BNT Desk: बिहार की राजनीति के चर्चित चेहरे और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता रीतलाल यादव को कानूनी मोर्चे पर एक बार फिर बड़ी नाकामी हाथ लगी है। पटना हाईकोर्ट ने रीतलाल यादव की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने भागलपुर जेल से स्थानांतरण (Transfer) की गुहार लगाई थी। अदालत के इस फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि रीतलाल यादव को आने वाले समय में भागलपुर के विशेष केंद्रीय कारागार में ही अपनी सजा या न्यायिक हिरासत काटनी होगी।
क्या था पूरा मामला?
बाहुबली नेता रीतलाल यादव को सुरक्षा और विधि-व्यवस्था (Law and Order) के कारणों का हवाला देते हुए पटना की बेऊर जेल से हटाकर भागलपुर की विशेष केंद्रीय कारा स्थानांतरित किया गया था। इस स्थानांतरण के खिलाफ रीतलाल यादव ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी मुख्य आपत्ति 30 अक्टूबर 2025 को जारी उस आदेश पर थी, जिसके तहत उनके ट्रांसफर की अवधि को छह महीने के लिए और बढ़ा दिया गया था।
याचिका में दी गई दलीलें
रीतलाल यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव कुमार वर्मा ने कोर्ट में दलील पेश की। उनका तर्क था कि जेल बदलने का आदेश कानूनन सही नहीं है क्योंकि:
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अधिकार क्षेत्र का सवाल: बिहार जेल मैनुअल 2012 और कैदी अधिनियम के अनुसार, किसी कैदी के स्थानांतरण का अधिकार केवल महानिरीक्षक (IG) के पास है।
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हस्ताक्षर पर आपत्ति: रीतलाल के वकीलों का कहना था कि यह आदेश सहायक महानिरीक्षक (AIG) द्वारा जारी किया गया था, जो नियमों के खिलाफ है।
पटना हाईकोर्ट का कड़ा रुख
मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति आलोक कुमार पांडे की एकलपीठ ने रीतलाल यादव की दलीलों को अपर्याप्त माना। अदालत ने केस की बारीकी से जांच करने के बाद पाया कि:
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अनुमोदन सही था: जेल ट्रांसफर का आदेश वास्तव में आईजी (कारा) द्वारा ही स्वीकृत (Approved) किया गया था। एआईजी ने केवल उस आधिकारिक निर्णय को आगे बढ़ाया या संप्रेषित किया था।
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कानूनी प्रक्रिया का पालन: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) ने मंजूरी दे दी है, तो आदेश केवल इसलिए अवैध नहीं हो जाता कि उस पर हस्ताक्षर किसी अधीनस्थ (Subordinate) अधिकारी के हैं।
सुरक्षा कारणों को दी प्राथमिकता
अदालत ने अपने फैसले में इस बात को रेखांकित किया कि रीतलाल यादव का स्थानांतरण किसी व्यक्तिगत द्वेष या मनमानी के कारण नहीं, बल्कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया था। कोर्ट ने माना कि जेल प्रशासन का यह निर्णय प्रशासनिक सुरक्षा के दायरे में आता है और इसमें अधिकारों का कोई दुरुपयोग नहीं हुआ है।
राजनीतिक करियर पर असर
रीतलाल यादव के लिए यह समय दोहरी मार जैसा है। जेल में बंद रहते हुए उन्होंने विधानसभा चुनाव 2025 लड़ा था, लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। अब जेल स्थानांतरण की याचिका खारिज होने से उनकी बाहर आने या पटना के करीब रहने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है।
अब आगे क्या?
फिलहाल रीतलाल यादव भागलपुर जेल में ही बंद रहेंगे। कोर्ट ने प्रशासनिक निर्णय को बरकरार रखते हुए साफ कर दिया है कि सुरक्षा सर्वोपरि है। राजद नेता के पास अब इस फैसले को खंडपीठ (Double Bench) में चुनौती देने का विकल्प बचता है, लेकिन फिलहाल उनके लिए कानूनी राहें कठिन नजर आ रही हैं।