मेरा सांसद, मेरा हिसाब: पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव का रिपोर्ट कार्ड, सांसद निधि से 171 कामों की सिफारिश, सिर्फ 46 पूरे होने का दावा

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BNT Desk: बिहार की 40 लोकसभा सीटें, 40 सांसद और उनके कामकाज की अलग-अलग कहानियां। किसी सांसद ने संघर्ष के दम पर राजनीति में जगह बनाई, तो किसी को राजनीतिक विरासत का लाभ मिला। लेकिन जनता के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि सांसद बनने के बाद उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास के लिए क्या किया? संसद में कितने सवाल उठाए, जनता से किए गए वादों पर कितना काम हुआ और सांसद निधि से कितनी योजनाएं पूरी हुईं? इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए शुरू की गई विशेष सीरीज ‘मेरा सांसद, मेरा हिसाब’ में इस बार चर्चा पूर्णिया के निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की।

पप्पू यादव बिहार की राजनीति में अपने आक्रामक अंदाज, विवादों और जनसंपर्क के लिए जाने जाते हैं। पूर्णिया से निर्दलीय चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचने के बाद वे कई मुद्दों पर लगातार सक्रिय दिखाई दिए हैं। रोजगार मेले से लेकर बाढ़ राहत अभियान और संसद में उठाए गए सवालों तक, उनके कामकाज के कई पहलू हैं। वहीं, सांसद निधि से जुड़े आंकड़े विकास योजनाओं की प्रगति पर सवाल भी खड़े करते हैं।

 

संपन्न परिवार में जन्म, शुरुआती शिक्षा सुपौल में

राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का जन्म 24 दिसंबर 1967 को पूर्णिया में हुआ था। उनका परिवार संपन्न जमींदार पृष्ठभूमि से जुड़ा बताया जाता है। बचपन में मिला ‘पप्पू’ नाम ही आगे चलकर उनकी राजनीतिक पहचान बन गया। उनकी शुरुआती पढ़ाई सुपौल के आनंद मार्ग स्कूल में हुई।

राजनीति में प्रवेश के बाद पप्पू यादव की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी, जो अपने क्षेत्र में सक्रिय रहने और आक्रामक राजनीतिक शैली के लिए जाने जाते हैं। उनके समर्थक उन्हें जनता के बीच रहने वाला नेता बताते हैं, जबकि आलोचक उनकी राजनीति और कार्यशैली पर सवाल उठाते रहे हैं।

 

निर्दलीय विधायक से सांसद तक का सफर

पप्पू यादव का राजनीतिक सफर तीन दशक से अधिक पुराना है। उन्होंने 1990 में सिंहेश्वर विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज कर राजनीति में अपनी जगह बनाई। इसके बाद वे लोकसभा की राजनीति में सक्रिय हुए और 1991, 1996 तथा 1999 में पूर्णिया से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया।

2004 में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के टिकट पर मधेपुरा से लोकसभा चुनाव जीता। इसके बाद 2014 में भी वे लोकसभा पहुंचे, जबकि 2019 के चुनाव में उन्हें मधेपुरा सीट से हार का सामना करना पड़ा।

2015 में पप्पू यादव ने जन अधिकार पार्टी बनाई थी। हालांकि, पार्टी बिहार की राजनीति में बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकी। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया और कांग्रेस में शामिल हो गए। वे पूर्णिया से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन महागठबंधन में सीट बंटवारे के दौरान पूर्णिया की सीट राजद के हिस्से में चली गई।

इसके बाद पप्पू यादव ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। उन्होंने चुनाव में राजद और जदयू के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज की और पूर्णिया से लोकसभा पहुंचे।

उनकी पत्नी रंजीत रंजन भी राजनीति में सक्रिय रही हैं और सुपौल से सांसद रह चुकी हैं। उनके बेटे सार्थक रंजन क्रिकेट से जुड़े हैं।

 

संसद में NEET से लेकर पूर्णिया एयरपोर्ट तक उठाए मुद्दे

लोकसभा में पप्पू यादव कई मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए चर्चा में रहे हैं। 2024 में सांसद पद की शपथ के दौरान उन्होंने NEET परीक्षा को लेकर दोबारा परीक्षा कराने की मांग से जुड़ी टी-शर्ट पहनी थी। इस प्रदर्शन के जरिए उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया को लेकर छात्रों की चिंताओं को उठाया।

पूर्णिया एयरपोर्ट का संचालन भी उनके प्रमुख क्षेत्रीय मुद्दों में शामिल रहा है। संसद में उन्होंने एयरपोर्ट को चालू कराने से जुड़ा सवाल उठाया था। इस मुद्दे पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से जमीन संबंधी समस्याओं के समाधान की बात कही गई थी।

