मेलबर्न से पटना: पिता की तलाश में हजारों मील दूर से आया बेटा, जिस बस की सीट पर पिता बैठे थे, उसी पर बैठकर पहुंचा शहर

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: रिश्तों की डोर कितनी मजबूत होती है, इसकी एक भावुक मिसाल इन दिनों पटना की सड़कों पर देखने को मिल रही है। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में एक क्लब चलाने वाला बेटा, अपने लापता पिता की तलाश में हजारों किलोमीटर का सफर तय कर बिहार की राजधानी पहुंचा है। आंखों में आंसू और हाथ में पिता की तस्वीर लिए जयराम गिरी पटना के हर उस कोने को खंगाल रहे हैं, जहां उनके पिता के होने की जरा भी गुंजाइश हो सकती है।

कौन हैं लापता राजकुमार गिरी?

लापता राजकुमार गिरी मूल रूप से नेपाल के रहने वाले हैं और पेशे से एक प्रतिष्ठित वकील हैं। उनके तीन बेटे हैं और तीनों ही विदेश में रहते हैं। जयराम गिरी, जो मेलबर्न में बस चुके हैं, अपने पिता के बेहद करीब हैं। उनके बीच दिन में कम से कम तीन बार बातचीत होती थी। राजकुमार गिरी धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं और अक्सर मंदिरों के दर्शन के लिए यात्राएं करते रहते हैं।

विराटनगर से पटना के सफर में हुए ओझल

जयराम ने बताया कि उनके पिता बीते गुरुवार को नेपाल के विराटनगर से बस में सवार होकर पटना के लिए निकले थे। नेपाल पुलिस द्वारा खंगाले गए सीसीटीवी फुटेज में इस बात की पुष्टि हुई है कि वे बस में बैठे थे। लेकिन पटना पहुंचने के बाद से उनका मोबाइल फोन बंद हो गया और परिवार से संपर्क टूट गया। जब कई घंटों तक बात नहीं हुई, तो मेलबर्न में बैठे जयराम का दिल घबराने लगा। वे तुरंत काठमांडू पहुंचे और वहां से विराटनगर होते हुए पटना आए।

पिता की उसी सीट पर बैठकर आए जयराम

एक बेटे की बेबसी और लगाव का सबसे मार्मिक पहलू तब दिखा जब जयराम ने बताया कि वे नेपाल से पटना उसी बस की उसी सीट (नंबर) पर बैठकर आए, जिस पर उनके पिता बैठकर निकले थे। जयराम को उम्मीद थी कि शायद उस सीट या बस के स्टाफ से उन्हें कोई सुराग मिल जाए। उन्होंने सफर के दौरान हर उस एहसास को महसूस करने की कोशिश की, जिससे वे अपने पिता तक पहुंच सकें।

पटना पुलिस से मदद की गुहार और सीसीटीवी की तलाश

पटना पहुंचते ही जयराम सीधे गांधी मैदान थाना पहुंचे। पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज कर ली है और कंट्रोल रूम को सीसीटीवी फुटेज खंगालने के लिए पत्र दिया है। जयराम अब खुद गांधी मैदान स्थित बस स्टैंड और आसपास के इलाकों में अपने पिता की फोटो लेकर लोगों से पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस ने उन्हें शहर भर में लापता होने के पोस्टर चिपकाने की सलाह दी है।

‘मेरे पिता मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं’

ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान जयराम कई बार फफक कर रो पड़े। उन्होंने रुंधे हुए गले से कहा, “मेरे पिता का किसी से कोई झगड़ा नहीं है। वे बहुत सरल इंसान हैं। वे न तो सोना-चांदी पहनते हैं और न ही किसी राजनीतिक दल से जुड़े हैं। उनके पास सिर्फ कपड़ों का एक बैग था।” जयराम को डर है कि पटना उनके पिता के लिए अनजान शहर था, कहीं वे रास्ता भटक कर किसी परेशानी में न पड़ गए हों।

अनहोनी का डर और उम्मीद की आखिरी किरण

करीब एक सप्ताह बीत चुका है और राजकुमार गिरी का कोई पता नहीं चला है। जयराम कहते हैं कि कभी-कभी मन में बहुत बुरे ख्याल आते हैं, लेकिन फिर वे खुद को संभालते हैं। वे पटना के अलग-अलग मंदिरों और धर्मशालाओं में भी भटक रहे हैं, क्योंकि उनके पिता को धार्मिक स्थलों पर जाने का बहुत शौक है।

मेलबर्न की सुख-सुविधाएं छोड़कर पटना की तपती धूप और धूल भरी सड़कों पर अपने पिता की तस्वीर लिए घूमते जयराम की यह कोशिश हर किसी की आंखें नम कर रही है। एक बेटा अपने ‘बेस्ट फ्रेंड’ (पिता) को वापस पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

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