पश्चिम बंगाल चुनाव: 12.9 लाख ‘डिलीट’ वोटरों की किस्मत का फैसला आज, क्या फिर जुड़ेंगे नाम?

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BNT Desk: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले एक बड़ा प्रशासनिक और कानूनी सस्पेंस बना हुआ है। राज्य में करीब 12.9 लाख ऐसे मतदाता हैं जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। इन मतदाताओं के भविष्य और उनके मताधिकार पर सोमवार को अंतिम फैसला होना है। चुनाव आयोग के अनुसार, सोमवार शाम तक यह स्पष्ट हो जाएगा कि इनमें से कितने लोगों को दोबारा वोट डालने का अधिकार मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट और ट्रिब्यूनल की भूमिका

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के तहत इन विवादित नामों की जांच के लिए एसआईआर (SIR) ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है। नियम के अनुसार, जो भी नाम ट्रिब्यूनल द्वारा क्लियर कर दिए जाएंगे, उन्हें मतदान शुरू होने से ठीक 48 घंटे पहले ‘सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट’ (पूरक मतदाता सूची) में शामिल कर लिया जाएगा। बुधवार को होने वाले दूसरे चरण के मतदान के लिए सोमवार का दिन इन लाखों लोगों के लिए आखिरी उम्मीद है।

पहले चरण का रिकॉर्ड: सिर्फ 139 नाम ही जुड़ सके

मतदाताओं की चिंता का सबसे बड़ा कारण पहले चरण का अनुभव है। विधानसभा के पहले चरण के दौरान भी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए थे। उस समय ट्रिब्यूनल ने गहन जांच के बाद केवल 139 मतदाताओं के नाम ही दोबारा लिस्ट में जोड़े थे, जबकि 8 नामों को पूरी तरह बाहर कर दिया गया था। इस बार प्रभावित लोगों की संख्या लाखों में है, इसलिए लोगों को उम्मीद है कि ट्रिब्यूनल इस बार अधिक संवेदनशीलता दिखाएगा।

कहाँ कटे सबसे ज्यादा नाम?

वोटर लिस्ट से नाम हटने का असर पूरे बंगाल में देखा जा रहा है, लेकिन कुछ जिले ऐसे हैं जहाँ आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं।

जिला / क्षेत्र हटाए गए नामों की संख्या
उत्तर 24 परगना 3.3 लाख
दक्षिण 24 परगना 2.2 लाख
पूर्व बर्धमान 2.09 लाख
नदिया 2.08 लाख
कोलकाता (कुल) 67,632

सबसे ज्यादा प्रभावित विधानसभा क्षेत्र

अगर विधानसभा क्षेत्रवार बात करें तो दक्षिण 24 परगना का मेटियाब्रुज इलाका सूची में सबसे ऊपर है। यहाँ अकेले 39,579 मतदाताओं के नाम डिलीट किए गए हैं। इसके अलावा अन्य प्रभावित क्षेत्र इस प्रकार हैं:

  • राजारहाट-न्यू टाउन: 24,132 नाम

  • राणाघाट नॉर्थ ईस्ट: 20,796 नाम

  • गायघाटा: 19,638 नाम

  • राणाघाट साउथ: 17,411 नाम

जनता में निराशा और चिंता का माहौल

इतने बड़े पैमाने पर नाम हटने से आम जनता में भारी आक्रोश और हताशा है। एंटली के निवासी शमीम अख्तर का कहना है कि जिस तरह पहले चरण में बहुत कम नाम जोड़े गए, उसे देखते हुए उन्हें इस बार भी ज्यादा उम्मीद नहीं दिख रही है।

वहीं, पूर्व बर्धमान की रहने वाली एक नर्स, रेणु खातून ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “लोकतंत्र में वोट देना हमारा सबसे बड़ा अधिकार है। अगर हमारा नाम लिस्ट में नहीं आया, तो हम अपनी बात कैसे रख पाएंगे? फिलहाल हम सिर्फ इंतजार कर रहे हैं।”

दूसरे चरण की तैयारी

विवरण महत्वपूर्ण जानकारी
कुल प्रभावित वोटर लगभग 12.9 लाख
फैसले की तारीख सोमवार (आज)
वोटिंग का दिन बुधवार (दूसरा चरण)
ट्रिब्यूनल का नाम एसआईआर (SIR) ट्रिब्यूनल
सप्लीमेंट्री लिस्ट मतदान से 48 घंटे पहले जारी होगी

पश्चिम बंगाल में 12.9 लाख वोटरों का नाम लिस्ट से बाहर होना किसी भी चुनाव के परिणाम को पलटने की ताकत रखता है। चुनाव आयोग और ट्रिब्यूनल के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वे कम समय में इन नामों का सत्यापन करें। सोमवार शाम को आने वाली रिपोर्ट यह तय करेगी कि बुधवार को बंगाल की जनता की भागीदारी कितनी व्यापक होगी।

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