बिहार: डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस पर रोक का विरोध, 17 मई को महासम्मेलन का ऐलान

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BNT Desk: बिहार के सरकारी डॉक्टरों के संगठन बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (BHASA) ने सरकार की नीतियों और अपनी लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को पटना के इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) परिसर में भासा की राज्यस्तरीय कोर कमिटी की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में राज्यभर के वरिष्ठ चिकित्सकों ने हिस्सा लिया और सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि डॉक्टरों के हितों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

संघ ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने बिना बातचीत के कोई भी थोपा हुआ फैसला लिया, तो राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

निजी प्रैक्टिस पर रोक

बैठक का सबसे मुख्य मुद्दा सरकार द्वारा सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस (Private Practice) पर संभावित रोक लगाने की चर्चा रही। संघ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बिना पूर्व वार्ता और संघ को विश्वास में लिए इस तरह का कोई भी निर्णय स्वीकार्य नहीं होगा।

  • डॉक्टरों का तर्क है कि यह उनके अधिकारों का हनन है।

  • संघ ने मांग की है कि ऐसे किसी भी फैसले से पहले डॉक्टरों के वेतन और भत्तों में उचित वृद्धि पर चर्चा होनी चाहिए।

लंबित मांगों की लंबी सूची

भासा ने अपनी उन मांगों को भी प्रमुखता से उठाया जो लंबे समय से फाइलों में दबी हुई हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वे कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं और सरकार को बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • ऐच्छिक-गृह जिला पोस्टिंग: डॉक्टरों को उनके गृह जिले या पसंदीदा जिले में पदस्थापना का विकल्प मिले।

  • आवास व्यवस्था: अस्पतालों के पास चिकित्सकों के लिए सुरक्षित और सुसज्जित सरकारी आवास हों।

  • अस्पतालों में सुरक्षा: ड्यूटी के दौरान डॉक्टरों पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए पुख्ता सुरक्षा प्रबंध।

  • विशेषज्ञों की बहाली: पोस्टमार्टम कार्यों के लिए फारेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञों की अलग से भर्ती की जाए।

  • वाहन सुविधा: सरकारी कार्यों और आपातकालीन सेवाओं के लिए डॉक्टरों को वाहन उपलब्ध कराया जाए।

बायोमेट्रिक उपस्थिति और वेतन कटौती पर नाराजगी

राज्य सरकार द्वारा हाल ही में बायोमेट्रिक उपस्थिति को लेकर सख्ती दिखाई गई है, जिससे डॉक्टरों में रोष है। संघ ने कहा कि बुनियादी सुविधाओं और मानव संसाधन की कमी को दूर किए बिना, केवल बायोमेट्रिक अटेंडेंस के आधार पर वेतन रोकना अन्यायपूर्ण है। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार वे दूरदराज के इलाकों में नेटवर्क की कमी या ड्यूटी की आपातकालीन स्थिति के कारण समय पर पंच नहीं कर पाते, ऐसे में वेतन काटना गलत है।

संघर्ष की अगली तारीख

अपनी मांगों को धार देने और आगे की रणनीति बनाने के लिए भासा ने एक बड़े महासम्मेलन का ऐलान किया है।

अद्यतन: आगामी 17 मई 2026 को राज्यस्तरीय जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) सह महासम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इसमें राज्य के सभी जिलों से डॉक्टर जुटेंगे और जरूरत पड़ने पर हड़ताल या कार्य बहिष्कार जैसे कड़े फैसलों पर मुहर लग सकती है।

‘संवाद से निकले समाधान’ – डॉ. विनय कुमार

संघ के प्रवक्ता डॉ. विनय कुमार ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि डॉक्टर जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उनकी समस्याओं की अनदेखी व्यवस्था को बिगाड़ सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार को हठधर्मिता छोड़कर संघ के प्रतिनिधियों के साथ मेज पर बैठकर बातचीत करनी चाहिए। संवाद के माध्यम से ही किसी भी समस्या का सकारात्मक समाधान निकाला जा सकता है।

भासा की प्रमुख मांगें एक नज़र में

श्रेणी प्रमुख मांग
प्रशासनिक ऐच्छिक-गृह जिला पोस्टिंग और लीव रिजर्व पोस्ट की स्वीकृति।
सुविधाएं पर्याप्त मानव संसाधन, सरकारी आवास और वाहन की उपलब्धता।
अकादमिक सहायक प्राध्यापक बहाली में विशेषज्ञ डॉक्टरों को अतिरिक्त अंक।
सुरक्षा कार्यस्थल पर डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून और बल।
वेतन बायोमेट्रिक के आधार पर रोके गए वेतन का तत्काल भुगतान।

बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ की इस बैठक ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिन बिहार के स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। यदि 17 मई के सम्मेलन से पहले सरकार और संघ के बीच सहमति नहीं बनती है, तो प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा सकती है। अब सबकी निगाहें स्वास्थ्य विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं।

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