बिहार का दूसरा अंतरराष्ट्रीय एस्ट्रो टर्फ मैदान बनने से पहले ही विवादों में, उद्घाटन से पहले ही उखड़ा टर्फ

BiharNewsAuthor
6 Min Read

BNT Desk: बिहार की खेल प्रतिभाओं को विश्वस्तरीय मंच देने के दावे के साथ पटना में तैयार किया जा रहा अंतरराष्ट्रीय स्तर का नया हॉकी स्टेडियम उद्घाटन से पहले ही भ्रष्टाचार और बड़ी लापरवाही के आरोपों के घेरे में आ गया है। पटना के राजेंद्र नगर इलाके में बन रहा बिहार का यह दूसरा अंतरराष्ट्रीय एस्ट्रो टर्फ हॉकी ग्राउंड इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। दुःखद बात यह है कि यह चर्चा किसी बड़ी खेल उपलब्धि के लिए नहीं, बल्कि इसके निर्माण कार्य में सामने आई बेहद घटिया क्वालिटी और तकनीकी खामियों के कारण हो रही है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह आधुनिक मैदान अभी पूरी तरह बनकर तैयार भी नहीं हुआ है, लेकिन इसकी सिंथेटिक पिच (एस्ट्रो टर्फ) कई महत्वपूर्ण जगहों से अभी से उखड़ने लगी है। मैदान की सतह की आई तस्वीरों ने खेल प्रशासन की पोल खोलकर रख दी है।

पटना का राजेंद्र नगर और महत्वाकांक्षी खेल योजना

पटना के राजेंद्र नगर में इस अंतरराष्ट्रीय एस्ट्रो टर्फ हॉकी ग्राउंड का निर्माण राज्य सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी खेल परियोजनाओं में से एक माना जा रहा था। इसका मुख्य उद्देश्य बिहार के खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं देना था ताकि वे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खुद को ढाल सकें। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, इस हाई-टेक परियोजना का निर्माण कार्य साल 2024 में शुरू किया गया था। मैदान का आकार अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक लगभग 95 मीटर लंबा और 91 मीटर चौड़ा तय किया गया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए 7.96 करोड़ रुपये (करीब आठ करोड़ रुपये) का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है।

उद्घाटन से पहले ही बिखर गया ‘विश्वस्तरीय’ होने का दावा

इतने बड़े बजट के बावजूद, खेल प्रेमियों और स्थानीय जनता को तब बड़ा झटका लगा जब निर्माण कार्य के अंतिम चरण की कुछ तस्वीरें और वीडियो सामने आए। इन विजुअल्स में साफ देखा जा सकता है कि महंगे दामों पर बिछाई गई एस्ट्रो टर्फ कई बड़े हिस्सों से उखड़कर अलग हो चुकी है। मैदान की समतल सतह कई जगहों पर पूरी तरह क्षतिग्रस्त और उबड़-खाबड़ दिखाई दे रही है। इस नजारे ने सरकार के ‘विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर’ के दावों की हवा निकाल दी है। स्थानीय लोगों और खेल विशेषज्ञों का कहना है कि जब बिना एक भी मैच खेले मैदान का यह हाल है, तो भविष्य में जब खिलाड़ी इस पर दौड़ेंगे और खेलेंगे, तब इसकी मजबूती और उनकी सुरक्षा का क्या होगा?

तकनीकी मानकों की अनदेखी बनी वजह

खेल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी एस्ट्रो टर्फ हॉकी ग्राउंड का निर्माण एक बेहद जटिल और संवेदनशील तकनीकी प्रक्रिया है। इसके निर्माण में मुख्य रूप से चार बातों का सख्त ख्याल रखा जाता है:

  1. मजबूत बेस लेयर: टर्फ के नीचे की कंक्रीट या डामर की परत पूरी तरह ठोस होनी चाहिए।

  2. एडवांस्ड ड्रेनेज सिस्टम: पानी की निकासी की व्यवस्था बेहतरीन हो, ताकि नमी टर्फ के गोंद को खराब न करे।

  3. सतह की समतलता: मैदान में एक मिलीमीटर का भी असंतुलन नहीं होना चाहिए।

  4. उच्च गुणवत्ता का टर्फ व ग्लू: अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रमाणित मैटेरियल का ही इस्तेमाल होना अनिवार्य है।

पटना के इस मैदान की स्थिति देखकर साफ पता चलता है कि इनमें से किसी न किसी बड़े स्तर पर मानकों की भारी अनदेखी की गई है, जिससे करोड़ों की टर्फ बर्बाद हो गई।

विपक्ष हमलावर, खेल जगत ने की जांच की मांग

इस मामले के सामने आने के बाद बिहार में सियासी पारा भी चढ़ गया है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लेते हुए सरकार की कार्यशैली पर निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि जनता के टैक्स के पैसे से बनने वाली योजनाओं में इतनी बड़ी धांधली बिना प्रशासनिक मिलीभगत के संभव नहीं है। पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना पूरी तरह सरकार की जिम्मेदारी थी, जिसमें वह विफल रही है।

दूसरी ओर, बिहार के खेल संघों, पूर्व खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने सामूहिक रूप से मुख्यमंत्री और खेल मंत्री से इस मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच (Technical Inquiry) कराने की मांग की है। उनकी मांग है कि जो भी ठेकेदार, इंजीनियर या अधिकारी इस घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार हैं, उन पर तुरंत मुकदमा दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

खिलाड़ियों के सपनों पर भ्रष्टाचार का ग्रहण?

अब हर किसी की निगाहें खेल विभाग और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। सवाल सिर्फ एक मैदान के टूटने का नहीं है, बल्कि उन हजारों युवा खिलाड़ियों के सपनों और भरोसे का है, जो इस उम्मीद में दिन-रात पसीना बहा रहे हैं कि उन्हें भी अपने राज्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिलेंगी। देखना होगा कि क्या सरकार इस गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच कराकर मैदान को दोबारा पूरी मजबूती के साथ दुरुस्त करवाती है, या फिर यह योजना भी फाइलों और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर रह जाएगी।

Share This Article