BNT Desk: NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक और धांधली के आरोपों के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। सरकार ने मशहूर मैसेजिंग ऐप ‘टेलीग्राम’ पर अस्थायी रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद से देशभर में बहस छिड़ गई है, जहाँ एक तरफ टेलीग्राम ने इसे कोर्ट में चुनौती दी है, वहीं दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था।
टेलीग्राम पर बैन क्यों?
NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक की खबरें सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने पाया कि अपराधी टेलीग्राम ऐप का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग कर रहे थे। टेलीग्राम पर पहचान छिपाकर ‘पेपर लीक्ड’ जैसे चैनल बनाना बेहद आसान है, जिनमें लाखों लोग जुड़े होते हैं। इन चैनलों के जरिए न केवल गलत सूचनाएं फैलाई जा रही थीं, बल्कि पेपर लीक की अफवाहों से छात्रों को ठगा भी जा रहा था। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अनुसार, जब स्थिति हाथ से निकलने लगी और कोई विकल्प नहीं बचा, तब सरकार ने यह कड़ा निर्णय लिया।
‘मैसेज एडिटिंग’ फीचर पर क्यों भड़की सरकार?
टेलीग्राम पर मौजूद ‘मैसेज एडिटिंग’ फीचर परीक्षा माफियाओं के लिए सबसे बड़ा हथियार बन गया था। जालसाज पहले सामान्य मैसेज भेजते और परीक्षा समाप्त होने के बाद उन्हें एडिट करके असली प्रश्न-पत्र की PDF डाल देते थे। इसके बाद वे उस एडिटेड मैसेज का स्क्रीनशॉट लेकर सोशल मीडिया पर यह झूठा दावा करते थे कि “पेपर तो परीक्षा से पहले ही लीक हो गया था।” इसके अलावा, टेलीग्राम पर 2GB तक की बड़ी फाइलें बिना किसी रुकावट के शेयर की जा सकती हैं, जिसका फायदा उठाकर पेपर और अन्य गोपनीय दस्तावेज आसानी से वायरल कर दिए जाते थे।
टेलीग्राम बनाम वॉट्सएप: क्या है बड़ा अंतर?
कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि सिर्फ टेलीग्राम पर ही पाबंदी क्यों? इसके पीछे सुरक्षा और पहचान का बड़ा अंतर है। वॉट्सएप भारतीय नियमों का पालन करता है और वहां यूजर को ट्रैक करना काफी आसान है, क्योंकि वहां मोबाइल नंबर अनिवार्य है। इसके विपरीत, टेलीग्राम पर ‘यूजरनेम’ के जरिए पहचान छिपाई जा सकती है। साथ ही, टेलीग्राम पर असीमित लोगों का ग्रुप बनाया जा सकता है, जबकि वॉट्सएप में इसकी एक सीमा (1,024 सदस्य) है। वॉट्सएप में एआई (AI) आधारित निगरानी प्रणाली भी मजबूत है, जो संदिग्ध गतिविधियों को रोकने में मदद करती है।
टेलीग्राम का विरोध और कोर्ट में लड़ाई
टेलीग्राम के CEO ने सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। कंपनी का तर्क है कि इस बैन से उन अपराधियों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा जिन्होंने पेपर लीक किया है, क्योंकि वे दूसरे ऐप्स पर शिफ्ट हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस फैसले की सजा भारत के 15 करोड़ से ज्यादा आम टेलीग्राम यूजर्स को मिली है। फिलहाल, टेलीग्राम ने दिल्ली हाईकोर्ट में इस रोक को चुनौती दी है और कोर्ट ने मामले की सुनवाई पर सहमति दे दी है। गूगल और एप्पल ने भी सरकार के आदेश पर अपने प्ले स्टोर से टेलीग्राम को हटा दिया है।
क्या है NEET-UG री-एग्जाम की नई तैयारी?
3 मई 2026 को आयोजित हुई मूल परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद 12 मई को इसे रद्द कर दिया गया था। अब दोबारा होने वाली परीक्षा के लिए NTA ने कई बदलाव किए हैं ताकि धांधली की कोई गुंजाइश न बचे। नई गाइडलाइंस के अनुसार:
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परीक्षा का समय 180 मिनट से बढ़ाकर 195 मिनट कर दिया गया है।
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आंसर शीट में रफ वर्क के लिए अतिरिक्त जगह दी जाएगी।
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परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए सख्त निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
NEET का महत्व
NEET-UG भारत की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक है, जो 2013 से शुरू की गई थी। इसके जरिए देश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों (AIIMS और JIPMER सहित) में MBBS, BDS और नर्सिंग जैसे कोर्सेज में एडमिशन मिलता है। सरकार का कहना है कि यह परीक्षा लाखों छात्रों के भविष्य का आधार है, इसलिए इसकी पवित्रता बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
यह विवाद अब एक बड़ी कानूनी लड़ाई में बदल चुका है। जहाँ सरकार के लिए छात्र सुरक्षा प्राथमिकता है, वहीं टेलीग्राम अपनी प्लेटफॉर्म की निजता और पहुंच को लेकर लड़ रहा है। आने वाले दिनों में कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि डिजिटल युग में अपराधियों को रोकने के लिए सरकारें किस हद तक तकनीक पर नियंत्रण रख सकती हैं।