BNT Desk: बिहार में बाढ़ के बाद अब राज्य सरकार नुकसान का विस्तृत आकलन तैयार कर रही है। बाढ़ से कई जिलों में लोगों के घर, खेत, सड़क, पुल, तटबंध और दूसरी सार्वजनिक संपत्तियां प्रभावित हुई हैं। अब अलग-अलग विभागों की ओर से हुए नुकसान का आंकड़ा जुटाया जा रहा है। इसके बाद पूरी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। रिपोर्ट अक्टूबर के पहले सप्ताह में केंद्र को भेजे जाने की तैयारी है।
15 जिलों में बाढ़ का असर
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 15 जिले बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। करीब 49.72 लाख लोग बाढ़ की चपेट में आए हैं। बाढ़ का असर कई इलाकों में लंबे समय तक रहा। इससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ और आवागमन से लेकर खेती तक पर असर पड़ा। प्रशासन की ओर से राहत कार्य चलाने के साथ अब नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि बाढ़ से किन-किन क्षेत्रों में कितनी क्षति हुई है।
सड़क और दूसरी संरचनाओं को नुकसान
बाढ़ के पानी और तेज बहाव के कारण कई जगहों पर सड़क और दूसरी सार्वजनिक संरचनाएं प्रभावित हुई हैं। कई इलाकों में कटाव की समस्या भी सामने आई है। बाढ़ का पानी कम होने के बाद क्षतिग्रस्त संरचनाओं का निरीक्षण किया जा रहा है। संबंधित विभागों की टीमें नुकसान का ब्योरा जुटा रही हैं। इसके आधार पर मरम्मत और पुनर्निर्माण की आवश्यकता तय की जाएगी।
बांध और तटबंधों की भी जांच
बाढ़ के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ने से तटबंधों पर दबाव बढ़ा। कई जगहों पर कटाव की स्थिति बनी। जल संसाधन विभाग की ओर से बांध और तटबंधों की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने बताया कि कई नदियों में पानी बढ़ने के कारण नुकसान हुआ है। विभाग की ओर से स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
अक्टूबर के पहले सप्ताह में केंद्र को रिपोर्ट
राज्य सरकार की योजना है कि बाढ़ से हुए नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट अक्टूबर के पहले सप्ताह में केंद्र सरकार को भेज दी जाए। इस रिपोर्ट में अलग-अलग विभागों से मिले नुकसान के आंकड़े शामिल किए जाएंगे। रिपोर्ट तैयार होने के बाद केंद्र से सहायता की मांग की जा सकती है। राज्य सरकार बाढ़ के बाद क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत और प्रभावित लोगों के लिए आगे की सहायता के लिए केंद्र से सहयोग चाहती है।
5000 करोड़ रुपये की जरूरत
रिपोर्ट में बाढ़ के बाद हुए नुकसान की भरपाई और क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत के लिए करीब 5000 करोड़ रुपये की जरूरत का अनुमान बताया गया है। इस राशि की जरूरत सड़क, पुल, तटबंध और अन्य बुनियादी ढांचे की मरम्मत के अलावा प्रभावित इलाकों में पुनर्निर्माण के काम के लिए बताई गई है।
गंगा का जलस्तर भी बढ़ा
बाढ़ के दौरान गंगा नदी के जलस्तर को लेकर भी चिंता रही। रिपोर्ट के अनुसार गंगा ने कई वर्षों के रिकॉर्ड को पार किया। नदी के बढ़े जलस्तर से आसपास के इलाकों में दबाव बढ़ा। भोजपुर के बड़हरा क्षेत्र में गंगा के कटाव से नुकसान की बात सामने आई है। भागलपुर के राघोपुर, छपरा और समस्तीपुर समेत अन्य क्षेत्रों में भी बाढ़ और कटाव का असर रहा।
576 पंचायतें प्रभावित
रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ से राज्य की 576 पंचायतें प्रभावित हुईं। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को घर, खेती, सड़क और आवागमन से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा। अब प्रशासन की ओर से नुकसान का आंकड़ा तैयार किया जा रहा है। पंचायत स्तर पर भी प्रभावित इलाकों की स्थिति का ब्योरा जुटाया जा रहा है।
नुकसान के आधार पर आगे की योजना
बाढ़ के बाद राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित क्षेत्रों को सामान्य स्थिति में लाना है। इसके लिए पहले नुकसान का सही आंकड़ा जरूरी है। अलग-अलग विभागों से रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार कुल नुकसान का आकलन करेगी। इसके बाद केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी। केंद्र से मिलने वाली सहायता के आधार पर आगे मरम्मत और पुनर्निर्माण के काम को गति दी जा सकती है।