पप्पू यादव ने वक्फ संशोधन विधेयक से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। वहीं, जुलाई 2026 में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में पट्टी और बैंडेज के साथ संसद पहुंचने को लेकर भी वे चर्चा में आए।

उनकी वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वे संसद में अब तक 123 सवाल पूछ चुके हैं। हालांकि, संसद में सवालों की संख्या के साथ यह देखना भी जरूरी है कि उठाए गए मुद्दों पर क्या कार्रवाई हुई और उनका क्षेत्र की जनता को कितना लाभ मिला।

 

रोजगार मेले में हजारों युवाओं की भागीदारी का दावा

पूर्णिया में रोजगार और युवाओं के अवसरों को लेकर भी पप्पू यादव की गतिविधियां चर्चा में रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने पूर्णिया के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में रोजगार मेले का आयोजन कराया था। इसमें पूर्णिया के अलावा सहरसा, कटिहार, अररिया, मधेपुरा और सुपौल के युवा भी पहुंचे थे।

दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, रोजगार मेले में 50 से अधिक कंपनियों ने हिस्सा लिया और करीब 7,882 युवाओं के चयन का दावा किया गया। इनमें 32 युवाओं को खाड़ी देशों में रोजगार के अवसर मिलने की बात भी कही गई। इन आंकड़ों का स्वतंत्र सत्यापन और चयनित युवाओं को वास्तव में नौकरी मिलने की स्थिति इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।

जुलाई 2026 में अपने कार्यकाल के दो साल पूरे होने के मौके पर पप्पू यादव ने युवाओं के लिए अध्ययन सामग्री वितरण कार्यक्रम भी आयोजित किया था। इस दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को सामग्री दी गई और नई विकास योजनाओं की घोषणा की गई।

इन गतिविधियों से उनकी युवा-केंद्रित राजनीति की तस्वीर सामने आती है। हालांकि, रोजगार मेले की वास्तविक सफलता का आकलन करने के लिए यह देखना जरूरी होगा कि चयनित युवाओं में कितने लोगों को नौकरी मिली और कितने रोजगार लंबे समय तक बने रहे।

 

बाढ़ राहत अभियान में सक्रियता और राजनीतिक बहस

सितंबर 2026 में बिहार के कई जिलों में बाढ़ से जनजीवन प्रभावित हुआ। इस दौरान पप्पू यादव ने राहत अभियान चलाया और प्रभावित इलाकों में पहुंचकर लोगों को सहायता देने की कोशिश की। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वे पटना के बख्तियारपुर, अरवल के सोनभद्र बंशी और पूर्णिया के रूपौली क्षेत्र में राहत सामग्री बांटने पहुंचे।

रूपौली के कौसकीपुर गांव में नाव के सहारे पहुंचकर लोगों को नकद सहायता देने की बात सामने आई। कटिहार में महिलाओं के बीच 500-500 रुपये बांटने का वीडियो भी वायरल हुआ। राहत अभियान के दौरान भोजपुर में गंगा की तेज धारा के बीच एक मकान बहने की घटना में उनके बाल-बाल बचने की जानकारी भी सामने आई। 18 सितंबर को भोजपुरी अभिनेता खेसारी लाल यादव ने उनसे मुलाकात कर राहत कार्य में सहयोग करने की इच्छा जताई थी।

इन गतिविधियों को लेकर उनके समर्थकों ने उनकी तारीफ की, जबकि आलोचकों ने इसे राजनीतिक प्रचार से जोड़कर देखा। राहत के दौरान नकद राशि बांटने के स्रोत को लेकर भी सवाल उठे। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में इन सवालों का कोई पुष्ट जवाब नहीं दिया गया है। इसलिए राहत अभियान का आकलन करते समय सहायता पाने वाले लोगों की संख्या, वितरण का रिकॉर्ड और खर्च का सत्यापित विवरण महत्वपूर्ण होगा।

 

विवादों और कानूनी मामलों में भी रहे चर्चा में

पप्पू यादव का राजनीतिक सफर विवादों से भी जुड़ा रहा है। उनके खिलाफ अलग-अलग समय पर कानूनी मामले चर्चा में आए हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अयोध्या के राम मंदिर में कथित चोरी के मुद्दे पर नुक्कड़ नाटक से जुड़े मामले में प्रयागराज की अदालत ने उन्हें तलब किया था। इस मामले की मौजूदा कानूनी स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

