सहरसा: सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम रूम में घुसे आवारा कुत्ते, जांच के लिए रखे इंसानी अंगों को किया क्षतिग्रस्त, सिविल सर्जन ने दिए जांच के आदेश

BiharNewsAuthor
6 Min Read

BNT Desk: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी अस्पतालों की संवेदनशीलता को कठघरे में खड़ा करने वाला एक बेहद हैरान और विचलित करने वाला मामला सहरसा जिले से सामने आया है। सहरसा सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस (शवगृह) का एक 38 सेकंड का वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने न सिर्फ अस्पताल प्रबंधन बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की पोल खोलकर रख दी है। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दो आवारा कुत्ते पोस्टमार्टम हाउस के भीतर आसानी से दाखिल हो गए हैं और वहां प्लास्टिक के डिब्बे में जांच के लिए सुरक्षित रखे गए मानव अंगों (विसरा) को अपने दांतों से बेरहमी से नोच रहे हैं और उसे पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर रहे हैं।

क्या होता है विसरा और क्यों है यह सुरक्षा में बड़ी चूक?

कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत, जब किसी संदिग्ध परिस्थिति या आपराधिक मामले में शव का पोस्टमार्टम किया जाता है, तो मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए शव के कुछ मुख्य आंतरिक अंगों (जैसे लीवर, तिल्ली, या पेट के अंश) के नमूने सुरक्षित रख लिए जाते हैं। इसे ‘विसरा’ (Viscera) कहा जाता है। इन अंगों को केमिकल युक्त प्लास्टिक के डिब्बों में सील करके रखा जाता है ताकि बाद में फॉरेंसिक लैब (FSL) में इनकी गहन जांच की जा सके और इसी जांच के आधार पर अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार होती है, जो अदालत में सबसे बड़ा सबूत मानी जाती है।

लेकिन सहरसा सदर अस्पताल की इस घोर लापरवाही ने इस पूरी कानूनी प्रक्रिया को ही दांव पर लगा दिया है। जब सुरक्षित रखे गए सैंपल ही आवारा पशुओं का निवाला बन जाएंगे, तो मौत की गुत्थी कैसे सुलझेगी और पीड़ित परिवार को न्याय कैसे मिलेगा?

सुरक्षा के दावों की खुली पोल

इस विचलित करने वाले वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय जनता और मरीजों के परिजनों में भारी आक्रोश है। आमतौर पर अस्पताल प्रशासन द्वारा यह दावा किया जाता है कि पोस्टमार्टम हाउस एक बेहद संवेदनशील और सुरक्षित क्षेत्र है, जिसे हमेशा पूरी तरह लॉक (बंद) करके रखा जाता है। ऐसे में स्थानीय लोग अब यह बड़ा सवाल उठा रहे हैं कि आखिर चौबीसों घंटे बंद रहने वाले इस कमरे का दरवाजा खुला किसने छोड़ा? और अगर दरवाजा बंद था, तो दो आवारा कुत्ते बिना किसी रोक-टोक के अंदर कैसे पहुंच गए?

लोगों का आरोप है कि सहरसा सदर अस्पताल का पोस्टमार्टम हाउस लंबे समय से बदहाली और सुरक्षा खामियों से जूझ रहा है। वहां न तो कोई सुरक्षा गार्ड तैनात रहता है और न ही स्वच्छता का कोई ख्याल रखा जाता है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानकर भी आंखें मूंदे बैठे हैं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर खड़े हुए गंभीर सवाल

इस शर्मनाक घटना ने अब एक कानूनी संकट भी खड़ा कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जब अस्पताल के भीतर ही जांच के लिए रखे गए मानव अंग सुरक्षित नहीं हैं, तो भविष्य में आने वाली पोस्टमार्टम रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर अदालत और आम जनता कैसे भरोसा करेगी? विसरा के क्षतिग्रस्त होने से कई गंभीर आपराधिक मामलों की जांच प्रभावित हो सकती है, जिससे अपराधियों को बचने का मौका मिल सकता है।

सिविल सर्जन का बयान: जांच टीम गठित, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

मामले की गंभीरता और सोशल मीडिया पर बढ़ते जन आक्रोश को देखते हुए सोमवार रात सहरसा के सिविल सर्जन से फोन पर संपर्क किया गया। सिविल सर्जन ने इस घटना पर दुख और चिंता व्यक्त करते हुए कहा:

“यह मामला बेहद गंभीर है और यह हमारे संज्ञान में आ चुका है। पोस्टमार्टम हाउस जैसी संवेदनशील जगह पर आवारा पशुओं का दाखिल होना सुरक्षा में एक बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जा रही है कि आखिर कुत्ते अंदर कैसे घुसे और उस समय वहां तैनात स्वास्थ्य कर्मी कहां थे। जो भी कर्मचारी या अधिकारी इस लापरवाही के जिम्मेदार पाए जाएंगे, उन पर सख्त से सख्त दंडात्मक और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।”

कब सुधरेगी स्वास्थ्य व्यवस्था?

सहरसा की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कागजों पर दुरुस्त दिखने वाली स्वास्थ्य व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी लाचार है। इंसान के मरने के बाद भी उसके अंगों के साथ इस तरह का अमानवीय और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार सिस्टम की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

Share This Article