BNT Desk: बिहार के खगड़िया जिले के मोरकाही थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सबलपुर गांव में पुलिस की छापेमारी के दौरान डर कर भाग रहे एक युवक की नदी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने शव को मोरकाही थाने लाकर जमकर हंगामा किया और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की। हंगामे के दौरान स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस और जनता के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की तक की नौबत आ गई।
क्या है पूरा मामला?
मृतक युवक की पहचान मोरकाही थाना क्षेत्र के सबलपुर गांव निवासी शत्रुघ्न पासवान के 26 वर्षीय पुत्र सौरभ कुमार के रूप में हुई है। स्थानीय सूत्रों और चर्चाओं के अनुसार, पुलिस किसी पुराने मामले को लेकर काफी समय से सौरभ कुमार की तलाश कर रही थी। शुक्रवार की देर रात पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि सौरभ अपने घर पर मौजूद है। इस सूचना के आधार पर मोरकाही थाने की पुलिस ने देर रात उसके घर पर अचानक छापेमारी कर दी।
पुलिस को देखते ही नदी में लगाई छलांग
बताया जाता है कि देर रात अचानक पुलिस को अपने घर पर देखकर सौरभ घबरा गया और बचने के लिए घर के पिछले हिस्से से भागने लगा। पुलिस के जवानों ने उसे पकड़ने के लिए उसका पीछा किया। खुद को घिरता देख और पुलिस के डर से भागने के दौरान सौरभ पास ही स्थित मालती धार नदी में कूद गया।
अंधेरा होने के कारण वह नदी के गहरे पानी में समा गया। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने काफी मशक्कत की और भारी खोजबीन के बाद उसे नदी से बाहर निकाला। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और अत्यधिक पानी भर जाने के कारण दम घुटने से उसकी मौत हो चुकी थी।
शव लेकर थाने पहुंचे ग्रामीण, हुआ भारी हंगामा
युवक की मौत की खबर फैलते ही पूरे सबलपुर गांव में मातमी सन्नाटा और आक्रोश फैल गया। सुबह होते ही परिजन और सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण युवक के शव को लेकर सीधे मोरकाही थाना पहुंच गए। ग्रामीणों ने पुलिस पर प्रताड़ना और लापरवाही का आरोप लगाते हुए थाने का घेराव कर दिया और जमकर नारेबाजी शुरू कर दी।
इस हंगामे के दौरान माहौल बेहद गरमा गया। उग्र भीड़ और पुलिस के बीच तीखी बहस होने लगी। देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि प्रदर्शनकारियों ने मोरकाही थानाध्यक्ष अन्तिमा कुमारी के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की और अभद्र व्यवहार किया।
थानाध्यक्ष पर पिस्टल निकालने का आरोप, बढ़ा तनाव
प्रत्यक्षदर्शियों और थाने पर मौजूद लोगों के अनुसार, जब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर होने लगी और भीड़ पुलिस पर हावी होने लगी, तो थानाध्यक्ष अन्तिमा कुमारी ने आत्मरक्षार्थ और भीड़ को पीछे धकेलने के लिए अपनी सर्विस पिस्टल निकाल ली। थानाध्यक्ष द्वारा पिस्टल निकाले जाने से वहां मौजूद ग्रामीण और अधिक भड़क गए और माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया। लोग पुलिस की इस कार्रवाई से बेहद नाराज हो गए और थाने के बाहर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने लगे।
एसपी के निर्देश पर पहुंचे वरिष्ठ अधिकारी, दिया आश्वासन
थाने में भारी हंगामे और तनाव की सूचना मिलते ही खगड़िया के पुलिस अधीक्षक (SP) राकेश कुमार ने मामले को गंभीरता से लिया। उनके निर्देश पर तुरंत जिले के कई वरीय पुलिस पदाधिकारी अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मोरकाही थाना पहुंचे।
वरिष्ठ अधिकारियों ने आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराने का प्रयास किया। काफी देर तक चली बातचीत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया जा सका। पीड़ित परिवार ने पुलिस अधिकारियों के सामने मुख्य रूप से दो मांगें रखी हैं:
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मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी थानाध्यक्ष और पुलिसकर्मियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
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पीड़ित परिवार को सरकार की तरफ से उचित मुआवजा दिया जाए।
जांच और आगे की कार्रवाई जारी
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने परिजनों को आश्वस्त किया है कि मामले की पूरी पारदर्शिता के साथ जांच की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कानूनी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।