इसके अलावा, 6 फरवरी 2026 को पटना में उनके मंदिरी स्थित आवास पर पुलिस पहुंची और उन्हें गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई थी। बताया गया कि यह कार्रवाई 1995 के गर्दनीबाग थाना क्षेत्र से जुड़े संपत्ति विवाद के पुराने मामले में हुई थी। गिरफ्तारी के बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया और अदालत में पेश किया गया। दिए गए विवरण के अनुसार, उन्हें दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

पप्पू यादव ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि NEET अभ्यर्थी की संदिग्ध मौत के मामले में आवाज उठाने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। कांग्रेस ने भी कार्रवाई को राजनीतिक साजिश बताया था। ये आरोप संबंधित पक्षों के बयान हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

 

सांसद निधि का हिसाब: सिफारिश और वास्तविक खर्च में अंतर

सांसद निधि यानी MPLADS के तहत सांसद अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए योजनाओं की सिफारिश कर सकते हैं। इस योजना में फंड की सिफारिश, राशि का वास्तविक खर्च और परियोजना का पूरा होना तीन अलग-अलग चरण हैं। इसलिए केवल सिफारिश की गई राशि के आधार पर विकास कार्यों की सफलता का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।

दिए गए MPLADS डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, पप्पू यादव के लिए अब तक करीब 14.7 करोड़ रुपये आवंटित होने की बात कही गई है। उपलब्ध विवरण में फंड उपयोग या सिफारिश का प्रतिशत 98.8 फीसदी बताया गया है। इसके तहत 14,52,47,018 रुपये के विकास कार्यों की सिफारिश किए जाने का दावा है।

हालांकि, सिफारिश की गई राशि और वास्तव में खर्च हुई राशि एक समान नहीं होती। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, दर्ज खर्च की दर 49.4 फीसदी है। इसका अर्थ है कि आवंटित राशि के मुकाबले आधे से कम रकम खर्च के रूप में दर्ज हुई है। इन आंकड़ों को समझने के लिए यह भी देखना जरूरी है कि राशि कब जारी हुई, कितनी परियोजनाएं स्वीकृत हुईं और किन कार्यों में भुगतान या निर्माण की प्रक्रिया जारी है।

 

171 कामों में से 46 पूरे होने का दावा

सांसद निधि से जुड़े उपलब्ध विवरण में कुल 171 विकास कार्यों की सिफारिश किए जाने की बात कही गई है। इनमें से 46 काम पूरे होने का दावा है। इस आधार पर परियोजना पूर्णता दर करीब 26.9 फीसदी बनती है।

इसका मतलब है कि दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, सिफारिश किए गए कार्यों में लगभग 27 फीसदी ही पूर्ण बताए गए हैं। शेष परियोजनाओं की स्थिति जानने के लिए यह जांचना आवश्यक है कि कितने काम स्वीकृति की प्रतीक्षा में हैं, कितने निर्माणाधीन हैं और कितने प्रशासनिक या तकनीकी कारणों से लंबित हैं।

यहां एक अहम अंतर समझना जरूरी है। किसी परियोजना की सिफारिश हो जाने का अर्थ यह नहीं है कि उसका निर्माण शुरू हो गया है। इसी तरह, खर्च दर्ज होने का अर्थ भी अपने आप में यह नहीं है कि संबंधित काम पूरा हो चुका है। इसलिए सांसद निधि का पूरा हिसाब देखने के लिए आवंटन, सिफारिश, स्वीकृति, खर्च और पूर्णता के आंकड़ों का मिलान करना होगा।

 

पूर्णिया की जनता के लिए असली सवाल क्या है?

पप्पू यादव की राजनीतिक पहचान उनके आक्रामक अंदाज, संसद में मुद्दे उठाने, रोजगार मेले और बाढ़ राहत जैसी गतिविधियों से बनी है। लेकिन सांसद के कामकाज का आकलन केवल सार्वजनिक कार्यक्रमों या राजनीतिक बयानों से नहीं किया जा सकता। इसके लिए क्षेत्र में पूरे हुए विकास कार्यों, रोजगार के वास्तविक नतीजों, संसद में उठाए गए सवालों पर हुई कार्रवाई और सांसद निधि के इस्तेमाल का रिकॉर्ड देखना जरूरी है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सांसद निधि से 171 कामों की सिफारिश की गई और उनमें से 46 काम पूरे होने का दावा है। यह आंकड़ा परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की जरूरत बताता है। हालांकि, अधूरी परियोजनाओं के कारण और उनकी मौजूदा स्थिति की पुष्टि के बिना यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि सभी लंबित काम सांसद की निष्क्रियता के कारण रुके हैं।

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