BNT Desk: बिहार विधानसभा चुनाव में उम्मीद के मुताबिक परिणाम न मिलने और करारी शिकस्त झेलने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि प्रशांत किशोर (PK) की पार्टी ‘जन सुराज’ का वजूद अब धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा। लोग कयास लगा रहे थे कि इस हार के बाद जन सुराज का नाम इतिहास के पन्नों में खो जाएगा। लेकिन चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने यह साबित कर दिया है कि वह इतनी आसानी से हार मानने वाले नहीं हैं।
बिहार में व्यवस्था परिवर्तन और बदलाव का सपना देखने वाले प्रशांत किशोर अभी सोए नहीं हैं। अपनी पार्टी को दोबारा पुनर्जीवित करने और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने के लिए उन्होंने एक बेहद गुप्त और बड़ा ‘महाप्लान’ तैयार किया है। प्रशांत किशोर के बिहार की सक्रिय राजनीति का अगला पड़ाव अब राजधानी पटना के नजदीक स्थित बिहटा का ‘अमहारा गांव’ होने जा रहा है। यहीं से पीके अपनी आगामी राजनीति की पूरी रूपरेखा और नई चक्रव्यूह रचना तैयार करेंगे।
IIT पटना के पास 20 बीघे में तैयार हो रहा है नया ‘कमांड सेंटर’
प्रशांत किशोर का यह नया ठिकाना कोई साधारण दफ्तर नहीं, बल्कि एक बेहद विशाल और योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया जा रहा परिसर है। बिहटा के अमहारा गांव में, जो कि देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT पटना से बिल्कुल सटा हुआ है, प्रशांत किशोर ने लगभग 20 बीघा जमीन लीज (पट्टे) पर ली है।
इस विशाल भूभाग पर इन दिनों युद्धस्तर पर निर्माण कार्य चल रहा है। शहर के कोलाहल और प्रदूषण से दूर, आम के खूबसूरत और घने बगीचे के बीच प्रशांत किशोर का एक आधुनिक ‘आश्रम’ आकार ले रहा है। इस परिसर को पूरी तरह से इको-फ्रेंडली (पर्यावरण के अनुकूल) और रणनीतिक जरूरतों के हिसाब से डिजाइन किया जा रहा है।
कार्यकर्ताओं के लिए बनेंगे टेंट हाउस
प्रशांत किशोर ने इस नए और बेहद खास ठिकाने का नाम ‘बिहार नव निर्माण आश्रम’ रखा है। इस नाम से ही साफ जाहिर होता है कि पीके यहां से बिहार के नवनिर्माण की एक नई लड़ाई शुरू करने जा रहे हैं।
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रहने के लिए विशेष टेंट: आम के बगीचे की छांव में कार्यकर्ताओं और नेताओं के रहने के लिए कपड़े और आधुनिक मटीरियल से बने छोटे-छोटे वाटरप्रूफ टेंट हाउस तैयार कराए जा रहे हैं।
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सादा जीवन, उच्च विचार की थीम: इस आश्रम का ढांचा कुछ इस तरह रखा गया है जिससे यहां आने वाले लोगों को जमीन से जुड़े होने का अहसास हो, लेकिन साथ ही तकनीक और रणनीति के मामले में यह किसी कॉर्पोरेट ऑफिस से कम न लगे।
29 मई से सजेगा मंच
बिहार नव निर्माण आश्रम में चल रहा काम अब अपने अंतिम चरण में है। मिली जानकारी के अनुसार, इसी महीने की 29 मई से प्रशांत किशोर इस नए ठिकाने से अपनी औपचारिक राजनीतिक गतिविधियों की शुरुआत कर देंगे। 29 मई को ही वह पहली बार इस आश्रम में मीडिया के कैमरों के सामने आएंगे और बिहार के ज्वलंत स्थानीय मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखेंगे। माना जा रहा है कि इसी दिन वह अपनी पार्टी ‘जन सुराज’ के अगले कदम का भी आधिकारिक ऐलान कर सकते हैं।
2000 लोगों के रहने और ट्रेनिंग की पूरी व्यवस्था
बिहटा का यह ‘बिहार नव निर्माण आश्रम’ जन सुराज के लिए एक बड़े ट्रेनिंग सेंटर (प्रशिक्षण शिविर) के रूप में काम करेगा।
आश्रम की क्षमता और सुविधाएं: इस 20 बीघे के परिसर में एक साथ लगभग 2000 लोगों के रहने, सोने और ठहरने का पुख्ता इंतजाम किया जा रहा है। जन सुराज से जुड़े बिहार भर के जमीनी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को बैच के हिसाब से यहां बुलाया जाएगा। उनके रहने से लेकर सुबह के नाश्ते और दोनों वक्त के खाने-पीने की पूरी व्यवस्था इसी परिसर के भीतर होगी। यहां कार्यकर्ताओं को चुनावी प्रबंधन, सोशल मीडिया हैंडलिंग, जनता से संवाद करने के तरीके और राजनीतिक मुद्दों की गहरी समझ विकसित करने का कड़ा प्रशिक्षण दिया जाएगा।
अगले 5 साल का ‘फिक्स प्लान’
प्रशांत किशोर के करीबियों का कहना है कि चुनाव में मिली हार को पीके ने एक सबक की तरह लिया है। वह अपनी कमियों को सुधार कर नए सिरे से संगठन को मजबूत करना चाहते हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो प्रशांत किशोर ने अगले पांच साल यानी आगामी चुनावों तक का अपना पूरा ठिकाना अब यहीं तय कर लिया है।
अब वह पटना के आलीशान होटलों या दफ्तरों के बजाय बिहटा के इसी ग्रामीण इलाके में रहकर सीधे जनता और अपने कैडर से जुड़े रहेंगे। इस नई शुरुआत से बिहार की राजनीति में एक बार फिर से गर्माहट आने की उम्मीद है। अब देखना दिलचस्प होगा कि बिहटा के आम के बगीचे से निकलने वाली जन सुराज की यह नई नीति बिहार की मुख्यधारा की राजनीति में कितना बड़ा उलटफेर कर पाती है।