BNT Desk: बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल इस समय बेहद आक्रामक तेवर में नजर आ रहे हैं। विभाग की कमान संभालते ही उन्होंने साफ कर दिया है कि अब पुराने ढर्रे पर काम नहीं चलेगा। भ्रष्टाचार और फाइलों की पेंडेंसी को लेकर चर्चित रहने वाले इस विभाग में अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है। मंत्री ने अधिकारियों को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि वे अपनी कार्यशैली सुधार लें, अन्यथा अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें।
अधिकारियों को अंतिम चेतावनी
दिलीप जायसवाल का एक ताजा बयान राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में चेताते हुए कहा:
“मुझे ज्यादा बोलने की आवश्यकता ना पड़े.. वरना कहर ढहेगा।”
मंत्री का यह बयान उन अधिकारियों के लिए एक बड़ा संकेत है जो जनता के काम में टालमटोल करते हैं या भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बार-बार निर्देश देने में विश्वास नहीं रखते, बल्कि सीधी कार्रवाई पर यकीन करते हैं। सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए उनका यह ‘कहर’ उन लोगों पर बरसेगा जो गलत तरीके से सरकारी तंत्र को प्रभावित कर रहे हैं।
चुनौती को अवसर में बदलने का संकल्प
राजस्व विभाग बिहार के सबसे चुनौतीपूर्ण विभागों में से एक माना जाता है। जमीन विवाद, दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) में देरी और भ्रष्टाचार यहाँ की मुख्य समस्याएं रही हैं। मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि वे इन तमाम चुनौतियों को अवसर में बदलेंगे। उनका लक्ष्य विभाग की छवि सुधारना और आम आदमी को होने वाली परेशानियों को जड़ से खत्म करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जो काम महीनों से लंबित हैं, उन्हें समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए।
बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी तय
अक्सर देखा जाता है कि छोटे कर्मचारियों पर तो गाज गिरती है, लेकिन बड़े अधिकारी बच निकलते हैं। मंत्री जायसवाल ने इसे बदलने की बात कही है। उन्होंने कहा कि बड़े अधिकारियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाना उनकी प्राथमिकता है। यदि किसी जिले या प्रखंड में जनता परेशान होती है, तो उसके लिए वहां के शीर्ष अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। सिस्टम को ऊपर से नीचे तक दुरुस्त करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
भू-माफियाओं का खेल खत्म
बिहार में जमीन विवाद का एक बड़ा कारण कागजों की हेराफेरी या रिकॉर्ड गायब कर देना रहा है। इस पर मंत्री ने बहुत भरोसा जताते हुए कहा कि अब वह दौर बीत चुका है।
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डिजिटल डेटा: आज सरकार के पास जमीन का सारा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध है।
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कागज फाड़ने का डर खत्म: मंत्री ने भू-माफियाओं को चुनौती देते हुए कहा कि यदि कोई माफिया असली कागज चोरी कर ले या उसे फाड़ भी दे, तो भी कोई दिक्कत नहीं है। सर्वर पर मौजूद डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर असली मालिक का हक सुरक्षित रहेगा।
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पारदर्शिता: ऑनलाइन सिस्टम होने से अब बिचौलियों और माफियाओं की भूमिका पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
सिस्टम सुधार के लिए कड़े निर्देश
मंत्री ने कल ही विभाग के आला अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की और उन्हें स्पष्ट रोडमैप थमा दिया है। उन्होंने कहा कि सिस्टम में गलत करने वाले लोगों के लिए अब विभाग में कोई जगह नहीं है। गलत करने वाले अधिकारियों और माफियाओं को सीधे जेल भेजा जाएगा। मंत्री ने साफ कहा कि वे किसी भी तरह के राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में नहीं आने वाले हैं और जनता का हित उनके लिए सर्वोपरि है।
जनता के लिए राहत की उम्मीद
दिलीप जायसवाल के इस कड़े रुख से बिहार की जनता में एक नई उम्मीद जगी है। जमीन से जुड़े विवाद बिहार में अपराध का भी एक बड़ा कारण बनते हैं। यदि राजस्व विभाग पारदर्शी और त्वरित तरीके से काम करना शुरू कर देता है, तो इससे न केवल अदालतों का बोझ कम होगा, बल्कि सामाजिक शांति भी बहाल होगी।
कथनी नहीं, अब करनी का वक्त
मंत्री दिलीप जायसवाल का “कहर ढहाने” वाला बयान यह दर्शाता है कि वे विभाग में गहरी सफाई के मूड में हैं। अधिकारियों को दिए गए निर्देश और भू-माफियाओं के खिलाफ उनकी यह ललकार अगर धरातल पर उतरती है, तो बिहार के राजस्व विभाग की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मंत्री के इस कड़े रुख का असर आने वाले दिनों में प्रखंड (ब्लॉक) स्तर के कार्यालयों में कितना दिखाई देता है।