बिहार: टेंडर घोटाला से ‘सिंडिकेट किंग’ बने रिशु श्री का खुलासा, SVU ने 3 बड़े अफसरों को किया गिरफ्तार

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार की नौकरशाही और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक बड़े भ्रष्टाचार के नेटवर्क का पर्फाश होने से हड़कंप मचा हुआ है। राज्य के चर्चित टेंडर घोटाले में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए एक बहुत बड़ी कार्रवाई की है।

इस घोटाले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे चौंकाने वाले सच सामने आ रहे हैं। इस मामले में SVU ने बिहार सरकार के तीन बेहद रसूखदार और बड़े अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन अधिकारियों के पास से करोड़ों रुपए की काली कमाई और बेहिसाब नकदी बरामद की गई है। लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे हैरान करने वाला केंद्र बिंदु ‘रिशु श्री’ नाम का एक बिचौलिया है, जिसने कभी कबाड़ के ठेकेदार के रूप में शुरुआत की थी।

तीन बड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी, 11.53 करोड़ की नकदी और संपत्ति जब्त

स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) द्वारा की गई इस बड़ी कार्रवाई में जिन तीन बड़े चेहरों को दबोचा गया है, वे सरकारी विभागों में बेहद ऊंचे पदों पर बैठ चुके हैं:

  1. तारिणी दास: भवन निर्माण विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर।

  2. मुमुक्षु चौधरी: वित्त विभाग के पूर्व संयुक्त सचिव (Joint Secretary)।

  3. उमेश कुमार सिंह: बुडको (BUIDCO) के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर।

जांच एजेंसी के मुताबिक, इन तीनों अधिकारियों के ठिकानों से कुल 11 करोड़ 53 लाख रुपए की संदिग्ध संपत्ति और भारी नकदी बरामद हुई थी।

अफसरों की काली कमाई का गणित

  • पूर्व चीफ इंजीनियर तारिणी दास: भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी रकम इनके ठिकाने से मिली। इनके पास से अकेले 8.53 करोड़ रुपए की संदिग्ध संपत्ति का पता चला।

  • पूर्व संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी: इनके ठिकानों से 2 करोड़ रुपए की बेहिसाब संपत्ति जब्त की गई।

  • इंजीनियर उमेश कुमार सिंह: इनके पास से करीब 1 करोड़ रुपए की अवैध कमाई बरामद हुई।

    इन सभी अधिकारियों को टेंडर घोटाले में मिलीभगत और आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के संगीन आरोपों में गिरफ्तार किया गया है।

 

कबाड़ ठेकेदार से ‘टेंडर किंग’ बना रिशु श्री, ऐसे फैलाया जाला

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर रिशु श्री कौन है? वह न तो कोई आईएएस (IAS) अधिकारी है और न ही देश का कोई नामी उद्योगपति। वह मूल रूप से बिहार के सारण (छपरा) जिले का रहने वाला एक साधारण व्यक्ति है, जो शुरुआत में कबाड़ (Scrap) के छोटे-मोटे ठेके लिया करता था।

टेंडर की शर्तों में फेरबदल का खेल

धीरे-धीरे रिशुश्री ने पटना के सचिवालय और बड़े सरकारी महकमों में ऐसी पैठ बनाई कि बड़े-बड़े नामी ठेकेदार और आला अधिकारी उसके इशारों पर नाचने लगे। जांच एजेंसियों के हाथ लगे सबूतों के अनुसार, रिशुश्री सरकारी विभागों से निकलने वाले बड़े टेंडरों की बेहद गोपनीय और सीक्रेट जानकारी पहले ही लीक करवा लेता था। इसके बाद वह भ्रष्ट अधिकारियों से मिलकर टेंडर की शर्तों को इस तरह बदलवा देता था, जिससे उसके पसंदीदा ठेकेदारों को ही ठेका मिले। इस खेल के बदले करोड़ों रुपए का कमीशन का नेटवर्क चलता था।

ED का बड़ा खुलासा: विदेशों तक फैले थे तार, अफसरों के पैसे करता था मैनेज

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे और भी ज्यादा गंभीर हैं। ED के अनुसार, रिशुश्री सिर्फ टेंडर दिलाने तक सीमित नहीं था, बल्कि वह भ्रष्ट अधिकारियों की काली कमाई को सफेद करने का काम भी संभालता था।

वह कुछ बेहद प्रभावशाली अधिकारियों की अघोषित संपत्तियों और निवेश (Investments) को मैनेज करने वाला मुख्य मोहरा था। जांच में यह भी सुराग मिले हैं कि रिशुश्री का यह नेटवर्क सिर्फ बिहार या भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि फ्रांस, यूएई (UAE) और स्विट्जरलैंड जैसे विदेशों तक फैला हुआ था। वहां शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) के जरिए पैसे का हेरफेर किया जा रहा था। हालांकि, इन विदेशी दौरों और संदिग्ध निवेशों की अंतिम पुष्टि अदालत में जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल में भी थी गहरी पैठ

जांच रिपोर्टों से यह भी संकेत मिले हैं कि बिहार सचिवालय के कई महत्वपूर्ण विभागों में रिशुश्री का दबदबा इस कदर बढ़ चुका था कि करोड़ों-अरबों के टेंडरों की फाइलों पर अधिकारियों से ज्यादा उसकी राय मायने रखती थी।

इतना ही नहीं, जांच एजेंसियों को संदेह है कि बिहार के मलाईदार पदों पर अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग (Transfer-Posting) के खेल में भी रिशुश्री का सिंडिकेट पूरी तरह सक्रिय था। यही वजह है कि अब यह जांच सिर्फ एक टेंडर घोटाले तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अब भ्रष्टाचार के इस पूरे संगठित सिंडिकेट (Organized Crime Network) को उखाड़ने में जुट गई हैं।

अब तक की बड़ी कार्रवाई और गिरफ्तारियां

इस मामले में अब तक ताबड़तोड़ कार्रवाइयां की जा चुकी हैं:

  • 27 मई 2026 को SVU ने पटना के मीठापुर इलाके में स्थित ठिकाने पर छापा मारकर मुख्य सरगना रिशुश्री को गिरफ्तार किया था।

  • इससे पहले साल 2025 और 2026 के शुरुआती महीनों में ED ने पटना, दिल्ली, सूरत, अहमदाबाद और गुरुग्राम समेत देश के कई बड़े शहरों में छापेमारी की थी।

  • इन छापों के दौरान भारी मात्रा में डिजिटल डिवाइस, सोने-चांदी के जेवरात, गुप्त दस्तावेज और नकदी बरामद की जा चुकी है। रिशुश्री और तीन अधिकारियों समेत इस मामले में अब तक 5 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

 

सबसे बड़ा सुलगता सवाल

यह पूरा मामला सिर्फ कुछ करोड़ रुपयों या तीन अधिकारियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक मामूली बैकग्राउंड से आने वाला बिचौलिया आखिर इतने सालों तक पूरे सरकारी सिस्टम, ट्रांसफर-पोस्टिंग और बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स को कैसे प्रभावित करता रहा? क्या उसे किसी बड़े राजनीतिक दल या किसी बेहद ताकतवर राजनेता का संरक्षण प्राप्त था?

फिलहाल SVU और ED की संयुक्त जांच बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। बिहार की जनता अब यह देखना चाहती है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले की आंच नौकरशाही के गलियारों से निकलकर राजनीति के किन बड़े नामों तक पहुंचती है और इस पूरे सिंडिकेट का असली ‘आका’ कौन है।

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