारीख और पूर्णता संबंधी जानकारी का मिलान जरूरी है।

उपलब्ध सामग्री में यह भी दावा किया गया है कि सार्वजनिक डैशबोर्ड पर कई परियोजनाएं 16 मीटर ऊंचे हाई मास्ट LED लाइट की खरीद और स्थापना से संबंधित हैं। इन कार्यों की लागत करीब 9.70 लाख से 9.95 लाख रुपये के बीच बताई गई है। हालांकि, कुल परियोजनाओं में ऐसे कार्यों की वास्तविक संख्या और उनकी मौजूदा स्थिति की पुष्टि आधिकारिक सूची से की जानी चाहिए।

 

क्या सांसद निधि के काम कटिहार की प्रमुख जरूरतों के अनुरूप हैं?

यदि सार्वजनिक परियोजना सूची में एक ही तरह के हाई मास्ट LED लाइट लगाने के कई प्रस्ताव दर्ज हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्षेत्र की अलग-अलग जरूरतों को किस तरह प्राथमिकता दी गई। कटिहार जैसे बाढ़ और कटाव प्रभावित इलाके में रोशनी के साथ-साथ सड़क, पुल-पुलिया, सुरक्षित आवागमन और सार्वजनिक सुविधाओं का विकास भी महत्वपूर्ण है।

हालांकि, हाई मास्ट लाइट को अपने आप में गैरजरूरी परियोजना नहीं कहा जा सकता। बाजार, चौक, सार्वजनिक स्थलों और प्रमुख रास्तों पर पर्याप्त रोशनी से लोगों को लाभ मिल सकता है। असली सवाल यह है कि परियोजनाओं का चयन स्थानीय जरूरतों के आकलन के आधार पर हुआ या नहीं और क्या सांसद निधि से उपलब्ध राशि का इस्तेमाल क्षेत्र की प्राथमिकताओं के अनुरूप किया गया।

इसी तरह, किसी सार्वजनिक डैशबोर्ड पर स्कूल भवन, अस्पताल उपकरण या कटाव निरोधी ढांचे का उल्लेख न मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि इन क्षेत्रों में कोई काम नहीं हुआ। यह जानने के लिए संबंधित विभागों और योजनाओं के रिकॉर्ड की अलग से जांच करनी होगी।

 

जनता के लिए असली सवाल: घोषणाओं से आगे कितना विकास?

तारिक अनवर का लंबा राजनीतिक अनुभव और छह बार लोकसभा पहुंचना उनके राजनीतिक सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने बाढ़ राहत, नदी कटाव और क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर बयान दिए हैं और प्रभावित इलाकों के दौरे भी किए हैं। लेकिन उनके कामकाज का आकलन करते समय यह देखना जरूरी है कि इन प्रयासों से जमीन पर क्या बदलाव आया।

सांसद निधि से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों में 86 कार्यों की सिफारिश और 60 कार्य पूरे होने का दावा है। वहीं, कई परियोजनाओं के हाई मास्ट LED लाइट से संबंधित होने की बात भी सामने आई है। इन दावों की पुष्टि आधिकारिक डैशबोर्ड और परियोजना-वार रिकॉर्ड से होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन कार्यों को पूरा किया गया और उनका जनता को कितना लाभ मिला।

कटिहार के मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या बाढ़ और कटाव से प्रभावित गांवों की स्थिति में सुधार आया, क्या संपर्क मार्ग बेहतर हुए और क्या सांसद निधि से चुने गए कार्य स्थानीय जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। इन सवालों के जवाब केवल राजनीतिक बयानों से नहीं, बल्कि परियोजनाओं के सत्यापित रिकॉर्ड और स्थानीय लोगों के अनुभव से मिलेंगे।

 

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